मृदा जीवों द्वारा मृदा विषाक्त पदार्थों का अपघटन

प्रदूषकों का जैविक परिवर्तन
मृदा प्रदूषकों का स्तर कम करने में जैविक परिवर्तन की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है जो कि पादप, जीवाणु, कवक आदि के द्वारा विभिन्न प्रकार के एंजाइम द्वारा चयापचय क्रियाओं के माध्यम से संम्पन्न होता है। कीटनाशकों के जैविक परिवर्तन के अंतर्गत निम्नलिखित क्रियाएं शामिल हैं-
डिटाक्सीफिकेशन: इसमें विषैले रसायनों को गैर विषैले यौगिक में रूपांतरण कर दिया जाता है परन्तु यह पूर्ण रूप से सुरक्षित नहीं है।
अपघटन: विषम जटिल रसायनों को सरल यौगकों में परिवर्तन करके उसका खनिजीकरण कर सरल तत्वों में परिवर्तित कर दिया जाता है।
संयुग्मन: इस विधि में विषाक्त पदार्थों/रसायनों को एमिनो एसिड व कार्बनिक एसिड के साथ जोड़कर उसे और अधिक जटिल बनाकर स्वतंत्र छोड़ दिया जाता है जो पौधों व जन्तुओं के लिए अनुपलब्ध अवस्था में रहता है।
जैसे- एक प्रकार का एमिनो एसिड जीवाणु कोशिकाओं से संश्लेषित होकर मृदा में प्रयोग किये गये कीटनाशक सोडियम डाइमिथाईल डाइथाईकार्बोमेट के साथ क्रिया कर उसे जटिल यौगिक में परिवर्तित कर वातावरण में स्वतंत्र छोड़ दिया जाता है जो कि लम्बे समय तक निष्क्रिय अवस्था में बना रहता है।
एजोला
एजोला तेजी से बढऩे वाला एक जलीय फर्न है, जो पानी की सतह पर तैरता रहता है। धान की फसल में यह हरी खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्तिबढ़ती है और उत्पादन में आशातीत वृद्धि होती है। एजोला मुख्य रूप से खरपतवार नियंत्रण, बॉयोगैस हेतु कार्बनिक पदार्थ का स्त्रोत व दूषित जल उपचार हेतु प्रयोग किया जाता है। चूंकि एजोला अनुकूल वातावरण होने पर 4-5 दिन में दोगुना बायोमॉस उत्पादन करता है। साथ ही साथ पानी में घुलनशील खनिज लवणों, भारी धातुएं एवं अन्य जल मृदा प्रदूषकों का अवशोषण कर उनका स्तर काफी कम करता है। प्रदूषक अवशोषित एजोला को सुखाकर उसे कार्बनिक खादें, कम्पोस्ट व बायोगैस उत्पादन हेतु प्रयोग कर प्रदूशकों का जैव अवघटन आसानी से किया जा सकता है। एजोला की कुछ प्रमुख प्रजातियाँ जैसे: एजोला पिनाटा, एजोला कारोलिनियाना आदि दूषित जल व मृदा उपचार हेतु उत्तम है।
पादप प्लवक
पादप प्लवक, एक कोशिकीय जलीय सूक्ष्मजीव होते है जो कि समुद्र तटीय क्षेत्रों, तालाबों व इक_ा हुए दूषित पानी में पाया जाता है। पादप प्लवक को मुख्यतया दो वर्गों में बाँटा गया है:
(अ) शैवाल व (ब) साइनोबैक्टीरिया। ये पादप प्लवक वायुमंडल से कार्बन डाई आक्साईड गैस, पानी में घुलनशील पोषक तत्वों व सूर्य की रोशनी की उपस्थिति में अकार्बनिक यौगिकों को कार्बनिक अवयवों में बदलते हैं। पादप प्लवक मुख्य रूप से नाईट्रेट, फास्फेट, आयरन सल्फेट व सेल्सिलिक एसिड का अवशोषण करती है, जिससे दूषित जल में इन प्रदूषकों का स्तर काफी संतुलित बना रहता है।
