उर्वरक बाजार में बढ़ी सरगर्मी

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यूरिया की व्यवस्था चरमराई

भोपाल। प्रदेश में ठंड के साथ-साथ रबी फसलों की बोनी भी गति पकड़ रही है इसी के साथ प्रदेश का किसान एक बार फिर उर्वरक विशेष रूप से यूरिया संकट से दो-चार होने की स्थिति में है। हालांकि उर्वरक उपलब्धता में बहुत अधिक अंतर नहीं है। परंतु बढ़ती मांग के अनुरूप सोसायटियों व उर्वरक विक्रेताओं के पास स्टॉक की कमी कतिपय स्थानों पर संकट की स्थिति पैदा कर रही है। चुनाव कार्य में व्यस्त प्रशासन ने यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया तो स्थिति बिगड़ सकती है। 

किसान फिर परेशान

उर्वरक बजार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि बोनी का समय आने पर यूरिया की मांग में वृद्धि तो होती है साथ ही मंडियों में भारी मात्रा में उपज बिक्री के लिए आने वाले किसान भी एक साथ सोसायटियों में उर्वरक के लिए पहुंच जाते हैं। फलस्वरूप सीमित संसाधन वाली सोसायटी में उपलब्ध सीमित उर्वरक स्टॉक से मांग की पूर्ति का संकट पैदा हो जाता है। फॉस्फेटिक उर्वरक में मूल्यों की अस्थिरता के चलते इस वर्ष उर्वरक व्यपारी भी बहुत अधिक स्टॉक नहीं रख रहे हैं। इस कारण भी बाजार में उर्वरक की कमी महसूस की जा रही है । हालांकि यह चुनाव वर्ष है और संभावना है कि चुनाव उपरांत प्रशासन इस ओर विशेष ध्यान देगा। नई सरकार भी नहीं चाहेगी कि उसके आते ही किसान परेशान हो। उर्वरक उद्योग के सूत्र कहते हैं कि मुख्य समस्या उर्वरक स्टोरेज के सीमित साधन है इसके लिए शासन को सुदूर क्षेत्रों में उर्वरक भंडारण की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ समर्थन मूल्य पर खरीदी की पंजीयन व्यवस्था की तरह सोसायटी से उर्वरक वितरण के लिए भी पंजीकरण एवं वितरण की तिथिवार व्यवस्था करना चाहिए इससे सोसायटियों पर आने वाले किसान को उर्वरक उपलब्धता की सुनिश्चितता होगी और प्रशासन का लॉ एण्ड ऑर्डर भी बना रहेगा। 

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