रबी फसलों में बीज का महत्व

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मनुस्मृति में कहा गया है –
    अक्षेत्रे बीजमुत्सृष्टमन्तरैव विनश्यति।
    अबीजकमपि क्षेत्रं केवलं स्थण्डिलं भवत्।।
    सुबीजम् सुक्षेत्रे जायते संवर्धते
उपरोक्त    श्लोक द्वारा स्पष्ट किया गया है कि अनुपयुक्त भूमि में बीज बोने से बीज नष्ट हो जाते हैं और अबीज अर्थात्    गुणवत्ताहीन बीज भी खेत में केवल लाथड़ी बनकर रह जाता है। केवल सुबीज-अर्थात् अच्छा बीज ही अच्छी भूमि से भरपूर उत्पादन दे सकता है। अब यह जानना आवश्यक है कि सुबीज क्या है सुबीजम् सु तथा बीजम् शब्द से मिल कर बना है। सु का अर्थ अच्छा और बीजम् का अर्थ बीज अर्थात् अच्छा बीज। रबी में गेंहूँ, चन्ना, सूरजमुखी व मटर इत्यादि की खेती की जाती हैं ये खाद्यान्न फसलें न केवल भोजन की आवश्यकताओं की पूर्ति करती है वरन औद्योगिक क्षेत्र में इनका अच्छा योगदान हैं। खाद्यान्न फसलों का सफल उत्पादन तभी संभव जब उन्नत कृषि प्रणालियों के साथ-साथ उच्च कोटि की लागतों का भी प्रयोग करे, आधुनिक खेती में उत्तम बीज का स्थान सर्वोपरि है। किसान खेती से अधिक से अधिक लाभ कमान चाहता है उसके लिए वह महंगे से महंगे उर्वरक, कीटनाशी व खरपतवारनाशी दवाइयों का उपयोग करता है जिससे उसका उत्पादन तो नहीं बढ़ पाता, वरन उसकी खेती की लागत और भी ज्यादा बढ़ जाती है। उन्नत बीज से आशय उन बीजों से हैं जो अनुवांशिक रूप से शुद्ध होने के साथ ओज एवं आवश्यक अंकुरण क्षमता से युक्त होए बीजों की गुणवता व शुद्धता की पुष्टि बीज परीक्षण के द्वारा ही संभव हैं रबी की ऋतु आते ही किसान आग देखते हैं न ताव जल्दबाजी से कहीं से भी बीज का प्रबन्ध करते हैं तथा खेत में बो देते है ऐसे में किसान महत्व पूर्ण बातो को नजऱअदाज करते हैं जिसका परिणाम होता है उपज में कमी तथा उनको लाभ की जगह पर घाटे से सामना करना पड़ता हैं यह माना गया है की खराब बीज के चयन से उपज में 30-40 प्रतिशत तक की हानि हो सकती हैं इसलिए यह जरूरी हो जाता है की किसान फसलों को बीजऩे से पहले स्वस्थ बीज का चयन करे, यह सलाह दी जाती है की बीज का चुनाव करते समय किसान निम्न बातो को ध्यान में रखें।

  • अच्छी गुणवत्ता का बीज एक मजबूत और स्वस्थ फसल विकसित करने के लिए आवश्यक हैं। स्वस्थ बीज विश्वसनीय स्रोतों या किसानों से खरीदा जा सकता हैं।
  • कई रोग बीज के माध्यम से फेल रहे हैं। एक पीडि़त क्षेत्र का बीज अगली फसल के लिए इस्तेमाल होता हैं, तो इस बीज से  पैदा हुए रोगों से गंभीर समस्या पैदा हो जाएगी। इस प्रकार बीज चयन स्वस्थ पौधों से प्राप्त करना चाहिए।
  • छोटे, सूखे और टूटे बीज से कम अंकुरण होता है। ऐसे बीजों को दूर करके, किसान मजबूत और स्वस्थ पौध विकसित करने के लिए सक्षम हो सकता है।
  •  बीज अगर ध्यान से चयनित है, तो भी रोग से ग्रस्त हो  सकते हैं। इन मामलों में बीज उपचार करके  बीज की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • फसल का बीज हमेशा नया ही खरीदना चाहिए कुछ किसान बीज की जगह पर खाने वाले अनाज का इस्तेमाल करते जिससे उनको उचित उत्पादन नहीं मिल पाता।
  • फसल का बीज कंकर, पत्थर, धुल भूषा इत्यादी से मुक्त होना चाहिए।
  • फसल का बीज कीटों से मुक्त होना चाहिए।
  • फसल का बीज कट्टा फट्टा, अविक्षित एवं टुकड़े हुआ नहीं होना चाहिए। बीज एक सामग्री है जो पोध रोपण या उत्थान के उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि वैज्ञानिक रूप से, बीज एक निशेचित परिपक्व बीजाणु हैं जो बीज कोट में लिपटा रहता है अगर आसान भाषा में कहे तो बीज नया पौधा तैयार करने का साधन हैं।
    उन्नत बीज की विशेषताएं- द्य यह आनुवंशिक रूप से शुद्ध होना चाहिए।
  • इसमें भौतिक शुद्धता का अपेक्षित स्तर होना चाहिए।
  • यह कीटों एवं रोगों से मुक्त होना चाहिए।
  • उच्च अंकुरण क्षमाता होनी चाहिए।
  • इष्टतम नमी होनी चाहिए।

उन्नत बीज का महत्व –

  • बीज फसलों के उत्पादन में एक महत्वपूर्ण आदान है। द्य यह फसल उत्पादन और कृषि प्रगति की कुंजी में सबसे सस्ता आदान  है।
  • फसल स्थिति काफी हद तक बुवाई के लिए बीज की प्रयुक्त सामग्री पर निर्भर करता है।
  • फसल उत्पादन में अन्य आदानों की प्रतिक्रिया बीजक सामग्री पर निर्भर करता है।
  • इसकी लागत अन्य सामग्री की तुलना में कम होती हैं।
  • गुणवत्ता के बीज उत्पादन के अधीन क्षेत्रों में वृद्धि करने की जरूरत है।
  • उन्नत किस्मों के लिए अच्छी गुणवत्ता के बीज उपज में लगभग 20-25प्रतिशत वृद्धि में योगदान कर सकते हैं।

उन्नत बीजों की भूमिका-

  • उन्नत बीज नई तकनीक के वाहक होते है।
  • उन्नत बीज एक सुरक्षित भोजन की आपूर्ति के लिए बुनियादी पहलू है।
  • उन्नत बीज फसल की उच्च पैदावार प्राप्त करने के लिए अनिवार्य।
  • उन्नत बीज प्राकृतिक आपदाओं के बाद कृषि के तेजी से पुनर्वास का मध्यम होता है।
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