नेमेटोड
नेमेटोड एक प्रमुख मृदा जीव है। जो पादप, बैक्टीरिया व कवक आदि खाद्य स्रोतों पर निर्भर रहता है। ये जीव मृदा में सूक्ष्मजीवों के संतुलन में बनाये रखने में सहायक होते हैं साथ ही साथ खाद्य श्रृंखला में अहम भूमिका निभाते हैं।
माइकोराइजा
माइकोराइजा एक कवक है जिसकी अलग-अलग तीन प्रजातियां पाई जाती है। माइकोराइजा कवक पौधों की जड़ तंत्र में कालोनी बनाता है और सहजीवी सहचर्य को विकसित करता है यह तंतुओं का एक जाल तंत्र बनाती है। ये तंतु मदृा में उपस्थित भारी धातुओं के विषाक्तता से रक्षा करती है।
केंचुआ
केंचुआ, मानव इंजीनियरों की तरह अपने आस-पास के वातावरण की संरचना बदलता रहता है जैसे उध्र्वाधर एवं क्षैतिज बिल बनाना, मृदा को ऊपर नीचे उलटफेर आदि करना जिसकी वजह से इसे पारिस्थितिकीय तंत्र का इंजीनियर कहा गया है। केंचुआ का बिल मृदा में आक्सीजन व पानी के संचार को बढ़ाने के साथ ही साथ अप्रत्यक्ष रूप से जैव अपघटन अभिक्रियाओं में सहयोग करता है।
प्लास्टिक का जैव अपघटन
चूंकि वातावरण में प्लास्टिक एक टिकाऊ वस्तु है जिसका विघटन जैविक व अजैविक कारकों के प्रभाव से एक लम्बी अवधि के बाद संभव होता है। अत: प्लास्टिक के निर्माण संघटक अवयवों में परिवर्तन कर उसे सरलता व जल्दी से अपघटित किया जा सकता है कुछ जैविक अपघटन के उदाहरण निम्नलिखित है-
प्लास्टिक जैविक अपघटन एक वातावरणीय मित्रवत सोच है। जीवाणुओं की कुछ प्रजातियां पॉलीथिन में उपस्थित हल्के अणुभार वाले यौगिकों को कुछ विशेष एंजाइमों की मदद से अपघटित कर उसे सरल यौगिकों में परिवर्तित कर देती है तथा उससे मुक्त कार्बन का उपयोग अपने कोशिका निर्माण में करती है। इस प्रकार बैक्टिीरिया की कुछ प्रजातियां जैसे स्यूडोमोनास, एल्कालिजीनस, बैसिलस आदि का कल्चर तैयार कर प्लास्टिक जैव अपघटन हेतु प्रयोग में लाया जा सकता है।
मृदा कवक अपने विभिन्न जैविक अभिक्रियाओं के माध्यम से अनेक प्रकार के एंजाइमों (पॉलीफीनॉल, आक्सीडोज आदि) का मृदा में स्राव करते हैं जो कि विभिन्न प्रकार के हाईड्रोकार्बन (पाइरेन, बेजोअल्फा, पाइरेन, आदि) को जैव अपघटन कर इनके स्तर को कम करता है। कवक की कुछ प्रजातियां जैसे:-जाइगोमाइसिटीज व अरबसकुलर माइकोराइजा आदि आक्सीडेटिव एंजाइम का स्राव कर जैव अपघटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लिग्नोसेलुलोज के अपघटन में एगोरिक्स वाइस्पोरस कवक एक असरदार अपघटनकारी पाया गया है। एस्परजिलस ग्लेयूक्स कवक पालीमरयुक्त पालीथिन के अपघटन कर मृदा में प्लास्टिक प्रदूषण कुछ हद तक कम करता है।

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