समस्या- सोयाबीन में बीजोपचार का क्या कोई लाभ है?

www.krishakjagat.org
Share

– रमेश वर्मा, विदिशा
समाधान – अधिकांश किसान सोयाबीन की खेती वर्षों से एक ही खेत में करते चले आ रहे हैं। लगातार खेती होने के कारण सोयाबीन के खेतों में सोयाबीन फसल के रोगों के जीवाणु, फफूंद भी भूमि व बीज में स्थापित हो गये हैं। सोयाबीन फसल के रोग भूमि व बीज जनित रहते हैं। फसल को रोगों से बचाने के लिए हमें भूमि तथा बीज जनित रोगों से फसल को बचाना होगा अत: बीजोपचार लाभकारी होगा।
– पौधों की प्रारम्भिक अवस्था में रोगों से बचाने के लिए बीज उपचार एक कम खर्च का साधन है। इसलिए बीज उपचार आवश्यक है।
– सोयाबीन के बीज को भूमि जनित रोगों से बचाने के लिए थायरम 2 ग्राम प्रति किलो बीज तथा बीज जनित रोगों से बचाने के लिए कार्बोक्सिन 2 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करें।
– थायरम तथा कार्बोक्सिन का मिश्रण बाजार में भी उपलब्ध करा रही है। इसका 2 ग्राम प्रति किलो बीज का उपयोग करने से फसल 20-25 दिन तक रोगों से सुरक्षित रहती है और प्रारम्भिक अवस्था में रोग के कारण नहीं मरते। बीजों का अंकुरण भी एक समान होता है।
– इससे उपचार 1-2 माह पूर्व भी किया जा सकता है।

www.krishakjagat.org
Share
Share