कृषि विपणन

किसानों के लिए स्कीम, सहायता, सुविधा

कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार, किसानों के लाभार्थ विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का कार्यान्वयन अपने संस्थानों/ संगठनों और राज्य सरकारों के माध्यम से करता है। इसमें प्रकाशित की गई विभिन्न स्कीमों से संबंधित निर्देशों, परिपत्रों और अनुदेशों से इन स्कीमों के अंतर्गत प्रोत्साहित विभिन्न घटकों के लाभों के प्रकार और उनकी सीमा के बारे में आवश्यक जानकारी उपलब्ध होती है।

कृषक जगत द्वारा शृंखलाबद्ध रूप से किसानों को जानकारी दी जाएगी और क्षेत्र विस्तार कर्मियों, गैर सरकारी संगठनों एवं कृषि विकास कार्य में लगे हुए तथा नीति निर्माताओं के लिए एक रेडी रेकनर के रूप में उपयोगी होगी। इसमें विभिन्न स्कीमों/ कार्यक्रमों से संबंधित सूचना कृषि क्षेत्र के लोग उचित समय पर प्राप्त कर पाएंगे।

                   - सम्पादक

 

 क्या करें?
  • किसान अपनी उपज की कीमत की जानकारी एगमार्क नेट वेबसाइट (www.agmarknet.nic.in) पर या किसान काल सेंटर अथवा एसएमएस के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।
  • अपनी आवश्यकतानुसार उपलब्ध एसएमएस को देखें और सूचना प्राप्त करें।
  • फसल की कटाई और गहाई उचित समय पर की जानी चाहिए।
  • उचित कीमत के लिए बिक्री से पहले उचित ग्रेडिंग, पैकिंग और लेबलिंग की जानी चाहिए।
  • उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए उचित बाजार/मंडी में बिक्री के लिए जाएं।
  • अधिकतम लाभ के लिए उपज का भण्डारण करके बेमौसम में बिक्री करनी चाहिए।
  • मजबूरन बिक्री से बचना चाहिए।
  • बेहतर विपणन सुविधाओं के लिए किसान समूह में सहकारी विपणन समितियां एफपीओ गठित कर सकते हैं।
  • विपणन समितियां खुदरा और थोक दुकानें खोल सकती हैं।
  • मजबूरन बिक्री से बचने के लिए किसान उपज के भण्डारण के लिए शीत भंडारण और गोदाम बना सकते हैं।
 आईएमएएम की एएमआई अपयोजना

भण्डारण इंफ्रास्ट्रक्चर सहित कृषि विपणन इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा एकीकृत कृषि विपणन योजना (आईएमएएम) की एक पूंजी निवेश सब्सिडी उपयोजना 'कृषि विपणन इंफ्रास्ट्रक्चर' (एमआई) का क्रियान्वयन किया जा रहा है। पूर्व की दो योजनाओं अर्थात (1) 01-04-2001 से लागू की गई ग्रामीण भंडारण योजना (जीबीवाई) और (2) 20-10-2004 से लागू की गई कृषि विपणन इंफ्रास्ट्रक्चर, श्रेणीकरण एवं मानकीकरण के सुदृढ़ीकरण/ विकास की योजना (एएमआईजीएस) को दिनांक 01-04-2014 से कृषि विपणन इंफ्रास्ट्रक्चर (एएमआई) नामक योजना में आमेलित कर दिया गया है। आईएसएएम की एएमआई उपयोजना को 12वीं योजना अवधि (2012-17) के लिए स्वीकृति प्रदान की गई थी। वर्तमान में यह योजना किसी भी श्रेणी के लाभार्थी के लिए उपलब्ध नहीं है।

इसके अतिरिक्त देश में भंडारण परियोजनाओं सहित अतिरिक्त कृषि विपणन इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं सृजित करने हेतु एएमआई उपयोजना को 14वें वित्त आयोग की सहसमाप्य अवधि तक के लिए पुन: शुरू करने हेतु स्वीकृत किया है।

 किससे संपर्क करें ?

उप कृषि विपणन सलाहकार (एएमआई), विपणन एवं निरीक्षण निदेशालय (डीएमआई), सीजीओ कॉम्पलेक्स, एनएच-ढ्ढङ्क, फरीदाबाद (हरियाणा) दूरभाष : 0129-2434348, ईमेल- rgs.agri@nic.in

 राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम)

