हाल की वर्षा का खेती पर प्रभाव

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पूरे देश भर में मानसून की अच्छी आमद के साथ भरपूर कृषि उत्पादन की आस बंधी थी लेकिन हमेशा की तरह कहीं सूखे की स्थिति बनी और कहीं अतिवर्षा की। मध्यप्रदेश में मध्य और पूर्वी क्षेत्र अतिवर्षा  से प्रभावित रहा। मालवा क्षेत्र में हर बार से बढिय़ा उत्पादन की स्थिति सामने आ रही थी वहीं फसल कटाई, गहाई के समय आकस्मिक रूप से अतिवर्षा की स्थिति बन गई है। इससे फसलों की कटाई, गहाई प्रभावित हो रही है, खेतों में कटी हुई फसलें काली पड़ रही हैं, सड़ रही हैं, विशेषकर दलहनी फसलें- मूंग, उड़द अधिक प्रभावित हैं. किसान हैरान-परेशान है। बुजुर्गों ने सच ही कहा है- ‘ठाड़ी खेती गाभिन गाय- तब जानो जब घर में आए।Ó केवल खेत में लहलहाती फसलों और गाभिन गाय को देखकर ही सपने नहीं बुनना चाहिए, जब पैदावार सही-सलामत तैयार होकर हाथ में आ जाए और गाय का प्रसव ठीक से होकर दूध देने लग जाए तभी सफलता माननी चाहिए। इस बार की वर्षा ‘चौमसेÓ की याद दिला रही है जबकि वर्षा सामान्यत: आषाढ़ से क्वांर माह तक होती थी। अब किसानों के सामने दो प्रश्न उपस्थित हैं, पहला घास-खरपतवार से भरे खेतों की रबी के लिये अच्छी तैयारी कैसे की जाए और आसमान में बेमौसम उमड़ते-घुमड़ते बादलों के मध्य अगली फसल की बोआई सुरक्षात्मक रूप से किस समय की जाए।
खेत की तैयारी के लिए आधुनिक कृषि उपकरणों में वरीयता हैरो को देना चाहिए व आंशिक बतर आने पर हैरो से खेत तैयार करना चाहिए। इससे खेत में भरपूर कचरा आसानी से कटकर धराशायी हो जाएगा व जमीन भी उलट-पलट हो जाएगी। कल्टीवेटर से खेत तैयार करने में बार-बार कचरा इसमें से निकालना होगा, जगह-जगह खेत में कचरे के ढेर लग जायेंगे व खेत सही तरीके से तैयार नहीं होगा। रोटावेटर से खेत तैयार करने में एक बार में ही कचरा जरूर खेत में कट कर मिल जाएगा लेकिन इसकी टाइन्स गीले खेत में बीज बोने की सतह को ठोकर मार कर कड़ा बना देगी जिससे गहरी काली मिट्टी में बोई जा रही फसल की बढ़वार और उत्पादन विपरीत रूप से प्रभावित होगा। इन सभी बातों को दृष्टिगत रख खेत की तैयारी के लिये हैरो के प्रयोग को वरीयता दें। हैरो की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए इसके दोनों गेंग का अंतर आवश्यकतानुसार बढ़ा लें व हैरो की फ्रेम पर वजन रखें ताकि हैरो की जमीन तैयारी के लिये गहराई ठीक हो सके।
सितंबर के अंतिम सप्ताह से अक्टूबर के प्रथम सप्ताह तक जो वर्षा हुई उसका दुष्प्रभाव भले ही खरीफ फसलों की कटाई पर पड़ा लेकिन यह वर्षा रबी फसलों के लिये लाभकारी है। इस वर्षा से खेतों में नमी, नदी तालाबों में भरपूर पानी संरक्षित होगा। खेत की तैयारी के बाद बोई गई फसलों का अंकुरण भरपूर नमी के कारण भरपूर होगा व पर्याप्त नमी के कारण बोई गई फसलों की बढ़वार भी तेज होगी और उसका लाभकारी परिणाम भरपूर उत्पादन के रूप में दिखेगा।
हथिया पूंछ डुलावे, घर बैठे गेहूं आवै। हस्त नक्षत्र अपने अंतिम चरण में बरस जाये तो गेहूं की भरपूर पैदावार होगी।
इस समयावधि में जो हस्त नक्षत्र के अंतर्गत वर्षा हुई वह सामान्यत: थोड़े समय के लिये तेज गति से हुई कुछ इस तरह मानो हाथी ने पानी पीकर सूँड से तेज बौछार कर दी हो इसलिए ही इस हस्त नक्षत्र को जनभाषा में ‘हथियाÓ के नाम से जाना जाता है और यह वर्षा सामान्यत: सभी क्षेत्रों में एक जैसी नहीं होती इसके पीछे यह मान्यता है कि हस्त नक्षत्र क्वांर (आश्विन) माह में आता है और इस मास में पानी भाग्यवान लोगों के खेतों में गिरता है अथवा जहां गिरता है वे भाग्यवान (भरपूर उपज की आशा में) हो जाते हैं – क्वाँर पानी-भागवानी।
दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न है कि बतर आने पर बोआई कब करें? कुसुम, सरसों, राई, अलसी जैसी तिलहनी फसलों की बोआई यथाशीघ्र करना चाहिए। खेत तैयारी के बाद यदि ढेलेदार खेत हो तो चना बोना चाहिए व खेत व भलीभांति तैयार हुआ हो, मिट्टी नरम-बारीक-मैदे के समान हो तो गेहूं बोना चाहिए।
मैदे गेहूं ढेले चना
मकड़ी जब घास पर जाला पूरने लगे तब समझना चाहिए कि खेत में बोनी का समय आ गया है। बर्रे जब अपने छत्ते से उड़कर घर में आने लगे तब गेहूँ बोने का उचित समय मानना चाहिए। प्राय: चित्रा नक्षत्र में (10 से 23 अक्टूबर) चने बोने से कीड़े कम लगते हैं व स्वाति नक्षत्र (24 अक्टूबर से 9 नवम्बर) में गेहूं बोने से बाली पकते समय गरम हवाओं का असर नहीं होने से पैदावार अच्छी मिलती है।
घाघ-भड्डरी और बुजुर्ग किसानों से खेती में अच्छी उपज पाने के लिये ज्ञान से भरी महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं। नई कृषि तकनीक के साथ पुरानी बातों का तालमेल बैठाकर खेती में अच्छी सफलता पाई जा सकती है।
रबी की अच्छी पैदावार पाने के लिये शुभकामनायें।

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