लहसुन की खेती के लिए उपयुक्त कृषि यंत्र

लहसुन की खेती मुख्यत: छोटे एवं सीमांत किसानों द्वारा की जाती है। मजदूरों की उपलब्धता न होने के कारण एवं संसाधनों के अभाव में लहसुन की खेती बड़े पैमाने पर नहीं की जा रही है। कई तकनीक उपलब्ध हैं परन्तु किसानों को उनकी जानकारी न होना भी इसका एक प्रमुख कारण है। बड़े पैमाने पर लहसुन का उत्पादन करने में कृषि यंत्रों का महत्वपूर्ण योगदान है। कृषि यंत्रीकरण द्वारा कृषि के विभिन्न कार्यों को समय पर पूर्ण करके कृषि क्षेत्र में उत्पादन, उत्पादकता एवं लाभप्रदता बढ़ाने में मदद मिलती है। यंत्रों के उपयोग से समय की बचत के साथ ही साथ कार्य कुशलता एवं दक्षता में भी वृद्धि होती है। यंत्रों द्वारा कृषि में प्रयुक्त आदानों जैसे कि बीज, खाद, सिंचाई जल एवं रसायनों का उचित समय पर उपयोग किया जा सकता है। जिसके फलस्वरूप उत्पादन की इकाई लागत को कम करके मुनाफे को बढ़ाया जा सकता है। लहसुन की खेती के लिए विभिन्न प्रकार के कृषि यन्त्र उपलब्ध है।

भूमि जुताई के लिए प्रयुक्त यन्त्र

कृषि में जुताई एक महत्वपूर्ण कार्य है। इसका मुख्य उद्देश्य खेत को बीज के बोने, जमने तथा पौधे के बढऩे के लिये उचित दशा में तैयार करना है। लहसुन के उत्पादन के लिए समतल तथा खरपतवार रहित भूमि अत्यंत आवश्यक है। मोल्ड बोर्ड या डिस्क प्लाऊ की सहायता से 20-25 से.मी. गहरी जुताई की जाती है। इसके बाद कल्टीवेटर को 2-3 बार चला कर मिट्टी को भुरभुरा किया जाता है। बुवाई पूर्व मिट्टी को अच्छी तरह तैयार करने के लिए रोटावेटर का उपयोग काफी लाभकारी साबित होता है। यह यन्त्र कम समय तथा कम लागत में मिट्टी को तैयार करने के लिए उपयुक्त है।

लहसुन भारत में उगाए जाने वाली एक महत्वपूर्ण बल्ब फसल है। इसका रसोई में तथा चिकित्सा के क्षेत्र में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। भारत में 2.8 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में लहसुन की खेती की जाती है जिससे 5.76 टन/हेक्टेयर की उत्पादकता के साथ 16.17 लाख टन कुल उत्पादन होता हैं। भारत के कई हिस्सों में लहसुन की बुवाई नवंबर एवं दिसंबर माह में होती है तथा इसकी कटाई अप्रैल-मई महीने में की जाती है। इसकी खेती के लिए मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, असम, पंजाब, पश्चिम बंगाल और हरियाणा का मौसम बहुत ही उपयुक्त माना जाता है।
 

रेज्ड बेड मेकर

पिछले कुछ वर्षो से रेज्ड बेड तकनीक द्वारा फसलों की बुवाई में वृद्धि पाई गयी है। इस तकनीक द्वारा ऊँची उठी हुई क्यारी पर फसलों की बुवाई की जाती है। रेज्ड बेड तकनीक द्वारा बोई हुई फसलें कम अथवा बहुत अधिक वर्षा होने पर भी बेहतर उत्पादन देती हैं। भूमि को तैयार करने के बाद रेज्ड बेड मेकर यंत्र द्वारा खेतों में बेड बनाये जाते हंै। बेड की चौड़ाई तथा पंक्तियों के मध्य दूरी विभिन्न फसलों एवं मिट्टी के प्रकार पर निर्भर करती है। रेज्ड बेड मेकर यंत्र में बेड की चौड़ाई को बदलने का प्रावधान होता है।

लहसुन सीडड्रिल

किसानों द्वारा प्राय: लहसुन की बुवाई छोटे भूखंडों में 10-15 से.मी. दूर कतारी में 3-5 से.मी. गहराई में की जाती है। मशीन द्वारा बुवाई करने के लिए लहसुन सीड ड्रिल उपलब्ध है। इसके द्वारा एक साथ 17 कतारों में बुवाई कर सकते हैं। बुवाई की दर 5-7 क्ंिवटल प्रति हेक्टेयर रखी जाती है। इसके माध्यम से बुवाई के साथ-साथ गहराई में उर्वरक भी डाला जा सकता हैं। इस मशीन की कार्यक्षमता 0.50-0.65 हेक्टेयर प्रति घंटा है। मशीन द्वारा पंक्तिबद्ध तरीके से बुवाई करने से बीज दर में भी कमी आती है।

