संरक्षित खेती में ही कृषि का भविष्य - डॉ. श्रीवास्तव

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खण्डवा। आज उद्यानिकी की नवीनतम प्रौद्योगिकी को अपना कर ही प्रगति की जा सकती हैं। संरक्षित खेती में भविष्य छिपा है।

बी.एम. कृषि महाविद्यालय खण्डवा में कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिकों की उच्च उद्यानिकी विषय में क्षमता संवर्धन हेतु दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर उक्त बात मुख्य अतिथि राविसिं कृषि विवि के निदेशक विस्तार सेवाएं डॉ. एस.के. श्रीवास्तव ने कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिष्ठाता डॉ. मृदुला बिल्लौरे ने की। कार्यक्रम में 24 कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया। डॉ. बिल्लौरे ने वैज्ञानिकों का आव्हान किया कि वे सतत सीखने की प्रक्रिया अपनाएं। तकनीकी सत्र में केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान भोपाल के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. के.वी.आर. राव, जवाहरलाल नेहरू कृषि विवि जबलपुर के विभागाध्यक्ष डॉ. ए.के. नायडू, सिंथेटिक एण्ड आर्ट सिल्क मिल्स रिसर्च एसो. (ससमीरा) के वैज्ञानिक प्रमोद सालुंखे एवं जैन इरीगेशन के श्री मुरली अय्यर ने उच्च उद्यानिकी तकनीक के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. एम.के. गुप्ता एवं आभार डॉ. डी.के. वाणी ने किया।

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