चुनावी गर्मी ने नकली खाद मामले को किया ठंडा

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एक व्यापारी प्रशासन पर भारी

इंदौर। बढ़ती ठंड में चुनावी सरगर्मी से बेहाल उज्जैन जिला प्रशासन ने नागदा का नकली खाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया प्रतीत हो रहा है। उल्लेखनीय होगा कि गत अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह में नागदा में उर्वरक विके्रता फर्म कन्हैयालाल शंंभूलाल पोरवाल के यहां कृषि  विभाग ने कार्यवाही करते हुए खेतान एवं हिंडाल्को कम्पनियों की नकली खाद की बोरियां प्राप्त की थीं। विभागीय अधिकारियों ने जांच के बाद मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिये स्थानीय पुलिस अधिकारी को पत्र भी लिखा था। इस मामले में ये दोनों ही कम्पनियां शिकायतकर्ता थीं। लेकिन पुलिस प्रशासन धोखाधड़ी व चार सौ बीसी के स्पष्ट सबूतों के बावजूद आरोपी व्यपारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी कर रहा है।

स्थानीय पुलिस प्रशासन का कहना है कि उर्वरक के नमूनों की जांच के रिपोर्ट आने के बाद ही कार्यवाही की जायेगी। जबकि, जिन कम्पनियों के उर्वरक व बोरियां जप्त की गई हैं, वे स्वयं ही बयान दे रहे हैं कि प्राप्त की गई सामग्री नकली है। पुलिस का यह ढुलमुल रवैया तथा आरोपी व्यापारी के प्रति नरमी न सिर्फ पुलिस बल्कि पूरे प्रशासन को संदेह के घेरे में खड़ा कर रहा है। 

इस नकली खाद प्रकरण में मंद गति से चल रही प्रक्रिया के कारण यह भी पता नहीं चल पाया कि आरोपी व्यापारी ने कार्यवाही होने तक कितना नकली खाद बाजार में बेच दिया था। इस मामले में जिला प्रशासल के साथ-साथ कृषि विभाग के शासन व प्रशासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की चुप्पी भी लंबे गोरखधंधे की ओर इशारा कर रही है। जबकि एक समय में इन्ही वरिष्ठ अधिकारियों ने नकली व अमानक खाद के विरुद्ध अभियान चलाकर उर्वरक व्यवसायियों में हड़कंप मचा दिया था। इस अभियान में कई स्थानों पर गेहूं के साथ घुन भी पिसा था। 

इस सारे मामले मेंं चुनावी माहौल में आचार संहिता, चुनावी ड्यूटी, चुनावी व्यस्तता के बहानों से प्रशासन अपना पल्ला झाड़ता रहता रहेगा, आरोपी व्यापारी इस मौके का फायदा उठाते हुए येन केन प्रकारेण अपने खिलाफ सबूतों को भी कमजोर कर देगा और प्रदेश का किसान एक बार फिर ठगा जायेगा। 

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