वर्ष 2016-17 में खरीफ का होगा रिकॉर्ड उत्पादन

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नई दिल्ली। मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान देश में रिकॉर्ड 13.5 करोड़ टन अनाज उत्पादन की उम्मीद है। खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार में दलहन की  फसल का अधिक योगदान होगा जो अब नई ऊंचाई पर पहुंचने की उम्मीद है। केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने पहला खरीफ अग्रिम उत्पादन अनुमान जारी करते हुए कहा कि बंपर उत्पादन का अनुमान कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों और अच्छे मौसम के कारण संभव होता दिखाई दे रहा है। तिलहन उत्पादन 2.33 करोड़ टन रहने की उम्मीद है जो पिछले साल के मुकाबले 40.80 फीसदी अधिक है। इससे महंगाई से थोड़ी राहत मिलने के साथ ही अगले महीने की शुरुआत में होने वाली नीतिगत समीक्षा में भारतीय रिजर्व बैंक कम ब्याज दरों के लिए भी प्रोत्साहित होगा। कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2016-17 के खरीफ सत्र में अनाज उत्पादन करीब 13.5 करोड़ टन रहने की उम्मीद है जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 1.10 लाख टन अधिक होगा।
इससे पहले 2011-12 में खरीफ मौसम के दौरान खाद्यान्न उत्पादन सबसे ज्यादा हुआ था जब देश में 13.12 करोड़ टन अनाज की पैदावार हुई थी। इस खरीफ सीजन में दलहन के रिकॉर्ड उत्पादन की वजह बंपर फसल होगी जो अनुमानत: 87 लाख टन हो सकती है और यह 2015-16 के मुकाबले 57.03 फीसदी अधिक है। आखिरी दफा देश में दलहन की फसल इस खरीफ सीजन के मुकाबले वर्ष 2010-11 में सबसे अधिक हुई थी जब करीब 71 लाख टन दालों का उत्पादन हुआ था। वर्ष 2016-17 में अरहर उत्पादन 42.9 लाख टन रहने की उम्मीद है जो पिछले साल के मुकाबले करीब 18.3 लाख टन अधिक है।
खरीफ मौसम की प्रमुख फसल  चावल का उत्पादन करीब 9.38 करोड़ टन रहने की उम्मीद है जो वर्ष 2015-16 के उत्पादन के मुकाबले 2.81 फीसदी अधिक है और यह देश के लिए एक नया रिकॉर्ड है। वहीं इस सीजन में 2.33 करोड़ टन तिलहन फसल की उम्मीद है जो पिछले साल के मुकाबले 40.80 फीसदी अधिक होगी। कपास का उत्पादन 2016-17 में 3.21 करोड़ गांठ रहने की उम्मीद है जो पिछले साल के मुकाबले करीब 6.56 फीसदी अधिक है। केवल गन्ना, जूट और मेस्टा के उत्पादन में ही कमी दिख रही है।
वर्ष 2016-17 के फसल सीजन में गन्ने का उत्पादन करीब 30.52 करोड़ टन रहने की उम्मीद है जो पिछले साल के मुकाबले 13.32 फीसदी कम है। वहीं जूट का उत्पादन 1.04 करोड़ गांठ रहने की उम्मीद है जो पिछले साल के मुकाबले करीब 0.57 फीसदी कम है। देश के लाखों किसानों के लिए जीवनरेखा माने जाने वाला दक्षिणी-पश्चिमी मानसून जुलाई और अगस्त के दौरान काफी बेहतर रहा जो खरीफ फसलों की बुआई और वृद्धि के लिए काफी अहम होता है।

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