बीज उपचार में लाभप्रद सूक्ष्मजीवों की भूमिका

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लाभप्रद सूक्ष्म जीव:

लाभप्रद सूक्ष्म जीव कवकीय या जीवाणुवीय उत्पत्ति के होते हैं जो शीघ्र विकासशील व प्रचुर मात्रा में बीजाणुओं का उत्पादन करते हैं। इन जीवाणुओं से राइजोक्टोनिया फ्यूजेरियम पीथियम फाईटोफ्थोरा स्क्लेरोशियम इत्यादि के द्वारा होने वाली विभिन्न प्रकार की बीमारियों जैसे जड़ सडऩ, आद्र्रगलन, उकठा या उगरा बीज सडऩ, अंगमारी आदि को नियंत्रित करते हैं। लाभप्रद सूक्ष्म जीव जैसे कवक, ट्राईकोडर्मा विरिडी, ट्राइकोडर्मा हार्जिनियम तथा जीवाणुओं  स्यूडोमोनास फ्लोरेन्स, बेसीलस सब्ट्रिलिस स्यूडोमोनास आदि का उपयोग बीज उपचार पौधशाला व खेतों में बुवाई से पूर्व करके रोगों का नियंत्रण करते हैं। रोग नियंत्रण के साथ साथ यह सूक्ष्म जीव पौध विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनको कार्बनिक पदार्थ जैसे कि पकी हुई गोबर खाद के साथ मिलाकर उपयोग करने से इन जीवाणुओं से अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। राइजोबियम व माइकोराइजा आदि सूक्ष्म जीव अधिकांश फसलों में सहजीवी संबंध रखते हंै ये जो पौधे के वृद्धि व विकास को गति प्रदान करते है। 

क्रियाविधि :  लाभप्रद सूक्ष्म जीव भोज्य पदार्थों स्थान जल आदि की शीघ्रता से उपयोग करते हैं जिससे हानिकारक कवकों को बढऩे के लिए पर्याप्त भोज्य पदार्थ, वायु, स्थान, जल नहीं मिल पाता है। जैव कारक जैसे ट्राईकोडर्मा जमीन व बीज में पनपने वाले रोग कारक कवकों जैसे पीथियम राइजोक्टोनिया, फ्यूजेरियम, स्क्लेरोशियम आदि के पेश तंतुओं में प्रवेश करके उन्हें मार देती है जिससे उनकी वृद्धि नहीं हो पाती है। इसके अलावा  विशेष प्रकार के एंजाइम का स्त्राव किया जाता है जिससे रोग कारक पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। 

बीज एक ऐसा कृषि आदान है जिसके सहारे पर स्वस्थ व गुणवत्ता युक्त फसल की नीव निर्भर करती है। फसल का अच्छा उत्पादन स्वस्थ बीज व उसकी गुणवत्ता पर निर्भर रहता है। फसल उत्पादन की कुल लागत का लगभग 20 से 30 प्रतिशत भाग सिर्फ  बीज पर ही व्यय हो जाता है। बीज उपचार एक महत्वपूर्ण चरण है, जो आश्वस्त करता है की पौधा कीट बीमारियों से बचा रहेगा तथा उत्पादन भी अधिक प्राप्त होगा। बीजोपचार द्वारा बीज एवं मृदा जनित बीमारियों की रोकथाम सफल तो होती ही है साथ ही लाभप्रद सूक्ष्म जीवों द्वारा वातावरण की नाइट्रोजन पौधों को उपलब्ध कराते है और जमीन में उपस्थित अघुलनशील फास्फोरस को घुलनशील बना के पौधों के लिए उपलब्ध कराते हैं, जिससे फसलों में नाइट्रोजन एवं फास्फोरस की पूर्ति होने के कारण उत्पादन लागत कम होती है, साथ ही उत्तम उत्पादन प्राप्त होता है। 

लाभप्रद सूक्ष्म जीवों को उपयोग में कैसे लायें:

बीज उपचार द्वारा: अधिकांश रोगजनक, बीज के साथ या उसके अंदर पाये जाते हैं। अत: इनकी रोकथाम के लिए बीज उपचारित करना चाहिए। इसके लिए ट्राइकोडर्मा विरिडी, हार्जिनियम या स्यूडोमोनास 4 से 8 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें। 

कंद उपचार द्वारा : आलू, अदरक, केला, अरबी आदि जिनकी गांठों तथा कंदों का उपयोग बीज के रूप में किया जाता है, उनको उपचारित करने के लिए एक किलोग्राम मात्रा को 100 लीटर पानी मे घोल बनाकर इनकी 100 किलोग्राम मात्रा को 30 मिनिट तक डुबाये तत्पश्चात छांव में सुखाकर बोवाई करें। 

पौध रोपण से पूर्व : पौधशाला में उगाये गए पौधों को खेत में लगाने से पूर्व उनकी जड़ों को सूक्ष्म जीवों जैसे ट्राइकोडर्मा या स्यूडोमोनास के घोल (100 ग्राम मात्रा को 10 लीटर पानी में) में कुछ देर तक डुबोकर रखने के बाद खेत में लगाएं। 

