म.प्र. रबी 2016-17 पांच वर्षों में दोगुनी होगी किसानों की आय

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(विशेष प्रतिनिधि)

भोपाल। खरीफ की समीक्षा एवं रबी 2016-17 की तैयारी के लिए गत दिनों संभागीय बैठकें हुईं जिसमें किसान की आय पांच वर्षों में दोगुनी करने की रणनीति पर विचार किया गया। इसके लिए समय सीमा में संभागवार रोडमैप बनाकर कार्य करने, लागत कम करने तथा उत्पादकता बढ़ाने के उपाय के साथ-साथ उद्यानिकी, पशुपालन, मछली पालन एवं रेशम उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा कृषि यंत्रीकरण, भण्डारण, पैकेजिंग, मार्केटिंग और फूड प्रोसेसिंग इकाईयां लगाकर किसानों को आगे बढ़ाने पर विचार किया गया। सभी बैठकों में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री पी.सी. मीना, प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा, प्रमुख सचिव सहकारिता श्री अजीत केशरी, संचालक कृषि श्री मोहनलाल, संचालक उद्यानिकी श्री सत्यानंद एवं संबंधित संभागों व जिलों के अधिकारी उपस्थित रहे।

इन्दौर संभाग में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री मीना ने किसानों की माली हालत सुधारने के लिए श्वेत क्रांति, हरित क्रांति और नीली क्रांति की जरूरत पर बल दिया गया। फल एवं सब्जियों के लिए भण्डारगृह बनाने तथा उनके संरक्षण व संवर्धन के लिए उपाय करने पर चर्चा की। संभाग में कड़कनाथ प्रजाति के मुर्गी पालन की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ में इसके विस्तार देने की जरूरत बताई।
सागर संभाग में ज्यादा से ज्यादा किसानों को सहकारिता से जोडऩे के लिए प्रोत्साहित करने को कहा गया है। वर्ष 2016-17 में संभाग में 24 हजार 500 किसानों को सहकारिता से जोडऩे का लक्ष्य है। संभाग में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए संरक्षित खेती को बढ़ाने पर जोर दिया। फसल बीमा की कम प्रगति पर नाराजगी जाहिर करते हुए अधिकारियों ने किसान क्रेडिट कार्ड और अमानक उर्वरकों, कीटनाशक, बीज पर कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये।
जबलपुर संभाग में ग्रामीण अर्थ व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए क्षेत्र में संचालित केन्द्र एवं राज्य शासन की योजनाओं का केन्द्र बिन्दु किसान को मानकर प्रयास करने के निर्देश दिये, इसके साथ ही संभाग के रोडमैप पर त्वरित गति से कार्य करने तथा परम्परागत फसलों के अलावा किसानों को व्यवसायिक खेती और दलहनी फसल लगाने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
शहडोल एवं रीवा संभाग में कृषि को लाभकारी बनाने के लिए खेत पाठशालाओं के माध्यम से आधुनिक तकनीक सिखाने की कृषि वैज्ञानिकों को सलाह दी गई। दोनों संभागों में धान की श्री पद्धति एवं अरहर की धारवाड़ पद्धति को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने को कहा गया।
ग्वालियर संभाग में कम पानी लगने वाली फसल किस्में लगाने पर जोर दिया गया। साथ ही निर्देश दिये गये कि फसल कटाई का प्रयोग नीतिगत हो तथा विसंगति पूर्ण नहीं होना चाहिए। फसल की वास्तविकता देखकर फसल कटाई प्रयोग की रिपोर्ट तैयार करें।
उज्जैन संभाग में फसल चक्र बदलने का प्रयास करने का सुझाव दिया गया। यंत्रीकरण को विशेष प्रोत्साहन देने के साथ सिंचाई संसाधनों का उपयोग करने पर चर्चा की गई।

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