बकरियों का पौष्टिक आहार

करी एक रोमंथी पशु हैं। उसके खानपान की आदतें अन्य पश्ुाओं से भिन्न होती हैं। वह खोजी स्वभाव की होती हंै अत: जंगल में चराई हेतु भेजने पर दौड़ती रहती हैं। उसे घांस के मुकाबले पेड़ तथा खंखाड की पत्तियां खाना ज्यादा पसंद होता है। चराई के दौरान वह एक वनस्पति के पास जाकर कुछ पत्तियां खींचकर मुंह में भर लेती हैं लेकिन कुछ ही समय पश्चात दूसरे वनस्पति की और दौड़ पड़ती हैं और वहांं जाकर उस पर कुछ देर मुंह मारती हैं। वह बहुत ही चंचल स्वभाव की होती हैं। अगर उसे कुछ दूरी पर किसी अन्य वनस्पति पर चंद अन्य बकरियां चरती हुई नजर आये तो वह भी उस वनस्पति की और दौड़ पड़ती है तथा जल्दबाजी में उस पर चराई शुरु कर देती हैं। फिर कुछ ही मिनटों या यहां तक की पलों में उसका उस वनस्पति से दिल भर गया तो अन्य वनस्पति की ओर दौड़ पड़ती हैं।

जिद्दी स्वभाव

जो वनस्पति उसे पसंद आ जाती है उसे वह कुछ ज्यादा देर तक खाती है। लेकिन इसका भी कोई भरोसा नहीं । वह जिद्दी स्वभाव धारी पशु हैं। अत: उसका दिल करें तो वह एक विशिष्ट वनस्पति पर चराई करेगी तथा जिस पल उसका दिल उस वनस्पति से भर जाये तब दूसरी वनस्पति की ओर चल देती है।

झुंड में रहना

बकरियां अक्सर झुंड में रहना तथा झुंड में रहकर साथ-साथ चरना पसंद करती हैं। उन्हे अकेले रहना कतई पसंद नहीं होता। अगर किसी ने ऐसी कोशिश की तो वह मायूस होकर, सहमकर या तो खड़ी रहती हैं या जमीन पर बैठ भी सकती हंै तथा चराई बंद कर देती है। कई बार वह भूखी होते हुए भी चराई नहीं करती है। उसे खेत में वनस्पतियों से भरे मैदान में अकेले बांधकर रखें भी तो वह ऐसा ही बर्ताव दर्शाती हैं। उन्हें झुंड से अलग करने पर वह बेचैन हो जाती है तथा उनके गले में रस्सी बांधकर उन्हे अन्य जगह ले जाने का प्रयास करें तो वे डर जाती हैं तथा सहमकर बैठ जाती है। कई बार इधर-उधर भागने की कोशिश करती हैं तथा नाकामयाब होने पर मायूस होकर एक जगह हताश होकर बैठ जाती है।

मर्जी की मालिक

ऐसी स्थिति में उन्हें कोई कुछ खिलाना भी चाहे तो वह उसे नहीं खाती। यहां तक कि उनकी मनपसंद पत्तियां भी खाने हेतु पेश की जाये तो भी वह उसे नहीं खाती। उन्हें जबरदस्ती चारा नहीं खिलाया जा सकता । वे अपनी मर्जी की मालिक होती है। उनके सामने किसी बर्तन में खाने योग्य पत्तियां डालने पर भी वह उसे नहीं छूती। अगर कोई पत्तियां या चारा जमीन पर गिर जाये तो वह उसे नहीं छूती। उसे गीला, मटमैला, कीचड़ भरा चारा कतई पसंद नहीं होता। उन्हे वही-वही चारा पसंद नहीं होता। 

उन्हे खाने में हमेशा बदलाव पसंद है। एक बार उन्होने कोई विशिष्ट चारा ग्रहण किया तो अगली बार यह जरुरी नहीं कि वह चारा दुबारा खाएगी। यहां तक कि एक बकरी को जो चारा पसंद आये वह दूसरी बकरी को पसंद आ जायेगा। हर एक की पसंद अलग-अलग होती है।

