क्या अल्प वर्षा से बढ़ेगा चने का रकबा ?

Share On :

क्या-अल्प-वर्षा-से-बढ़ेगा-चने-का-रकबा-?-

इंदौर।  इन दिनों मध्य प्रदेश में रबी फसलों की बुआई का दौर शुरू हो गया है। लेकिन अभी रफ्तार नहीं पकड़ी है। खास बात यह है कि इस बार रबी के तहत गेहूं के बजाय चने की तरफ किसानों का रुझान ज्यादा बढ़ रहा है। इसका मुख्य कारण चने की फसल में पानी का कम उपयोग होना है। इस वर्ष अल्प वर्षा के कारण प्रदेश के कई क्षेत्रों में अभी से भू-जल स्तर गिरने से  गेहूं की फसल के लिए सिंचाई के आसन्न खतरे को देखते हुए किसानों ने चने का रकबा बढ़ाने की ओर रुख किया है।

इस वर्ष चने का रकबा बढऩे का एक कारण चने के समर्थन मूल्य में 220 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि होना भी है। केंद्र सरकार ने इस वर्ष चने का समर्थन मूल्य 4620 /- प्रति क्विंटल घोषित किया है। भू-जल स्तर गिरने से आगामी जल संकट और चने के समर्थन मूल्य में हुई वृद्धि से ही किसान बड़ी मात्रा में चने की बोवनी कर रहे हैं। 

इस हफ्ते किसान दीवाली के त्यौहार में व्यस्त रहेंगे। इसके बाद रबी की बोनी के प्रतिशत में तेजी आएगी। इस वर्ष प्रदेश में रबी फसल में गेहूं का लक्ष्य 65.40  लाख हेक्टर और चने का लक्ष्य 36.50 लाख हेक्टर तय किया गया है।

 इस साल खरीफ में कपास का अच्छा उत्पादन होने और भाव भी बढिय़ा मिलने से किसान खुश हैं, लेकिन रबी की बोवनी से पहले यूरिया/ डीएपी  खाद की किल्लत और कालाबाजारी से परेशान हैं। कृषक जगत द्वारा  इंदौर -उज्जैन संभाग के कतिपय किसानों से हुई चर्चा में  समस्या का यह पहलू सामने आया।  बड़ा मालसा (देवास) के श्री रामनिवास कुमावत गेहूं -चने की बोनी के बाद यूरिया खाद कभी मिलने न मिलने से परेशान हैं, वहीं बिसलखेड़ा (रतलाम) के श्री रामलाल मालवीय के यहां गेहूं की बोनी चल रही हैं। पहले बोए गए चने में फूल आ रहे हैं। सुवासा (उज्जैन)के श्री विष्णु पाटीदार ने यूरिया खाद काले बाजार में 350 से अधिक कीमत पर मिलने और अभी से ट्यूबवेल का भू-जल स्तर गिरने के प्रति चिंता प्रकट की। डीएपी खाद की कालाबाजारी होने की बात बिराली ( खरगोन ) के संतोष आनंदराम ने भी दोहराते हुए कहा कि 1200 का खाद 1400 रुपए में बेचा जा रहा है। जबकि रामगढ़ (झाबुआ ) के श्री नानूराम मेड़ा  गेहूं की किस्म 8737 लेने के लिए पेटलावद के कृषि विभाग के तीन दिन से चक्कर काट रहा है। 

नानूराम की चिंता यह है कि उसके इलाके में नहर का पानी छोड़ दिया गया है, यदि अभी बोनी नहीं हुई तो फिर नहर का पानी 15 दिन बाद मिलेगा जिससे फसल पिछड़ जाएगी। अभी से भू जल स्तर गिरने से गेहूं की सिंचाई में आ रही समस्या  को देखते हुए इस साल चने के रकबे में वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।

Share On :

Follow us on

Subscribe Here

For More Articles

Releated Articles