भूमि उपचार में : पौध शाला में 400 वर्ग मीटर भूमि हेतु 250 ग्राम ट्राइकोडर्मा को 20 किलोग्राम अच्छी पकी हुए खाद में मिलाकर डालना चाहिए। इसी प्रकार खेत में पौधे लगाने या बुवाई पूर्व एक किलोग्राम ट्राइकोडर्मा या स्यूडोमोनास को 100 किलोग्राम गोबर की पकी हुए खाद में मिलाकर भूमि में उपयोग करना चाहिए ।

बीज उपचार की विधि : बीज को या तो सूखे मिश्रण से या फिर लुगदी अथवा तरल घोल से गीले रूप में उपचारित किया जाता है। इसके लिए बीजों के उपचार हेतु बीज उपचार ड्रम का उपयोग किया जाता है। ड्रम के अन्दर निर्धारित मात्रा में बीज एवं दवा की मात्रा लेकर ड्रम का ढक्कन बंदकर 10 से 15 मिनट तक घुमाते हैं जब बीज की सतह पर दवा की परत दिखाई दे तब बीजोपचार की प्रक्रिया पूर्ण हो जाती है।     

कम लगत में बीजोपचार करने के लिए मिट्टी के बर्तन अथवा पॉलीथिन का भी उपयोग किया जा सकता है। मिट्टी के बर्तन में दवा और बीज निर्धारित मात्रा में लेकर बर्तन का मुंह बंद करके उसे अच्छी तरह हिलाकर बीजोपचार किया जा सकता है। इसके अलावा पॉलीथिन सीट पर बीजों के ऊपर जीवाणु कल्चर या रसायन को फैलाकर किसानों द्वारा यांत्रिक रूप से मिलाया जा सकता है। 

क्र. लाभप्रद सूक्ष्म जीव    पाउडर मात्रा तरल मात्रा
1  राइजोबियम 200 ग्राम/10 से 12 किग्रा बीज को 200 मिली पानी के साथ उपचारित करें 100 ग्राम तरल 10 किग्रा बीज को 200 मिली पानी के साथ उपचारित करें
2 एजोस्पाईरलम 200 ग्राम/10 से 12 किग्रा बीज को 200 मिली पानी के साथ उपचारित करें 100 ग्राम तरल  10  किग्रा बीज को 200 मिली पानी के साथ उपचारित करें
3  एजोटोबेक्टर 200 ग्राम/10 से 12 किग्रा बीज को 200 मिली पानी के साथ उपचारित करें 100 ग्राम तरल  10  किग्रा बीज को 200 मिली पानी के साथ उपचारित करें
4 फास्फोरस घोलक जीवाणु (पीएसबी) 250 ग्राम/10 से 12 किग्रा बीज को 200 मिली पानी के  साथ उपचारित करें 100 ग्राम तरल  10  किग्रा बीज को 200 मिली पानी के साथ उपचारित करें
5 ट्राइकोडर्मा  250 ग्राम/10 से 12 किग्रा बीज को 200 मिली पानी के साथ उपचारित करें  साथ उपचारित करें100 ग्राम तरल  10  किग्रा बीज को 200 मिली पानी के
6 स्यूडोमोनास  250 ग्राम/10 से 12 किग्रा बीज को 200 मिली पानी के साथ उपचारित करें 100 ग्राम तरल  10  किग्रा बीज को 200 मिली पानी के साथ उपचारित करें

बीज उपचार करते समय सावधानियां

  • बीजों को पहले फफंूदनाशक फिर कीटनाशक दवा से उपचारित करना चाहिए उसके पश्चात ही जैविक कल्चर से उपचार करें। 
  • जैव उर्वरक हमेशा विश्वासनीय स्त्रोत से ही खरीदें। 
  • राइजोबियम कल्चर जैव उर्वरक हमेशा फसल विशेष पर ही प्रयोग करें। 
  • जैव उर्वरक लेते समय पैकेट पर अंकित निर्माण एवं प्रयोग की अंतिम तिथि अवश्य देखें। 
  • उपचारित बीज को तुरंत बोने हेतु उपयोग करें। 
  • हमेशा ताजे कल्चर का प्रयोग करें। 
  • यदि बोने के बाद उपचारित बीज की मात्रा बच जाए तो उसे पशुओं एवं बच्चों की पहुंच से दूर रखें। 
  • दवा के खाली डिब्बे या पैकेट नष्ट कर दें। 
  • फसलों को बीज जनित एवं मृदा जनित रोगों से बचाने व पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए बीजों को बोने से पूर्व कुछ लाभप्रद  सूक्ष्म जीवों से उपचारित किया जाता है। 

 

  • ब्रजेश कुमार नामदेव

 email : brajesh.jnkvv@gmail.com

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