नाबार्ड सर्वे – अभी भी 52 फीसदी किसान कर्ज में डूबे

मुम्बई। देश के किसान 1,07,172 रु. की औसत सालाना आय के साथ ‘लखपति’ बन गए हैं। लेकिन इनमें से अभी भी 52.5 प्रतिशत ऐसे हैं जो कर्ज में दबे हैं। यह जानकारी नाबार्ड ऑल इंडिया फाइनेंशियल इन्क्लूजन सर्वे (एनएएफआईएस) में सामने आई है। इसके मुताबिक सर्वेक्षण के दिन तक बकाया कर्ज के मामले 52.5 प्रतिशत कृषक परिवारों और गैर-कृषि गतिविधियों से जुड़े 42.8 प्रतिशत परिवारों पर कर्ज है। जबकि अखिल भारतीय स्तर पर 47.4 ग्रामीण परिवारों पर कर्ज है। नाबार्ड नेशनल बैंक है जो किसानों और ग्रामीण विकास के लिए कर्ज देता है।

सर्वे के मुताबिक 88.1 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों और 55 प्रतिशत कृषक परिवारों के पास एक बैंक खाता है। इनकी प्रति परिवार औसत सालाना बचत 17,488 रुपए है। कृषि से जुड़े करीब 26 प्रतिशत परिवार और गैर-कृषि क्षेत्र के 25 प्रतिशत परिवार बीमा के दायरे में हैं। इसी तरह 20.1 प्रतिशत कृषक परिवारों ने पेंशन योजना ली है। जबकि इसके मुकाबले 18.9 प्रतिशत गैर कृषक परिवारों के पास पेंशन योजना है। नाबार्ड के चेयरमैन श्री एच.के. भनवाला ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह सर्वे फाइनेंशियल इन्क्लूजन और ग्रामीण आजीविका जैसे पहलुओं को एक साथ लाने का एक अग्रणी प्रयास है। नाबार्ड हर तीन साल में सर्वे करता है।

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