समस्या – समाधान

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समस्या – टमाटर व मिर्च के पौधे सूखते जा रहे हैं, निराकरण करने का कष्ट करें।
– गंगा प्रसाद शर्मा,
खण्डारसभा, राजस्थान
समाधान-
टमाटर तथा मिर्च के पौधों के मुरझा कर सूखने के कई कारण हैं। इनके पौधे पानी की कमी, फफूंद (भर्टीसिलियम व फ्यूजेरियम), बेक्टीरिया (सुक्लोमोनास) तथा वायरस का प्रकोप इनके सूखने का मुख्य कारण है। इसके सही निराकरण के लिए आपके खेत में पौधों के सूखने का मुख्य कारण कौन सा है यह जानना आवश्यक है। इस अवस्था में निराकरण हेतु निम्न उपाय अपनायें।
1. आरम्भ में ग्रसित पौधों को निकाल कर मिट्टी में दबा दें ताकि बीमारी आगे न फैलने पाये। आने वाले वर्षों में यदि आप टमाटर या मिर्च की खेती करना चाहते हैं तो निम्न बातों का ध्यान रखें।
2. फसल चक्र का ध्यान रखें। बैंगन, आलू व मिर्च वाले खोतों में टमाटर न लगायें।
3. टमाटर व मिर्च उन्हीं खेतों में लगायें जहां पानी की निकासी अच्छी हो। मिट्टी का पी.एच. मान 6.5 से 7.5 के बीच हो
4. फसल को नाइट्रोजन की आपूर्ति नाइट्रेट आधारित उर्वरक (अमोनियम नाइट्रेट) से करनी चाहिए न कि अमोनियम (यूरिया) आधारित उर्वरकों से।
5. बीमारी निरोधी टमाटर एफ1 हाइब्रिड अर्का रक्षक को लगायें।
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समस्या- मैं मेन्था (पोदीने) की खेती करना चाहता हूं। इसके लिए आवश्यक जानकारी देने की कृपा करें।
– नारायण पवार, छतरपुर (म.प्र.)
समाधान-
आपके क्षेत्र के कुछ किसान विगत वर्षों से मेन्था की खेती कर रहे हैं। इसकी खेती के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. इसके लिए अच्छी निकास वाली दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है जिसका पीएच मान 6.0 से 8.2 तक होना चाहिए।
2. खेत अच्छी तरह तैयार कर लें। खेत में 20 गाड़ी गोबर की खाद जुताई के समय मिला लें।
3. सकर्स तैयार करने के लिए अगस्त में क्यारियां तैयार कर उसमें घनी मेन्था की जड़ें लगा दें और सिंचाई करते रहें।
4. खेत में रोपाई का उचित समय जनवरी-फरवरी रहता है।
5. रोपाई के पूर्व खेत में 20 किलो नत्रजन, 30 किलो फास्फोरस, 15 किलो पोटाश तथा 80 किलो जिप्सम प्रति एकड़ के मान से डालकर क्यारियां बना लें।
6. सकर्स के रोपाई के पूर्व 10-10 से.मी. लम्बाई के टुकड़े काट लें।
7. लाईन से लाईन की दूरी 60 से.मी. व पौधों से पौधों की दूरी 30 से.मी. रखें। एक एकड़ में 20 किलो सकर्स लगेंगे। फसल में निराई-गुड़ाई 2 बार अवश्य करें।
द्य फसल को आवश्यकतानुसार सिंचाई अवश्य दें। मेन्था की पहली कटाई वर्षा के पूर्व मई-जून तथा दूसरी सितम्बर-अक्टूबर तथा तीसरी नवम्बर- दिसम्बर में करें।
8. एक एकड़ में मेन्था का लगभग 60 किलो तेल प्राप्त हो जाता है। मेन्था की खेती तभी करें जब आपके पास तेल निकालने की सुविधा हो।

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समस्या- लहसुन की कोई नई जाति यदि हाल के वर्षों में निकली है तो उसकी जानकारी दें।
सुन्दरलाल धाकड़, मंदसौर
समाधान-
विगत वर्षों में राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान व विकास प्रतिष्ठान नासिक महाराष्ट्र से लहसुन की नई जाति यमुना सफेद-5 निकाली है जो उत्तर भारत के राज्यों के लिए अनुसंशित की गई है। इसके कंद बड़े तथा इनका व्यास 4.5 से 5.0 से.मी. है तथा ये 150 से 160 दिन में पक कर तैयार हो जाती है। इसकी औसत उपज 170 से 180 क्विंटल प्रति हेक्टर अनुमानित है।
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समस्या – हमने गन्ने की फसल लगाई है किन्तु अब उसकी बिक्री की चिंता है कृपया उचित मार्गदर्शन करें क्योंकि हमारे जिले अथवा आसपास क्षेत्र में कोई खरीददार नहीं है।
– दिनेश धाकड़, नीमकाखेड़ा, नीमच
समाधान-
आपने गन्ना लगाया है। आपके क्षेत्र में गन्ने का रकबा नगण्य है। अधिक रकबा होता तो वहां भी शक्कर कारखाना आ जाता आपने स्वयं लिखा है आपके जिले में या आसपास गन्ने के खरीददार नहीं है इस विषय में आपकी मदद करने के लिए हमने पूछताछ भी की और यही पता चला कि गन्ने की बिक्री की समस्या आपके सामने रहेगी। आपको यही सलाह दी जा सकती है कि गन्ने की फसल तैयार होने के पहले गन्ने को पेरने के लिये और गुड़ बनाने के लिये बिक सकता तो क्या हुआ गुड़ तो हाथों-हाथ स्थानीय बाजार में बेचा जा सकता है आप प्रदेश के गन्ना विशेषज्ञ डॉ. साधुराम शर्मा से मोबाईल 9425478293 पर सम्पर्क करके मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
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समस्या- कृपया डेयरी फार्म खोलने के लिये सरकारी योजना के बारे में जानकारी प्रदान करें।
– शिव कुमार तिवारी, टीकमगढ़
समाधान –
आप डेयरी फार्म खोलने के लिये तैयारी कर रहे हैं। डेयरी फार्म के लिये पशुओं का चयन एवं खरीददारी के लिये पूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिये कृषक जगत द्वारा प्रकाशित पुस्तक 5 एकड़ से कमाएं 50 लाख मंगवा सकते हैं। पुस्तक का मूल्य 95 रु. है। आपको सभी पहलुओं पर जानकारी एवं मार्गदर्शन प्राप्त हो सकेगा। आपके पास यदि थोड़ी बहुत खेती होगी तो खेती के साथ डेयरी का काम अच्छा चारा-भूसा सरलता से मुफ्त उपलब्ध हो जाता है जिससे लागत में फर्क यह आता है और लाभ अधिक होने की संभावना हो जाती है।

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