मक्का खली की मांग बढ़ी

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नई दिल्ली। दुधारू पशुओं को मक्का खली से होने वाले फायदे के कारण निर्यात मांग बढऩे के अलावा अब गुजरात के बाद राजस्थान, उत्तरी भारत के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी इसकी मांग लगातार बढ़   रही है। 

उद्योग के अनुसार भारत के मक्का खली की मांग विशेषकर कतर, सऊदी अरब और ईरान से आ रही है। राजस्थान के अलवर स्थित मक्का तेल उत्पादक और निर्यातक पवन गुप्ता ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 में देश से लगभग 225 टन मक्का खली का निर्यात हुआ था जो वित्त वर्ष 2017-18 में बढ़कर लगभग 500 टन हो गया। इसकी वजह हमारे मक्का खली की बेहतर गुणवत्ता है।  
उन्होंने बताया कि 2,800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से  इसका निर्यात होता है जिसमें सरकार की ओर से पांच प्रतिशत की निर्यात सहायता भी दी जाती है और इसके निर्यात पर वस्तु एवं सेवा (जीएसटी) नहीं लगता। उन्होंने कहा कि मक्के की खली विशेषकर दुधारू मवेशियों के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है और इसके उपयोग के कारण गुजरात जैसे राज्य को दुग्ध उत्पादन में अग्रणी राज्य बनने में मदद मिली है। उन्होंने बताया कि बिनौला खली, सरसों खली इत्यादि में पांच से छह प्रतिशत तेल की मात्रा होने के मुकाबले मक्का खली में सर्वाधिक यानी 10 से 12 प्रतिशत तेल की मात्रा होती है इसके अलावा इसमें काफी पोषक तत्व मौजूद होते हैं।

जयपुर के तेल व्यापारी राकेश अरोड़ा ने कहा कि गुजरात की तरह ही राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अन्य राज्यों में भी मवेशियों के चारे में बिनौला, सरसों तिल्ली, मूंगफली के अलावा मक्का खली भिगोकर खिलाना दूध उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में मवेशियों के चारे में बाकी खली के अलावा 15 से 20 प्रतिशत मक्का खली का इस्तेमाल किया जाने लगा है। 

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