पौधों के लिए सूक्ष्म जीवाणुयुक्त टीका है जैव उर्वरक

(मुरली अय्यर, एमएससी कृषि), मो. : 9406802826

जैविक खाद

कार्बनिक (जैविक) खाद से सभी परिचित हैं। प्राय: दुधारू पशुओं द्वारा छोड़े गए चारे, फसलों के अवशेष आदि के सडऩे के बाद प्राप्त पदार्थ को विभिन्न विधियों द्वारा जिस खाद को तैयार किया जाता है, उसे कार्बनिक खाद कहते हैं। यह खाद पौधों को सभी पोषक तत्व उपलब्ध कराता है। कृषि का आधार जीवांश है इसलिए कचरा, गोबर आदि को कार्बनिक खाद में तब्दील कर खेत में डालने से पैदावार बढ़ती है।

जैविक खाद के फायदे 

जैविक खाद को खेत में डालने से दीमक का प्रकोप नहीं होता, जबकि रासायनिक खाद यूरिया में मिठास होने से दीमक का प्रकोप हो जाता है। जैविक खाद से खरपतवारों की भी वृद्धि नहीं होती है। जैविक खाद से भूमि में जीवांश बढऩे के साथ ही उसकी जल धारण क्षमता, हवा और पानी का संचार भी बढ़ जाता है। इसके विपरीत रासायनिक खादों के उपयोग से जल प्रदूषण बढऩे से मिट्टी का पीएच मान क्षारीय हो जाने से लवण के ऊपर आने की क्षमता बढ़ जाती है। जबकि जैविक खाद में यह शंकाएं कम हो जाती है। मृदा में जैव उर्वरक देने से जीवित और लाभकारी सूक्ष्मजीवों के प्रवेश से फसलोत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। इसलिए कहा जा सकता है कि जैव उर्वरक पौधों के  लिए सूक्ष्म जीवाणुयुक्त ऐसा टीका है जो मृदा में वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है और फास्फेट का विलय करके पौधों को उपलब्ध कराता है।

जैविक खादों के प्रकार 

जीवाणुयुक्त ऐसे ही कुछ जैविक खादों  से रूबरू कराते हैं। राइजोमियम दलहनी फसलों के लिए सहजीवी सूक्ष्म जीव है, जो पौधों की जड़ों की ग्रंथियों की मदद से वायुमंडलीय नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है। जबकि एजेटोबेक्टर ऐसा जीवाणु है, जो मृदा या जड़ की सतह पर स्वतंत्र रहकर वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मृदा में हार्मोन, विटामिन और फफूंदनाशक पदार्थ स्त्रवित करता है। एजेटोबेक्टर की सक्रियता से पौधों के अंकुरण में 35  से 50  प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। वहीं फास्फेट साल्यूबलाइजर ऐसा ही जैविक खाद है। जबकि बेसिल्स नाइगरियम जीवाणु फास्फोरस को विलय कर पौधों की जड़ों को भी गुच्छेदार बनाता है। इससे नाइट्रोजन का स्थिरीकरण होकर पौधों में 15  से 35 प्रतिशत की वृद्धि होती है। वहीं एसीटोबैक्टर अम्लीय भूमि में अच्छी तरह काम करता है। यह गन्ने की फसल के लिए लाभकारी है जो शक्कर की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाता है।

इसी तरह ब्लू ग्रीन एल्गी जैविक जीवाणु खाद धान में उपयोग किया जाता है। जो वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर पैदावार में 15  से 20  प्रतिशत की वृद्धि करता है। जबकि असंख्य बॉयोमॉस बनाने वाला एजोला मिट्टी की शुद्ध संरचना करने में अहम भूमिका निभाता है। यह सूक्ष्म तत्वों जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, फास्फोरस और पोटाश भी उपलब्ध कराता है। इसे धान लगाने से एक माह पहले खेत में बिखेरना चाहिए। ऐसे ही माइकोराइजा सूक्ष्मजीवी  पौधों की जड़ों में फास्फोरस को अवशोषित कराकर महत्वपूर्ण विटामिन और हार्मोन भी जारी करता है। वहीं थायो यूरिया में नाइट्रोजन 35  और गंधक 42 प्रतिशत होता है। इससे बीज उपचारित कर बुआई करने से पौधों में मौजूद प्रोटीन अधिक क्रियाशील होने से उनकी प्रारम्भिक बढ़वार अच्छी होने लगती है। इस प्रकार इन सूक्ष्म जीवाणुयुक्त जैविक उर्वरक के उपयोग से किसान अपनी फसलों को पोषक बनाकर अच्छी पैदावार ले सकते हैं।

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