गेहूं की शून्य जुताई से करें बुवाई

जीरोटिलेज क्यों और कैसे: अनुसंधान से यह पाया गया है कि अगर गेहूं की बुवाई 25 नवंबर के बाद करते हैं तो प्रतिदिन 25-30 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर उपज में कमी आती है। इसके साथ-साथ खेत को तैयार करने के लिए होने वाले खर्च को भी बचाया जा सकता है। अत: मशीन द्वारा समय पर बुवाई करके पैदावार में होने वाले नुकसान को बचाया जा सकता है। बाजरा, कपास तथा धान की फसलों में अगर हो सके तो कटाई से कुछ दिन पहले या कटाई के बाद सिंचाई कर दी जाती है। फसल कटाई होते ही बची हुई नमी में तुरंत इस मशीन द्वारा सीधे तौर पर गेहूं की बुवाई कर दी जाती है। इस प्रकार खेत तैयारी में जो समय लगता है उसे सुचारु रूप से दूसरे खेती कार्यों में उपयोग किसान भाई कर सकते हैं।

जीरोटिलेज कहां: जहां पर फसल कटाई में या देर से पकने में ज्यादा समय लगता है तथा गेहूं की बुवाई 25 नवंबर के बाद हो पाती है वहां पर इस मशीन का उपयोग अति लाभदायक सिद्ध हुआ है। इस मशीन का उपयोग अति चिकनी मिट्टी को छोड़कर सभी प्रकार की मिट्टी में सुचारु रूप से किया जा सकता है।

आज के समय में गेहूं की खेती करते समय किसान भाई अगर भूमि के साथ ज्यादा खिलवाड़ न करके बोएं या यूँ कह सकते हैं कि जुताई अगर शून्य के बराबर करें तो अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं। शून्य जुताई से गेहूँ बुवाई एक अनोखी तकनीक है जिसका नाम है जीरोटिलेज एवं सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल मशीन व हैप्पी शीडर आदि माशीनें जीरोटिलेज के लिये उपयुक्त हैं। इन मशीनों से किसान भाई बाजरा, कपास, धान, सोयाबीन आदि की फसलों की कटाई करते ही तुरंत पलेवा करके गेहूँ की बुवाई सीधे जमीन में कर सकते हैं। इस तकनीकी से जो समय एवं लागत जुताई आदि में लगती है उसे बचाया जा सकता है। बीजों की उचित दूरी पर तथा समान रूप से बुवाई की जा सकती है। इस विधि से बीज तथा खाद एक साथ बोये जा सकते है। वैज्ञानिक तौर पर यह पूरी तरह सिद्ध हो चुका है कि बाजरा, गेहूं, कपास-गेहूं तथा धान-गेहूं, सोयाबीन-गेहूं फसलचक्र वाले क्षेत्रों में यह मशीन पूरी तरह उपयोगी पाई जाती है। यह तकनीक हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी उत्तरप्रदेश राज्यों में किसान भी अत्यधिक अपना रहे हैं तथा गेहूं की बुवाई कम लागत में करके अधिक पैदावार प्राप्त कर रहे हैं।

जीरो टिलेज तकनीक के लाभ:

  • खेत की तैयारी पर होने वाले खर्च को 1200-1500 रुपए प्रति एकड़ तक बचाया जा सकता है।
  • इस मशीन द्वारा एक एकड़ को एक घंटे में बोया जा सकता है जब कि सामान्य अवस्था में 5-6 घंटे लगते हैं।
  • इस मशीन द्वारा समय की बचत की जा सकती है जिसका सदुपयोग किसान दूसरे खेती कार्यों में कर सकते हैं।
  • इस विधि द्वारा बीज तथा खाद समुचित गहराई तथा दूरी पर बोया जा सकता है तथा बीज की मात्रा भी उचित रहती है।
  • खरपतवार के जमाव में 40-50 प्रतिशत तक कमी होती है क्योंकि जुताई न होने पर बीज गहराई में ही दबा रहता है।
  • इस मशीन के उपयोग से बुआई के पश्चात वर्षा होने पर पपड़ी नहीं जमती।
  • मजदूरी तथा डीजल में 25-30 प्रतिशत तक बचत की जा सकती है जिससे पर्यावरण शुद्ध रहता है।
  • पहली सिंचाई के समय पानी को 10-20 प्रतिशत तक बचाया जा सकता है।
  • इस तकनीक का उपयोग करने से अलग-अलग शोध से पाया गया है कि फसल उत्पादन में 10-15 प्रतिशत तक बढ़त होती है।
  • बाजरा तथा धान किसानों को जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती जिससे पर्यावरण शुद्ध तथा भूमि की उर्वराशक्ति में वृद्धि होती है।
  • इस तकनीकी द्वारा बिजाई करने में भूमि में नमी बनी रहती है ैजिससे फसल में हवा नहीं निकलती तथा पकाव अच्छा होता है।
  • इस मशीन द्वारा गेहूं बिजाई करके सालों-साल किसान भाई अच्छी पैदावर ले सकता है।
  • इस मशीन का उपयोग ग्रीष्मकालीन मूंग बिजाई में भी किसान सरसों व गेहूं के खेत में कर सकता है।

जीरोटिलेज संबंधी कुछ महत्वपूर्ण सुझाव:

  • बाजरा, कपास तथा धान कटाई करते समय यह ध्यान रखें कि डंठल/फानें ज्यादा बड़े ना हों।
  • अगेती बिजाई करने से फसल उत्पादन में वृद्धि होती है।
  • मशीन की देख-रेख समय-समय पर करते रहें तथा उचित स्थान पर रखें।
  • इस मशीन को चलाने के लिए प्रशिक्षण लेना जरुरी है।
  • बिजाई करते समय उचित गहराई करने हेतु मशीन के दोनों तरफ पहिये से स्क्रूबोल्ट की सहायता से ऊपर नीचे रख सकते हैं।
  • मशीन के दोनों तरफ ड्राविंग व्हील होते है इससे आवश्यकतानुसार दिए गए ग्रुप की सहायता से व्यवस्थित कर सकते हैं।
  • मशीन चलते समय पीछे दिए गए लकड़ी के फट्टे पर बैठकर एक व्यक्ति को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए की बीज या खाद सही निकल रहे हैं या नहीं, कोई नल की बंद तो नहीं हैं।
  • इस मशीन द्वारा किसान भाईयों से सुझाव दिया जाता है कि गेहूं बीज की मात्रा 50 कि. ग्रा. प्रति एकड़ प्रयोग करें।

 

  • दीपक चौहान
  • डॉ. मृगेन्द्रसिंह 
  • पी. एन. त्रिपाठी
  • अल्पना शर्मा 

Email: kvkshahdol@rediffmail.com

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