जोधपुर में शोध

केंद्रीय मरु अनुसंधान संस्थान जोधपुर के तहत कार्यरत क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र, पाली मारवाड़ राजस्थान मे किए गए अध्ययन में ज्ञात हुआ कि गर्मियों में जब चरागाह में कोई चारा या घांस उपलब्ध नहीं होता तब जो भी चारा मिले उसे मारवाड़ी नस्ल की बकरियां खा लेती हैं। यहां तक की भूखी होने पर बाड़ में लगी बेर की सूखी कंटीली टहनियां भी खा जाती है । जनवरी तथा फरवरी माह में जब चारागाह में काफी हरी वनस्पतियां मौजूद होती हैं। तब उनके खानपान-व्यवहार का गहन अध्ययन करते हुए ज्ञात हुआ कि  मारवाड़ी बकरियों ने सबसे ज्यादा यानि बेरी के खंखाड़ों पर 55.79 प्रतिशत समय बिताया और उसकी पत्तियां खाई। इसके बाद उनकी दूसरी पसंद खेजड़ी की पत्तियां थीं जिस पर उन्होंने 24.30  प्रतिशत समय बिताया। इसके बाद उनकी तीसरी पसंद जिजनी नामक कंटीली फलीधारी वनस्पति थी जिस पर उन्होंने 5.69 प्रतिशत समय बिताया। इसके बाद उन्होंने रोहिडा वनस्पति पर 4.59 प्रतिशत, कैर वनस्पति पर, 4.50 प्रतिशत तथा देशी बबूल की पत्तियों पर 1.99 प्रतिशत समय बिताया।

बकरी एक रोमंथी पशु है। उसके खानपान की आदतें अन्य पशुओं से भिन्न होती हैं। वह खोजी स्वभाव की होती है अत: जंगल में चराई हेतु भेजने पर दौड़ती रहती है। उसे घांस के मुकाबले पेड़ तथा खंखाड़ की पत्तियां खाना ज्यादा पसंद होता है। 

बकरियों की कुछ शारीरिक विशेषताएं होती हैं। वे छरहरी पतली, तथा हल्के शरीरधारी होती हैं। वे तेज दौड़ सकती है तथा पिछले दो पैरों पर खड़ी होकर ऊंचाई पर स्थित वनस्पति की चराई कर सकती है।

उनके ऊपरी होंठ में एक दरार होती है तथा जीभ लंबी होती है जिनकी मदद से वह छोटे से छोटा पत्ता भी पकड़कर आसानी से खा सकती है। वह हमेशा जल्दबाजी में चरती है तथा कुछ देर पश्चात पेट भरने पर किसी पेड़ की छाया में आराम से बैठकर जुगाली करती है। बकरियों के खानपान व्यवहार पर कुछ अनुसंधान हुआ है जिनके शोध परिणामों पर आधारित जानकारी अनुसार उन्हें कुछ वनस्पतियां जैसे बेर, खेजड़ी, जिजनी, रोहिड़ा, देशी बबूल, जंगल जलेबी, आडू, पीपल, करंज गिरीपुष्प, सावरी, अशोक, इमली, चिंचबिलाई आदि वनस्पतियों की पत्तियां खाना पसंद करती है। इसके अलावा उन्हे बेर के फल (बेरियां), बबूल की फलियां, खेजड़ी की फलियां, कैर के फल, रोहिड़ा के फूल आदि खाना पसंद हैं। इसके अलावा उन्हे स्वादिष्ट, रसीली, हरीभरी घांस जैसे बरसीम, लूसर्न, चौलाई तथा स्वादिष्ट अनाज खाना पसंद होता हैं। अत: उन्हें उपरोक्त लिखित वनस्पतियों की पत्तियां, फूल, फल तथा घासफूस जो भी पसंद हैं वह खिलाये जायें तो उनका चाराग्रहण तथा शुष्क पदार्थो का ग्रहण ज्यादा होगा। 

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