30 बीघा जमीन-कमाई 20 लाख रुपये

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आगर मालवा जिला मुख्यालय से 22 कि.मी. दूर बड़ौद तहसील के ग्राम विनायगा के प्रगतिशील कृषक श्री राधेश्याम परिहार ने, जिस जमीन को ग्रामीण बंजर मान मवेशी चराते थे, आज वही सोना उगल रही है। यहां अनार, संतरा, पपीता, प्याज, लहसुन, अदरक, हल्दी, तुलसी, अजवाइन, जीरा, अश्वगंधा जैसी औषधीय फसलें लहलहा रही हैं। श्री परिहार ने सफलता के कई कीर्तिमान रचते हुए पारंपरिक खेती के रिकॉर्ड तोड़ दिये। कभी पाई -पाई को मोहताज किसान अब सम्पन्न किसानों में नाम कमा रहा है।
दस वर्ष पूर्व राधेश्याम परिहार ने गांव से दो किलोमीटर दूर 1 बीघा बंजर भूमि खरीदी। उस समय जो लोग उनका उपहास करते थे, आज वे दांतों तले अंगुली दबाते हैं। उद्यानिकी खेती में जैविक पद्धति परिहार के लिये वरदान साबित हुई। और देखते ही देखते बंजर भूमि सोना उगलने लगी अब उसी जगह श्री परिहार के पास 30 बीघा जमीन है।
मेढ़ पर भी लगाये पौधे
श्री परिहार ने खेत की मेढ़ का उपयोग भी बखूबी किया। उन्होंने मेढ़ पर मेंहदी, जामफल, आम, आंवला, कटहल, ग्वारपाठा और कोलियस पत्थर चूर सहित तरह-तरह के फूल के पौधे लगा रखे हैं। औषधीय पौधा कौच जो 15 हजार रुपये क्विंटल बिकता है। यह लता के रूप में फैलता है और मालवा की बल्लर की तरह फल देता है इसे भी उन्होंने मेढ़़ पर लगाया है। वे फसलों की सिंचाई ड्रिप पद्धति से करते हैं। उन्होंने 15 बीघा जमीन में हर जगह ड्रिप का जाल बिछा रखा है। मेड़ पर लगे फलदार पौधे की सिंचाई भी ड्रिप से ही होती है। कुएं में पर्याप्त पानी है। वहीं दो ट्यूबवेल का पानी भी कुएं में डालकर ड्रिप से सिंचाई होती है।

 केन्द्रीय कृषि मंत्री ने किया सम्मानित 

खुद के नाम से बनाई कंपनी
श्री परिहार पिछले 8 साल से जैविक खेती कर रहे हैं। खाद वे खुद ही बनाते हैं। पेड़ों की पत्तियों, घास और गोबर से 6 महीने में 50 क्विंटल तक खाद तैयार करते हैं और 30 बीघा जमीन में डालते हैं। वे लहसुन, प्याज, हल्दी, अश्वगंधा, चंद्रसूर, संतरा, तुलसी, ईसवगोल, सफेद मूसली, कलौंजी, मिर्च, मैथी दाना, कालमेघ, अनार, अदरक, आदि फसलें लेकर हर साल 20 लाख रुपये तक कमा रहे हैं। खुद के नाम कंपनी परिहार एग्रो हर्बल एंड एग्री बिजनेस बनाकर अपने उत्पाद दिल्ली, भोपाल आदि जगह भी भेज रहे हैं।
तुलसी बनी वरदान
श्री परिहार ने पिछले वर्ष अपनी 30 बीघा जमीन में से 5 बीघा में श्याम तुलसी लगाई और करीब 12 से 13 क्विंटल उत्पादन प्राप्त किया और 25 हजार रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक्री की। इसकी जड़ें भी 50 रुपये किलो बिकती है। सोयाबीन न बोते हुए तुलसी लगाई थी इसके साथ ही अश्वगंधा की भी खेती की। अश्वगंधा की फसल 5 माह में तैयार हो जाती है। इसका भाव 30 हजार रुपये क्विंटल रहता है। इसका तना, जड़, बीज, पत्ते सभी बिकता है।
पुरस्कार से सम्मानित
श्री परिहार को विगत 9 नवम्बर को अंतर्राष्ट्रीय जैविक सम्मेलन में केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह द्वारा उत्कृष्ट जैविक कृषक आर्गेनिक इंडिया फार्मर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया जो प्रदेश के लिये गौरव की बात है। इन सफलताओं की विस्तार से जानकारी हेतु श्री राधेश्याम परिहार के मोबाईल नं. 8989074051 पर संपर्क कर सकते हैं।

– श्रवण मीणा

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