यूरिया से पौधों को नत्रजन उपलब्धता कैसे?

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यूरिया यद्यपि कार्बनिक पदार्थ है, किन्तु इसकी गणना अकार्बनिक खादों में की जाती है। इसका कारण यह है कि यह अकार्बनिक साधनों से प्राप्त होता है।
यूरिया के विशिष्ट गुण
यूरिया सफेद लम्बे दानों और गोलियों के रूप में तैयार किया जाता है। जल में बहुत घुलनशील है। इसमें नाइट्रोजन प्रदान करने वाली खादों में सबसे अधिक नाइट्रोजन प्रतिशत पाया जाता है (46 प्रतिशत) यह वायु की नमी को शीघ्र ग्रहण कर लेता है।
यूरिया को ऊंचे तापमान पर भी कभी नहीं रखना चाहिए,क्योंकि 55 डिग्री सेल्सियस से ऊपर ताप पर यूरिया, अमोनिया और कार्बन डाइआक्साइड में विच्छेदित हो जाता है।
भूमि में मिलाये जाने पर परिवर्तन
यूरिया को जब भूमि में मिलाया जाता है तो वह शीघ्र ही जलांशन ग्रहण करता है और अमोनियम कार्बोनेट में परिवर्तित हो जाता है। इस प्रकार उत्पन्न अमोनिया शीघ्र ही नाइट्रीकरण द्वारा नाइट्रस अम्ल और नाइट्रिक अम्ल में परिवर्तित हो जाती है।
इस प्रकार निर्मित नाइट्रिक अम्ल शीघ्र ही भूमि में पाये जाने वाले क्षारों से मिलकर शाकाणुओं की सहायता से नाइट्रेट में परिवर्तित हो जाते हैं और पौधों द्वारा उपयोग कर लिए जाते हैं।
यूरिया इस प्रकार अमोनिया और नाइट्रेट दोनों ही प्रकार के आयन पौधों द्वारा शोषित किये जाने के लिए उपलब्ध करता है। यह नाइट्रोजन का अत्यन्त ही सकेन्द्रित यौगिक है जिसकी सारी नाइट्रोजन खाद के रूप में पौधों के काम आ जाती है। यूरिया को मिट्टी में मिलाने के 24 घंटे के उपरान्त यह अमोनिया के रूप में परिवर्तित हो जाता है। यह परिवर्तन भूमि के प्रकार, ताप, नमी और उनकी प्रतिक्रिया पर निर्भर करता है।
यूरिया का मुख्य दोष है, इसकी पानी में अति घुलनशीलता। यूरिया हवा से भी नमी ले लेता है। इसकी अतिघुलनशीलता तथा भूमि में कुछ क्रियाओं के कारण फसल में डाली गई यूरिया में से नाइट्रोजन 20 से 50 प्रतिशत फसल ले पाती है। कुछ नाइट्रोजन भूमि में स्थिर हो जाती है और बाकी 16 से 50 प्रतिशत का ह्रास हो जाता है।

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