कृषि विपणन क्षेत्र में प्रवेशक सुधार के उद्देश्य से और किसानों को अधिकतम लाभ देने के लिए पूरे देश में कृषि जिन्सों की ऑन-लाइन विपणन को प्रोत्साहन देने के लिए भारत सरकार ने दिनांक 01-07-2015 को राष्ट्रीय कृषि बाजार कार्यान्वयन के लिए एक योजना अनुमोदित की है। इस योजना के अंतर्गत सभी 585 नियमित बाजारों में यथोचित सामान्य ई-मार्केट प्लेटफार्म उपलब्ध कराया गया है, जिससे ऑन-लाइन ट्रेडिंग करने, ई-परमिट जारी करने और ई-भुगतान आदि करने के साथ-साथ बाजार के संपूर्ण कार्य के डिजिटलाइजेशन को प्रोत्साहित किया जा सके। इसके साथ-साथ सूचना विषमता को दूर करने, लेन-देन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और पूरे देश के बाजारों में पहुंच आसान बनाने में इससे सहायता मिलेगी। यह किसानों को वास्तविक लाभ देने के लिए आवश्यक होगा। राष्ट्रीय कृषि विपणन (एनएएम) दिशा-निर्देश शीघ्र ही 14-04-2016 को 8 राज्यों की 21 मंडियों में शुरू किया गया है।

 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ)

एफपीओ में किसान कैसे सम्मिलित हों

किसानों का एक समूह जो वास्तव में कृषि उत्पादन कार्य में लगा हो और जो कृषि व्यवसायिक गतिविधियां चलाने में एक जैसी धारणा रखते हों, एक गांव अथवा कई गांवों को सम्मिलित कर एक समूह बना सकते हैं और संगत कंपनी अधिनियम के अधीन एक किसान उत्पादन कंपनी के पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।

ई-नाम एकीकृत मंडियों का 16 राज्यों और 2 संघ शासित प्रदेशों में विस्तार
राज्य एकीकृत मंडिया
आंध्र प्रदेश 22
चंडीगढ़ 1
छत्तीसगढ़ 14
गुजरात 79
हरियाणा 54
हिमाचल प्रदेश 19
झारखंड 19
मध्यप्रदेश 58
महाराष्ट्र 60
ओडिशा 10
पुडुचेरी 2
पंजाब 19
राजस्थान 25
तमिलनाडु 23
तेलंगाना 47
उत्तर प्रदेश 100
उत्तराखंड 16
पश्चिम बंगाल 17
कुल 585
 अधिक जानकारी के लिए कृपया लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी), नई दिल्ली (ई-मेल आईडी : nam@sfac.in को संपर्क करें। योजनाओं की विस्तृत जानकारी www.enam.gov.in पर उपलब्ध है।

एफपीओ के गठन से किसान को क्या लाभ होंगे

  • यह एक प्रभावी संगठन होने के कारण एफपीओ के सदस्य के रूप में किसानों को बेहतर सौदेबाजी करने की शक्ति देगी जिससे उन्हें जिंसों को प्रतिस्पर्धात्मक मूल्यों पर खरीदने या बेचने का उचित लाभ मिल सकेगा।
  • बेहतर विपणन सुअवसरों के लिए कृषि उत्पादों का एकत्रीकरण। बहुलता में व्यापार करने से प्रसंस्करण, भण्डारण, परिवहन इत्यादि मदों में होने वाले संयुक्त खर्चों से किसानों को बचत।
  • एफपीओ मूल्य संवर्धन के लिए छंटाई/ग्रेडिंग, पैकिंग, प्राथमिक प्रसंस्करण इत्यादि जैसी गतिविधियां शुरू कर सकता है जिससे किसानों के उत्पाद को उच्चतर मूल्य मिल सकता है।
  • एफपीओ के गठन से ग्रीन हाउस, कृषि मशीनीकरण, शीत भण्डारण, कृषि प्रसंस्करण इत्यादि जैसे कटाई पूर्व और कटाई पश्चात संसाधनों के उपयोग में सुविधा।
  • एफपीओ आदान भण्डारों, कस्टम केन्द्रों इत्यादि को शुरू कर अपनी व्यवसायिक गतिविधियों को विस्तारित कर सकते हैं। जिससे इसके सदस्य किसान आदानों और सेवाओं का उपयोग रियायती दरों पर ले सकते हैं।

एफपीओ में आवेदन करने के लिए संपर्क सूत्र

आमतौर पर कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग द्वारा राज्यों में कार्यान्वित विभिन्न केन्द्रीय क्षेत्र योजनाओं के अंतर्गत एफपीओ को प्रोत्साहित किया जाता है। एफपीओ गठित करने के इच्छुक किसानों को विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित विभाग/ लघु कृषक कृषि व्यवसाय संगठन के निदेशक (ई-मेल : sfac@nic.in) से संपर्क कर सकते हैं।

एसएफएसी देश के 11 राज्यों में एनएफएसएम के तहत दालों और बाजरा के मूल्य विकास के लिए 145 एफपीओ को बढ़ावा दे रहा है। एसएफएसी के मानदंड के अनुसार, रुपये 62.75 लाख की राशि प्रति एफपीओ  फार्मूलेशन, पंजीकरण, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, प्रबंधन और विपणन और मिनी दाल मिल की स्थापना के लिए प्रदान किया जाता है।

अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी से संपर्क करें।

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