रसायन छिड़काव यंत्र

प्राय: फसल पर कीट तथा बीमारियों का प्रकोप होता है। इन बीमारियों के प्रकोप से पूरी फसल नष्ट भी हो जाती है। इसके अतिरिक्त पौधे की वृद्धि को खरपतवार से भी नुकसान होता है। कीट, बीमारियों एवं खरपतवार की रोकथाम के लिए विभिन्न प्रकार के रसायनों का उपयोग किया जाता है। लहसुन में इन रसायनों का छिड़काव नैपसेक या बूम प्रकार के स्प्रेयर से करना उचित रहता है। नैपसेक स्प्रेयर को कंधों पर बेल्ट द्वारा लगाकर रखा जाता है। इसकी कार्यक्षमता 0.4 हेक्टेयर/दिन है। इसका वजन 7.5 किलोग्राम होता है, यह 10-18 लीटर की टंकी में उपलब्ध हैं। बूम स्प्रेयर ट्रैक्टर चालित होता है। इसमें रसायन का प्रवाह उच्च दाब पंप के माध्यम से टंकी से नोजल तक होता है।  इसमें नोजल की संख्या 10 से 20 तक होती है। लहसुन की फसल में बूम स्प्रेयर के उपयोग हेतु ट्रैक्टर के पहियों के मध्य की चौड़ाई को ध्यान में रखकर फसल को पंक्तियों में रोपित करना आवश्यक है।

लहसुन हार्वेस्टर

लहसुन को प्राय: किसानों द्वारा मिट्टी को खोदकर या इसके तने को हाथों से खींच कर निकाला जाता है। इस कार्य में बहुत समय लगता है। इसके लिए प्रति हेक्टर लगभग 30-35 मजदूरों की आवश्यकता होती है। कई जगह पर किसानों द्वारा बक्खर या कल्टीवेटर द्वारा खोद कर भी लहसुन को निकाला जाता है। इससे नुकसान अधिक होता है एवं लहसुन को इकठ्ठा करने में मजदूरी की लागत भी आती है। ट्रैक्टर चलित लहसुन खोदने वाले यंत्र से यह काम बड़ी आसानी से किया जा सकता है। इस मशीन में एक 1.5 मीटर चौड़ी ब्लेड लगी होती है जो मिट्टी को खोदने का काम करती है। इसके बाद लहसुन को चैन टाइप की पृथककरण जाली से गुजारा जाता है। पृथककरण जाली में लोहे की छड़ें समान दूरी पर लगी होती हंै। मशीन के संचालन के दौरान पृथककरण जाली से पौधों में लगी मिट्टी अलग हो जाती है। इस जाली के पिछले हिस्से से लहसुन गिरकर एक पंक्ति में जमा हो जाते हैं। इसके बाद लहसुन की गांठों को 3-4 दिनों तक खेत में सुखाया जाता है। इस मशीन को ट्रैक्टर के पीटीओ द्वारा संचालित किया जाता है। मशीन की कार्यक्षमता 0.25 से 0.30 हेक्टेयर प्रति घंटा है। इसकी परिचालन लागत 3000-3500 रुपये प्रति हेक्टेयर है। काली मिट्टी में यह मशीन चलाने के लिए थोड़ी नमी होना आवश्यक है। लाल मिट्टी में इसे बड़ी सुगमता से चलाया जा सकता है।

 

लहसुन की गांठ तोडऩे की मशीन

लहसुन की बुवाई के लिए रोपण सामग्री लहसुन की कली (क्लोव) होती है। इन कलियों को हाथ से या लकड़ी द्वारा गांठ से अलग करते हैं। यह पारंपरिक विधि बहुत समय लेने वाली होती है तथा इसमें श्रम लगत भी अधिक होती हैं। इस कार्य को बल्ब ब्रेकर मशीन द्वारा आसानी से कर सकते हैं। इस मशीन के संचालन के लिए सर्वप्रथम लहसुन को हॉपर में भरा जाता हैं। तत्पश्चात लहसुन की गांठ को दो घूमते हुए ड्रमों के मध्य से गुजारा जाता है। जिससे कि कलियाँ गांठ से पृथक हो जाये। एक ब्लोअर की सहायता से छिलकों को कलियों से अलग कर लिया जाता है। इस मशीन द्वारा कलियों को उनके आकार के अनुसार पृथक्करण भी किया जाता है। यह मशीन ट्रैक्टर अथवा विद्युत चालित होती है। ट्रैक्टर तथा विद्युत चालित मशीन की कार्य क्षमता क्रमश: 25-30 एवं 10-15 क्ंिवटल प्रति घंटा होती है।  

 

  • डॉ. दिलीप जाट
  • डॉ. एन. एस. चंदेल
  • इंजी.सैयद इमरान
  • email : dilipjat2000@gmail.com
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