लहसुन प्रोसेसिंग - भंडारण करके लें अधिक लाभ

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इंदौर। लहसुन फसल की प्रोसेसिंग उचित तरीके से की जाए तो इसकी गुणवत्ता को बढ़ाया जा सकता है, वहीं उचित भंडारण की व्यवस्था की जाए तो किसान अधिक लाभ कमा सकते हैं। रतलाम के ग्राम तीतरी के किसान श्री बाबूलाल पाटीदार कहते हैं कि लहसुन फसल से अच्छी आय मिल जाती है। मैंने अपने लगभग 1.5 बीघा क्षेत्र में अमलेटा किस्म की लहसुन फसल लगाई है। इससे 14-15 क्विंटल प्रति बीघा की दर से उत्पादन मिला है। लहसुन की खेती में आने वाली प्रमुख समस्याओं का जिक्र करते हुए बाबूलाल बताते हैं कि इसमें हरा-पीला माहू, थ्रिप्स आदि की समस्या आती है। इनसे निजात पाने बाबूलाल 10 से 15 दिन की प्रारंभिक अवस्था में मोनोएसिफेट और मेंकोजेब का छिड़काव करते हैं। रोगों के प्रश्न पर वे कहते हैं, लहसुन पर यलो मोजेक या पत्ती मोडक रोग का अक्सर आक्रमण होता है। प्रभावित लहसुन की पत्तियां जलेबीनुमा हो जाती हैं। पिछले मौसम में इससे काफी हानि हुई थी। प्रभावित फसल को बाजार में आढ़तिए आसानी से पहचान लेते हैं और इसका वाजिब दाम नहीं मिल पाता है। लहसुन निकालने के बाद छायादार स्थान में एक सप्ताह तक सुखाया जाता है। डिहाइड्रेशन के साथ-साथ लहसुन की क्षमता बढ़ती है। कटिंग के पश्चात ये विक्रय के लिए तैयार की जाती है।

बनती है जैविक खाद : श्री बाबूलाल पाटीदार बताते हैं, लहसुन फसल की पत्तियों से अच्छी जैविक खाद तैयार की जा सकती है। इस प्रकार दोहरा लाभ लिया जा सकता है। हमने नाडेप विधि से खाद बनाने के लिए गड्ढे बनाए हैं। इसमें गोबर और अन्य कचरा मिलाकर अच्छा खाद तैयार किया जाता है। एक बीघा से निकली पत्तियों से तीन बीघा के लिए उपयोगी खाद तैयार हो जाती है।

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