36 हजार करोड़ का भारी नुकसान होगा किसानों को – 20 नवम्बर को दिल्ली में होगी किसान संसद

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नई दिल्ली। किसानों के संगठन का अनुमान है कि इस साल मोटे अनाज व दलहन सहित खरीफ की 7 प्रमुख फसलों – धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली और कपास की खेती में किसानों को 35,968 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नुकसान होगा। संगठन के मुताबिक सरकार की ओर से तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की तुलना में दाम कम होने की वजह से किसानों को यह घाटा होने का अनुमान है।
अगर राष्ट्रीय जनतांत्रिक (गठबंधन (राजग) के 2014 के आम चुनाव में किसानों को जो दाम दिलाने का वादा किया गया था, उस हिसाब से जोड़ें तो इस खरीफ सत्र में किसानों का घाटा 2,00,000 करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाएगा, जिसमें उपज की वास्तविक लागत और उस पर 50 प्रतिशत मुनाफा शामिल है। आल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने यह अनुमान लगाया है, जिसमें देश भर के 150 से ज्यादा छोटे और बड़े किसान संगठन शामिल हैं।
एआई के एससीसी की सदस्य स्वराज अभियान के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा, अगर हम इसमें खराब होने वाले खाद्य जैसे आलू और प्याज को भी शामिल कर लें तो यह आंकड़ा और ज्यादा हो जाएगा।
इस घाटे का अनुमान खरीफ की 7 फसलों की बड़े उत्पादक राज्यों से मंडियों में आवक, मंडी में उनकी दरें और सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अंतर के आधार पर लगाया गया है। देश की 100 बड़ी मंडियों में एक निश्चित अवधि में फसल की आवक और उनकी दरों के औसत के हिसाब से गणना की गई है।
जिन फसलों की आवक के आंकड़े लिए गए हैं, उनमें धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन, मूंगफली, कपास और उड़द दाल शामिल हैं। इनसे किसानों को करीब 36,000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है। अनुमानित उत्पादन में से किसानों की अपनी खपत के अनाज को निकाल दिया गया है और बेची जाने वाली मात्रा को शामिल किया गया है।
श्री यादव ने कहा, अगर हमें उत्पादन की समग्र लागत को देखें तो करीब खरीफ फसलों का मौजूदा मंडी भाव उत्पादन लागत से कम है, जिससे पता चलता है कि किसान अपने निवेश का बेहतर दाम नहीं पा रहे हैं।
इन विसंगतियों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिये 20 नवम्बर को दिल्ली में किसान संसद का एक दिवसीय आयोजन किया जाएगा जिसमें 50,000 से 1,00,000 किसान जमा होंगे। इस साल दूसरी बार इस तरह का कार्यक्रम होने जा रहा है। कुछ महीने पहले देश भर के किसान दिल्ली में जमा हुए थे जिसमें किसानों की समस्या, महिला किसानों और युवाओं की भूमिका पर चर्चा की गई थी।

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