समस्या- गेहूं पर स्प्रिंकलर से सिंचाई करने से उसके फूलों पर विपरीत असर होता है। स्प्रिंकलर से सिंचाई के लाभ बतायें।

– मनमोहन सिंह, भिंड
समाधान- स्प्रिंकलर विधि से जब पहली बार सिंचाई की सिफारिश की गई थी उसके बाद कई क्षेत्रों से यह दलील उठी की स्प्रिंकलर के पानी की बौछार से गेहूं के फूलों पर विपरीत असर हुआ है। यह बात अनुसंधान संगत नहीं है। उसके पीछे यह सत्य है कि आमतौर पर गेहूं की बालों पर पीले -पीले पतले छिलके दिखते हैं उसे गेहूं का फूल माना जाता है और तय किया जाता है कि स्प्रिंकलर से फूल झड़़ गया परंतु वास्तविकता यह है कि गेहूं का फूल बालियों के भीतर सुरक्षित रहता है और पीले-पीले छिलके दिखते हैं के पराग क्रिया के बाद निकले खाली खोखले अवशेष होते हैं, गेहूं के फूल नहीं समझा जाये कि यदि बालियों पर वे अवशेष दिखाई दे रहे हैं तो परागीकरण क्रिया समाप्त हो चुकी है अतएव स्प्रिंकलर की सिंचाई से और गेहूं के फूल की बर्बादी का कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं है बल्कि इसके उपयोग से कीमती जल का अपवय पर रोक लगती है और गेहूं की उत्पादकता बढ़ जाती है।

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