दुधारू पशुओं में जेर का रुकना एक गंभीर समस्या

  • पशुओं में ब्यांत के पश्चात जेर का  रुकना एक गंभीर और आम समस्या है जिसके कारण पशु तथा पशुपालक दोनों को हानि होती होती है।
  • जेर रुकने की समस्या मुख्यत: दुधारू पशुओं में अधिक देखने को मिलती है।
  • पशुओं में  जेर रुकने के फलस्वरूप गर्भाशय के  भीतरी सतह में सूजन, गर्भाशय में सूजन और गर्भाशय में मवाद का भरना इत्यादि जैसी गंभीर बीमारियाँ पनपती हैं जिससे कि पशुओं में बुखार, खाने में कमी, जनन क्षमता में कमी तथा दुग्ध उत्पादन अत्यधिक प्रभावित होता है जिससे किसान को हानि होती है।
  • सामान्यत: पशुओं में ब्यांत के पश्चात तीन से आठ घंटे के भीतर ही जेर स्वत: धीरे-धीरे बाहर निकल जाती है, परन्तु यदि जेर आठ से बारह घंटे तक नहीं निकलती है तो यह जेर रुकने जैसी समस्या का सूचक है।
  • पशुपालक को चौबीस घंटे तक जेर के निकलने का इन्तजार करना चाहिए और ना निकलने पर योग्य पशुचिकित्सक से सलाह और उपचार कराना चाहिए।

रोग का पूर्वानुमान

  • जेर के रुकने से मादा पशुओं में मृत्युदर एक प्रतिशत से भी कम होती है परन्तु इसके फलस्वरूप पशुओं में शरीर का गिरना (वजन घटना), बांझपन, पशुपालक के आय श्रोत में कमी, दुग्ध उत्पादन में कमी तथा दोबारा गॢभत होने में देर होना इत्यादि आम है।
  • जेर के रुकने से गर्भाशय के आकार का पुनिर्माण देर से होता है और गर्भाशय में सूजन आ जाती है।
  • जेर रुकने से मादा पशुओं में बांझपन का कारण गर्भाशय तथा अंडाशय में सूजन, गर्भाशय की भीतरी सतह में अत्यधिक क्षति का होना है।

उपचार एवं प्रबंधन

जेर के रुकने का उपचार सामान्यत: चार प्रकार से किया जाता है-

  • (क) हाथ से जेर को निकालना जिसमे योनि में हाथ डालकर जेर के लटकते भाग को पकड़कर हल्का जोर लगाकर खीचा जाता है जिससे जेर बाहर निकल जाता है, हाथ को योनि में डालने के पहले सफाई का खास ध्यान देना आवश्यक है जिससे संक्रमण का भय नहीं रहता है।
  • इस विधि से कभी-कभी जेर पूरी नहीं निकल पाती और जेर का कुछ भाग गर्भाशय में ही रह जाता है जिससे पुन: गर्भाशय के संक्रमण का खतरा बन जाता है, जेर निकालते समय अधिक बल का प्रयोग करने से खून निकलता है और हानिकारक जीवाणुओं के विकास में मदद करता है।
  • (ख) इकबोलिक पदार्थ का प्रयोग, इसके प्रयोग से जेर के निकलने में तथा गर्भाशय के भीतर की गंदगी को निकलने में मदद मिलती है, इकबोलिक पदार्थ के उदाहरण ओक्सिटोसिंन, प्रोस्टाग्लैंडीन इत्यादि हैं।
  • (ग) गर्भाशय के भीतरी सतह में सूजन या गर्भाशय के सूजन का योग्य पशुचिकित्सक द्वारा उपचार कराना चाहिए। 
  • (घ) कभी-कभी जेर के रुकने की समस्या बिना किसी उपचार के स्वत: ही ठीक हो जाती है और जेर गल कर अवशोषित हो जाती है। 
  • दुधारू मादा पशुओं को जेर रुकने की बीमारी से सही प्रबंधन, उचित चारे, पोषक तत्वों की पूरकता तथा सही समय पर उपचार द्वारा बचाया जा सकता है जिससे पशुपालक को हानि नहीं होगी और दुग्ध उत्पादन पर्याप्त मात्रा  में होगा और पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा। 

जेर रुकने के प्रमुख कारण

  • जेर रुकने का कारण मुख्यत: जेर का गर्भाशय की भित्ति से पूरी तरह अलग ना हो पाना है।
  • गर्भाशय में निम्न जीवाणुओं के संक्रमण जैसे ब्रूसेला एवोस्टर, ट्यबेरकुलोसिस, विब्रियो फीटस इत्यादि बच्चे का समय से पहले जन्म और जेर के रुकने की समस्या को बढ़ावा देते हैं।
  • चारे में विटामिन-ए अथवा कैरोटिन व आयोडीन नामक तत्व की कमी से गर्भाशय में संक्रमण तथा जेर रुकने की समस्या बढ़ती है।
  • जिन पशुओं में गर्भधारण के पांच महीने पश्चात तथा गर्भकाल से एक-दो सप्ताह पहले गर्भपात हो जाता है उनमे जेर के रुकने की समस्या आम होती है।
  • गर्भकाल के समय पशु के रक्त में प्रोजेस्ट्रोन नामक हारमोन की कमी से बच्चे का जन्म समय से पहले हो जाता है जो कि जेर रुकने की समस्या को बढ़ता है।
  • गर्भाशय को हानि पहुंचाने वाली बीमारियाँ जैसे कि गर्भाशय में पानी का भरना, गर्भाशय का घूम जाना, जुड़वां बच्चे का होना, बच्चे पैदा होने में दिक्कत इत्यादि जेर रुकने की समस्या के कारण होते हैं।
  • डॉ. दिवाकर वर्मा
  • ब्रजेश कुमार नामदेव 
  • पंकज शर्मा 
  • email : brajesh.jnkvv@gmail.com
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