बीटी कपास में गुलाबी इल्ली की संभावना : श्री राठौर

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बड़वानी। बीटी कपास को गुलाबी इल्ली के प्रकोप से बचाने हेतु ही बनाया गया है। किन्तु पिछले वर्ष जिले के कुछ क्षेत्रों में इस बीटी कपास के पौधों पर सामान्य गुलाबी इल्ली का प्रकोप देखा गया है। अत: इस बार खेतों में बीटी कपास लगाने वाले किसान बन्धु पूर्ण सजगता रखें। जिससे गुलाबी इल्ली का प्रकोप दिखाई देने पर उसकी रोकथाम प्रारंभिक अवस्था में ही की जा सके। अन्यथा किसानों को 50 प्रतिशत तक उत्पादन से हाथ धोना पड़ सकता है।

उपसंचालक कृषि श्री अजित सिंह राठौर ने जिले के किसान बन्धुओं को चेताया है कि 2002 में किसानों को बीटी कपास का बीज प्रथम बार मिला था। जब से लेकर आज तक वे इससे अच्छा उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। क्योंकि बीटी कपास के पौधों में बेसिलस थूरेनजेसिस जीवाणु का जीन समाहित रहता है जो कि एक विषैला प्रोटीन उत्पन्न करता है। इस कारण से इल्ली का नियंत्रण होता है। क्योंकि यह प्रोटीन इल्ली को मार देता है। उपसंचालक कृषि ने किसान बन्धुओं से अव्हान किया है कि वे बीटी कपास के साथ-साथ नान बीटी कपास को अनिवार्य रूप से लगाये, अन्यथा कपास की फसल नहीं लें। इसके अतिरिक्त अन्य कृषक भाईयों को भी ऐसा करने हेतु दबाव बनायें ताकि सामूहिक रूप से रोकथाम संभव हो सके। वर्तमान में इस तकनीक का बेहतर उपयोग करना आपके हाथों में है बीटी कपास का यह अर्थ नहीं है कि पौधा अमर हो गया है, यह एक तकनीक है।

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