बेहतर फसल के लिए कस्टोडिया

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इन्दौर। अदामा इंडिया लि. द्वारा बेहतर फसल संरक्षण के लिए फफूंदनाशक कस्टोडिया किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। यह सभी फसलों के फफूंदजनित रोगों की रोकथाम के लिए एक रामबाण औषधि है। उक्त जानकारी अदामा इंडिया के जीएम श्री अविनाश पांडे ने दी। उन्होंने कहा कि भारत में अनेक फसलें विभिन्न फफूंदजनित रोग लगने और सही उपचार न मिलने के कारण खराब हो जाती हैं। रोगजनित फसल से कम और गुणवत्ताहीन उत्पादन प्राप्त होता है। फसल का उचित दाम नहीं मिल पाने का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। यह किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
अदामा इंडिया ने गहन शोध और परीक्षण पश्चात नया चमत्कारिक उत्पाद कस्टोडिया किसानों को उपलब्ध कराया है, जिसका उपयोग कर लाखों किसान भाई गुणवत्तायुक्त भरपूर उत्पादन प्राप्त कर प्रचुर लाभ कमा रहे हैं। कस्टोडिया विभिन्न फसलों के प्रमुख रोगों जैसे मिर्च में- फल गलन, रॉट, डाईबैक। अंगूर में- पावडरी मिलड्यू, डाउनी मिलड्यू। कुकरबिट में एंथ्रेक्नोज, पावडरी मिल्डयू, डाउनी मिल्ड्यू। प्याज में परपल ब्लॉच, मटर, आलू में – अर्ली ब्लाइट, लेट ब्लाइट। धान में- शीथ ब्लाइट, ब्लास्ट, गेहूं में- पीला रतुआ, पावडरी मिल्ड्यू और दलहन में- रस्ट, पावडरी मिल्ड्यू व लीफ स्पॉट फफू्ंदों पर नियंत्रण करता है। कंपनी के नवनियुक्त एजीएम श्री सुजीत पंचारिया ने कस्टोडिया की कार्यविधि की जानकारी दी। कस्टोडिया का छिड़काव बीमारी आने के पूर्व ही करना चाहिए, क्योंकि यह फफूंद को बढऩे से रोकता है। यह पौधों की ऊर्जा संरक्षण में भी मदद करता है। इसका छिड़काव 15 से 20 दिन पश्चात पुन: करना चाहिए, क्योंकि यह फफूंद की विभिन्न अवस्थाओं पर कार्य करता है। श्री पंचारिया ने आगे कहा कि कस्टोडिया के स्प्रे से फसल की सेहत स्वस्थ बनी रहती है जिससे ज्यादा गुणवत्तायुक्त फसल पैदावार मिलती है। उन्होंने कहा कि कस्टोडिया एक बहुआयामी फफूंदनाशक है, जो बीमारियों को रोककर उपचार करके फफूंद खत्म कर देता है और लम्बे समय तक असरदार बना रहता है। किसान भाई कस्टोडिया का उपयोग करके कम खर्च में ज्यादा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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