समस्या-समाधान

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खरपतवार नियंत्रण
समस्या- अभी हुई बारिश के चलते कैसे करें सोयाबीन, मूंग, उड़द में खरपतवार नियंत्रण।
समाधान- मध्यप्रदेश के कई स्थानों में पिछले तीन दिन से हो रही बारिश खरीफ फसल के लिए लाभदायक है। ऐसे में लगातार नमी बने रहने के कारण खरपतवार में बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। इसलिए खरीफ फसलों जैसे सोयाबीन, अरहर, उड़द में खरपतवारों का नियंत्रण आवश्यक है। यदि नियंत्रण न किया जाए तो उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत की कमी आ सकती है। समय पर नींदानाशक का उपयोग करने से फसल उत्पादन में बढ़ोत्तरी होती है। 20 से 22 दिन पहले बोई गई फसल के पौधे इसी दौरान ग्रोथ करते हैं। ऐसे में पौधा बड़ा होता है और जड़ें भी नीचे की ओर जाती हैं। ऐसे में बारिश हो जाने से पौधे की जड़ें पुष्ट होती हैं और वे धरती से नाइट्रोजन व अन्य पोषक पदार्थ आसानी से ग्रहण करने लगती हैं। सोयाबीन, मूंग व उड़द फसल के प्रारम्भिक 30 से 40 दिनों तक खरपतवार नियंत्रण बहुत आवश्यक होता है। खरपतवार नियंत्रण के लिए अंत:कर्षण क्रियाओं द्वारा खरपतवार नियंत्रण को नींदानाशक से छिड़काव द्वारा नियंत्रण से प्राथमिकता दें। बतर आने पर मानव चलित व्हील, ग्रबर बीडर या पशु चलित कुल्फा या डोरा चलाकर खरपतवार नियंत्रण करें व दूसरी निंदाई अंकुरण होने के 30 और 45 दिन बाद करें। खड़ी फसल जो 15 से 25 दिन की है उसमें घास कुल के खरपतवारों को नष्ट करने के लिए 400 मिली क्विजेलोफॉप इथाईल प्रति एकड़ अथवा घास कुल और कुछ चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के लिए 300 मिली इमेजाथायपर प्रति एकड़ की दर से फ्लेटफेन या फ्लेटजेट नोजल की सहायता से पूरे खेत में छिड़काव करें। यदि फसलें किसी कारणवश कमजोर नजर आयें तो अच्छे विकास हेतु बुवाई के 20-30 दिन बाद 75 ग्राम घुलनशील एनपीके (19:19:19) प्रति 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
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सोयाबीन में इल्लियों का प्रकोप
समस्या- पश्चिमी मध्यप्रदेश में अभी हुई तेज बारिश ने किसानों के सामने मुसीबत खड़ी कर दी है। वहां सोयाबीन के अधिकतर खेतों में पानी जमा है। इससे सोयाबीन की फसल में भारी नुकसान का अंदेशा हो गया है। पहले बारिश की कमी से पौधों के मुरझाने की समस्या से जूझ रहे किसान अब अधिक बारिश और जल जमाव से जूझ रहे हैं। यदि 24 घंटे से ज्यादा समय तक खेतों में पानी भरा रहा तो फसलों में इल्लियों का प्रकोप शुरू हो जाएगा। फसलें सड़कर खराब हो सकती हैं।
समाधान- किसान ये उपाय करें- अपने खेतों से पानी निकालने की व्यवस्था करें। जड़ गलन व पदगलन रोगों की रोकथाम के लिए 300 मिली हेक्साकोनाजोल 5 प्रतिशत एससी जैसे कनटाफ प्लस या हैक्साधन या 300 ग्राम कार्बेन्डाजिम 12 प्रतिशत + मैन्कोजेब 63 प्रतिशत जैसे साफ या सिक्सर/ एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें। यदि इल्लियों का प्रकोप दिखने लगे तो इल्लियों की रोकथाम के लिए 400 मिली प्रोफेनोफॉस 50 ईसी प्रति एकड़ प्रति 150 ली. या 100 ग्राम फ्लुबेंडामाइड 20 डब्ल्यू.जी जैसे टाकुमी या फ्लुटोन प्रति एकड़ 150 -200 लीटर पानी में मिला कर छिड़कें। यदि किसी कारणवश सोयाबीन में बढ़वार की कमी नजर आये तो अच्छी वढ़वार के लिए बुवाई के 20-30 दिन बाद 75 ग्राम घुलनशील एनपीके (19:19:19) प्रति 15 लीटर पानी छिड़के
– शाजापुर से आरपीएस नायक, परियोजना संचालक आत्मा

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