सफेद लट का करें नियंत्रण

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सफेद लट से प्रभावित फसल : इसकी साल भर में एक पिढ़ी पाई जाती है। इसकी मादा गीली मिट्टी में 10 से.मी. की गहराई में 10-12 सफेद रंग के अण्डे देती है, तथा यह अवस्था 7 से 13 दिन की होती है। इसके पश्चात अण्डों से लट निकलती हैं, लट की तीन अवस्थाएं होती हैं जिनकी कुल अवस्था 12-16 सप्ताह की होती है। लट की प्रथम अवस्था 2-3 सप्ताह, द्वितीय अवस्था 4-5 सप्ताह व तृतीय अवस्था 6-8 सप्ताह की होती है। द्वितीय व तृतीय अवस्था पौधे की बड़ी जड़ों को काटती हैं। लट की तृतीय अवस्था कृमि कोष अवस्था में बदलती है जिसका रंग क्रीमी सफेद होता है, अब कृमिकोष प्रौढ़ अवस्था में बदलता है जिसका रेग ताँबे जैसा चमकदार होता है।
इस विनाशकारी कीट के प्रकोप से खरीफ की फसलों की सुरक्षा दो ही परिस्थितियों में की जा सकती है, पहली जब यह कीट वयस्क अवस्था में हो और दूसरी जब संूडी की प्रथम अवस्था हो।
लट अवस्था में नियंत्रण:
खरीफ की विभिन्न सिंचित व असिंचित फसलों व बुवाई के समयानुसार लट नियंत्रण के उपाय अलग-अलग होते हैं।
वर्षा के साथ बोई जाने वाली फसलों में लट नियंत्रण:
बीज उपचार: मूंगफली की फसल में सफेद लट की रोकथाम हेतु क्लोथिऐनिडिन डब्ल्यू.डी.जी. 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज (गुली) को बीजोपचार करें (उपचारित बीज को 2 घण्टे छाया में सुखाकर बुवाई करना चाहिए) या 80 किलो बीज में 2 लीटर क्विनालफॉस 25 ई.सी. या इमिडाक्लोप्रिड 200 एस.एल. 240 मिली लीटर रसायन मिलाकर बुवाई करें। बाजरे के एक किलो बीज में 3 किलोग्राम कार्बोफ्यूरान 3 प्रतिशत या क्विनालफॉस 5 प्रतिशत कण मिलाकर बुवाई करें।
अग्रिम बोई गई फसल में उपचार: सफेद लट नियंत्रण हेतु 4 लीटर क्लोरोपाइरीफॉस 20 प्रतिशत ई.सी. या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस.एल., 300 मि.ली. प्रति हेक्टर 100 किलो बजरी में मिलाकर फसल में भुरकाव कर पानी पिलायें। यह उपचार मानसून की वर्षा के 21 दिन बाद भृंगों की संख्या के आधार पर करें।

प्रौढ़ कीट (भृंग) का नियंत्रण:
  • सफेद लट के परपोषी वृक्षों का चुनाव आस-पास के वृक्षों के समुह में से करें -जैसे -नीम, बेर, खेजड़ी, अमरूद एवं गुलर इत्यादि।
  • जहाँ भृंगों को परपोषी वृक्षों से रात में पकडऩे की सुविधा हो उन जगहों पर भृंग एकत्रित कर 5 प्रतिशत केरोसिन मिले पानी में डालकर नष्ट करें।
  • परपोषी वृक्षों में चिन्हित वृक्षों पर फेरोमोन (मीथोक्सी बेन्जीन) शाम के समय लगायें। भृंग 15-20 मीटर की दूरी से फेरोमोन की तरफ आकर्षित होते हैं। अत: प्रति हेक्टर 3-4 परपोषी वृक्षों पर ही फेरोमोन लगायें व उन्हीं पर कीटनाशी रसायनों का छिड़काव करें।
  • मानसून की शुरूआत के साथ ही भृंग खेतों के आस-पास खड़े खेजड़ी, बेर, नीम, अमरूद एवं आम आदि पेड़ों पर इक्कठे होते हैं। इसलिये इन पेड़ों पर मानसून की शुरूआत होते ही दिन के समय क्विनालफॉस 25 प्रतिशत ई.सी. 36 मिली. या कार्बोरिल 50 प्रतिशत घुलनशील चूर्ण 72 ग्राम एक पीपे (18 लीटर) पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
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