रिलायंस फाउण्डेशन की किसानों को सलाह

  • चना फसल में उगरा/उकठा या शुष्क जड़ सडऩ की शिकायत होने पर ग्रसित पौधों को खेत से निकाल कर नष्ट कर दें, तथा सिंचाई के समय खेत में ट्राइकोडर्मा विरिडी1किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से गोबर खाद में मिलाकर भुरकाव करें।
  • चने की फसल का निरीक्षण करें, चने में इल्ली की संख्या दो या दो से अधिक इल्ली प्रति मीटर कतार में पाए जाने पर इसके नियंत्रण हेतु क्विनालफॉस 25 ई.सी. दवा की 2 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
  • गेहूं में चौड़ी एवं सकरी पत्ती खरपतवार नियंत्रण हेतु क्लोडिनोफॉप एवं मेट्सल्फ्युरान नींदानाशी की 160 ग्राम/ एकड़ मात्रा बुवाई के 25-30 के अंदर 150 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। 
  • सरसों में आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई करें। इस समय सरसों में 2-3 पत्तियां निकल आई हैं। आने वाले दिनों में फसलों में खरपतवार नियंत्रण करें। 
  • कीटनाशक, नींदानाशक या फफूंदनाशक रसायनों का उपयोग बहुत आवश्यक होने पर ही उपयोग करें। क्योंकि ये रसायन हम स्तनधारी या अन्य जीवों के लिये भी खतरनाक होता है। 
  • गेहूं, चने की फसल में चूहे के नियंत्रण के लिए आवश्यतानुसार एल्यूमीनियम फास्फेट की 1 या 2 टिकिया प्रति बिल की दर से उपयोग कर, बिल को गीली मिट्टी से बंद कर दें।

उद्यानिकी:

  • फूलगोभी, पत्तागोभी, टमाटर, भिंडी में इल्ली का प्रकोप होने पर क्लोरोपायरीफॉस या क्विीनालफॉस 2 मिली/लिटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करे।

पशुपालन: 

  • पशुओं को कृमिनाशक दवा पिलायें, विशेषतौर से नवजात बछड़ों को अवश्य पिलायेें। जिससे उनकी अंतडिय़ों में कृमि नहीं रहेंगे और वे स्वस्थ रहेंगे। 

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  • गूगल प्ले स्टोर से जियो चैट एप का चयन करें और इंस्टॉल बटन दबाएं। 
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  • या आप नीचे के QR Code को स्कैन कर, सीधे Information Services MP चैनल का चयन कर सकते हैं। 

टोल फ्री नं.18004198800 पर 
संपर्क करें सुबह 9.30 से शाम 7.30 बजे तक

 

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