महिला किसानों की उपलब्धियां

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किसान ही नहीं सफल उद्यमी भी हैं श्रीमती स्वर्णा तिजारे 

ग्राम बोरीखुर्द, वि.खं. बरघाट जिला सिवनी की सफल किसान हैं श्रीमती स्वर्णा तिजारे।

श्रीमती स्वर्णा तिजारे को एक उन्नत किसान तथा पशुपालक के साथ, सफल उद्यमी भी माना जाता है। स्वर्णा तिजारे सुव्यवस्थित गृहणी और मधुर स्वभाव की व्यवहार कुशल महिला हैं। सपरिवार खेती से जुड़ी इस महिला को लगता है कि उनके इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर रहे पुत्र को भी जैविक कृषि उत्पादों की मार्केटिंग में कैरियर बनाना उपयुक्त होगा।

इनकी सफलता में सिवनी जिले के केवीके और कृषि विभाग का भी बड़ा योगदान रहा है।  कृषि विज्ञान केन्द्र में भी स्वर्णा तिजारे की नियमित उपस्थिति तथा प्रशिक्षणों में भागीदारी रहती है।  किसान स्वर्णा तिजारे के परिवार के पास लगभग 35 एकड़ भूमि है। इसमें ये परम्परागत रूप से  गेहूं, चना, मूंग, गन्ना और मूंगफली की फसलें लेते हैं। अपनी खेती में इन्होंने रसायनिक खादों का निषेध कर रखा है। इसलिये  पूरी तरह से गोबर की खाद, बायोगैस स्लरी, वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग खाद के रूप में करते हैं। इससे फसल की क्वालिटी भी अच्छी होती है, उपज भी ज्यादा आती है और रसायनिक खादों पर होने वाले बड़े खर्च भी बच जाता है। जैविक खेती से मिलने वाले उत्पादन को जैविक गुड़, जैविक गेहूं, जैविक चावल नाम से पहचान देकर शहर में विक्रय किया जाता है। जिससे सामान्य फसलों की तुलना में इसका अधिक मूल्य मिलता है। खेतों में मौसम के अनुसार सब्जियां भी लगाई जाती हैं। भटे, टमाटर, पालक, मैथी, आलू, प्याज वगैरह सब्जियां लगाने से इन्हें ताजी सब्जियां मिल जाती हैं। साथ ही सब्जियां बेचकर अच्छी कमाई हो जाती है। खेती लाभकारी बन सके, इसलिये किसान द्वारा पशुपालन पर विशेष ध्यान दिया गया है। इनके पास लगभग 60 छोटे-बड़े पशुओं का कैटल शेड है, जहां केवल गाय पालन ही किया जाता है। इस गौशाला में कई किस्म की गाय हैं। इनमें जर्सी, एचएस, मालवी, थारपारकर, लाल सिंधी आदि प्रमुख हैं।  किसानों के समूह द्वारा सहकारिता के आधार पर दूध एकत्र किया जाता है। दूध के उत्पाद यहीं बनाये जाते हैं और इनका विपणन 'प्राची बहुआयामी सहकारी संस्था' के माध्यम से सिवनी में करते हैं। इसकी सदस्य ग्रामीण महिलाएं ही हैं। समिति की अध्यक्ष होने के कारण, स्वर्णा तिजारे स्वयं ही इस पूरे काम की देखरेख करती हैं। वर्तमान में उनकी  अपनी गौशाला से लगभग 150 लीटर दूध तथा अन्य किसानों से लेकर कोई 250 लीटर से अधिक दूध का विपणन किया जाता है। गोशाला से जो गोबर प्राप्त होता है, उसका उपयोग बायोगैस संयंत्रों में किया जाता है।

कृषक स्वर्णा और इनके परिवार ने सिंचाई जल का प्रबंध करने के लिये दो तालाब भी बनवाए हैं। इन तालाबों से सिंचाई के अलावा  मछली पालन तथा सिंघाड़े की खेती करके अतिरिक्त आय भी ली जाती है। इन तालाबों में रोहू, कतला, मिर्गल, समल किस्मों की मछली के बीज डाले गए हैं। 

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