वर्ष 2015-16 कृषि क्षेत्र में क्या खोया और क्या पाया?

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म.प्र. कृषि क्षेत्र में निरन्तर आगे बढ़ रहा है। लगातार चार बार कृषि कर्मण अवॉर्ड प्राप्त करने के बाद इसके हौसले बुलंद हैं। मुख्य फसलों की उत्पादकता में वृद्धि हुई है तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्य आगे चल रहा है। किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में कृषि का रोडमैप तैयार किया गया है तथा फसल बीमा की राशि बांटने में अगली पायदान पर है। वर्ष 2015-16 में राज्य की प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं-

  •  कुल कृषि उत्पादन में वृद्धि – कुल कृषि फसलों का उत्पादन वर्ष 2014-15 में 415.39 लाख मी. टन था, जो वर्ष 2015-16 में बढ़कर 423.49 लाख मी. टन हुआ है। इस प्रकार समस्त कृषि फसलों में 8.1 लाख मी. टन का अधिक उत्पादन प्राप्त किया।
  • कुल खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि – सम्पूर्ण खाद्यान्न फसलों का उत्पादन वर्ष 2014-15 में 320.48 लाख मी. टन से बढ़कर वर्ष 2015-16 में 346.19 लाख मी. टन उत्पादन हुआ है, जो विगत वर्ष से 8.02 प्रतिशत अधिक है।
  • गेहूं की उत्पादकता – गेहूं की औसत उत्पादकता वर्ष 2015-16 में बढ़कर 31.31.क्विं. प्रति हेक्टे. हो गई।
  • धान की औसत पैदावार वर्ष 2015-16 में तीन गुना से अधिक बढ़कर 27.74 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गई है।
  • कृषि क्षेत्र में बढ़ोत्तरी – कुल कृषि क्षेत्र वर्ष 2015-16 में बढ़कर 2.37 करोड़ हेक्टेयर हो गया है।
  • कुल सिंचित क्षेत्रफल में वृद्धि- प्रदेश में नहरों, कुओं, तालाबों आदि से सिंचित क्षेत्रफल में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। वर्ष 2015-16 में 110 लाख हेक्टर होने का अनुमान है।
  • प्रदेश में नहरों से सिंचित क्षेत्र वर्ष 2015-16 में बढ़कर 36.00 लाख हेक्टर होने का अनुमान है।
  • जैविक खेती का विकास – जैविक खेती के अंतर्गत प्रदेश में तेजी से विकास हुआ है। वर्ष 2015-16 में 1.98 लाख हेक्टेयर हो गया है।

मध्यप्रदेश देश की कुल जैविक खेती के उत्पादन का 40 प्रतिशत से अधिक उत्पादन करने वाला राज्य है।

  • बीमा योजना की सफलता खरीफ 2015 में 20.46 लाख किसानों को राशि रु. 4416.89 करोड़ के दावों का भुगतान किया।
  • मृदा स्वास्थ्य पत्रक- स्वाईल हेल्थ कार्ड योजना अंतर्गत वर्ष 2015-16 में 12.07 तथा वर्ष 2016-17 में 15.71 लाख किसानों को मृदा स्वास्थ्य पत्रक प्रदाय किये जा चुके हैं।
  • नवीन तकनीकी को प्रोत्साहन- वर्ष 2015-16 में 6.00 लाख हेक्टर में एस.आर.आई. पद्धति से धान की रोपाई हुई।
  • वर्ष 2015-16 में 40 लाख हेक्टर क्षेत्र में रिज एंड फरो पद्धति से सोयाबीन की बोनी की गई।
  • तीसरी फसल का विस्तार- प्रदेश में तीसरी फसल के क्षेत्र में वृद्धि की गई है। वर्ष 2015-16 में 2.73 लाख हेक्टर (अनु.) फसल ली गई है।
  • उर्वरक अग्रिम भंडारण – वर्ष 2015-16 में 16.35 लाख मी. टन उर्वरक अग्रिम भंडारण योजना के तहत भंडारित किया गया।
  • यंत्र दूत  के अंतर्गत वर्ष 2015-16 में 200-200 ग्रामों को विकसित किया गया। वर्ष 2016-17 में अतिरिक्त 200 ग्रामों को विकसित किया जा रहा है।
  • कस्टम हायरिंग सेंटर – वर्ष 2015-16 के अंत तक प्रदेश में निजी क्षेत्र में 1250 कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना की गई है।
  • प्रदेश में केंद्र प्रवर्तित प्रमुख योजनाओं में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, स्वाईल हैल्थ कार्ड, परम्परागत कृषि विकास, राष्ट्रीय कृषि बाजार, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
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