किसानों को 50 हजार रु. तक नगद भुगतान मिलेगा

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(विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अमेरिका जाने से पूर्व भावांतर भुगतान योजना में किसानों को बिक्री एवं भुगतान में कोई परेशानी न हो, इसलिए वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कलेक्टरों व कमिश्नरों को 50 हजार रुपए तक नगद भुगतान करने की व्यवस्था के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि 50 हजार रुपए नगद प्राप्त करने में किसान को कोई आयकर कानून में बाधा उत्पन्न नहीं होगी।
इसके पूर्व म.प्र. में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए महत्वाकांक्षी भावांतर भुगतान योजना शुरू की गई है। गत 16 अक्टूबर को प्रदेश भर में योजना का शुभारंभ एक साथ किया गया। योजना में शामिल आठ फसलों के विक्रय के लिए लगभग 23 लाख किसानों ने पंजीयन कराया है। इसमें सोयाबीन, उड़द, मूंग, मूंगफली, तुअर, तिल, रामतिल और मक्का शामिल है। योजना में आंशिक संशोधन करते हुए सरकार ने सोयाबीन एवं मक्का की विक्रय अवधि बढ़ा दी है। साथ ही कृषि जलवायु क्षेत्र में शामिल जिलों के अनुसार औसत उत्पादकता तय की जाएगी, पूर्व में जिलों की औसत उत्पादकता तय की गई थी।
सोयाबीन के लिए राज्य में लगभग 8 लाख से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है, जो सर्वाधिक है। किसानों को अंतर की राशि का भुगतान मार्कफेड और राज्य नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा किया जाएगा, बशर्ते किसान को अपनी उपज अधिसूचित मण्डी परिसर में ही विक्रय करना होगी। प्रदेश की 257 मंडियों में ये योजना शुरू हुई।
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सागर जिले की खुरई नवीन कृषि उपज मंडी प्रांगण में भावान्तर भुगतान योजना के राज्य स्तरीय शुभारंभ कार्यक्रम में कहा कि यह योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करेगी। इस योजना में समर्थन मूल्य से कम दाम पर बिकने वाली फसलों के अंतर की राशि किसानों के बैंक खाते में दी जायेगी। किसानों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ दिलाया जायेगा।
राज्य में सोयाबीन के लिए 8 लाख 42 हजार, उड़द के लिए 4 लाख 35 हजार, मक्का के लिए 2 लाख 10 हजार, तुअर के लिए 71 हजार, मूंगफली के लिए 28 हजार, तिल के लिए 30 हजार, मूंग के लिए 12 हजार और रामतिल फसल के लिए करीब 2 हजार किसानों ने भावांतर भुगतान योजना में पंजीयन करवाया है। ग्रामसभाओं के माध्यम से भी 6 लाख 50 हजार किसानों ने ऑफलाइन पंजीयन करवाया।

मुख्यमंत्री की घोषणाएँ

  • योजना में सोयाबीन की निर्धारित विक्रय अवधि 16 अक्टूबर से 15 दिसम्बर 2017 को बढ़ाकर 31 दिसम्बर किया जायेगा। इसी तरह मक्का की निर्धारित विक्रय अवधि 16 अक्टूबर से 15 दिसम्बर को बढ़ाकर 31 जनवरी 2018 तक किया जायेगा।
  •  प्रदेश के किसी कृषि जलवायु क्षेत्र में जितने जिले शामिल होंगे उनमें से किसी एक जिले के उस फसल के पाँच साल के तीन सर्वश्रेष्ठ वर्ष के फसल कटाई आँकड़ों का सर्वश्रेष्ठ औसत निकालकर क्षेत्र के सभी जिलों की औसत उत्पादकता तय की जायेगी।
  • योजना में पंजीकृत किसान द्वारा कृषि उपज मण्डियों में फसल बेचने के लिये आने पर मण्डी द्वारा किसान को प्रमाण-पत्र दिया जायेगा। इस प्रमाण-पत्र में बेची गई फसल की मात्रा, विक्रय दर, किसान का पंजीयन क्रमांक और दिनांक अंकित होगा।
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