बागवानी में प्लास्टिक मल्चिंग का प्रयोग

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प्लास्टिक मल्चिंग (पलवार) क्या है:
प्लास्टिक मल्चिंग पौधों के चारों तरफ की भूमि को प्लास्टिक फिल्म से व्यवस्थित रुप से ढकने की क्रिया है।
वर्तमान में प्रयोग में लाए जाने वाले प्लास्टिक फिल्म विभिन्न रंगों एवं मोटाई में उपलब्ध है। तुलनात्मक रूप से प्लास्टिक पलवार अन्य पलवारों से पूरी तरह से पानी के लिए अभेद्य है, इसलिए प्रत्यक्ष रूप से मिट्टी से नमी के वाष्पीकरण, पानी का कम उपयोग और मिट्टी कटाव को रोकती है। इस प्रकार पलवार जल सरंक्षण में एक सकारात्मक भूमिका निभाती है तथा पैदावार बढ़ाने में मदद करती है।
प्लास्टिक मल्चिंग में विभिन्न रंग जैसे काली, नीली व पारदर्शी पलवार प्रधानत: उपयोग में लायी जाती है इसके अतिरिक्त कभी-कभी दो रंगों की पलवार का भी जैसे सफेद/काली, सिल्वर/काली, लाल/काली या पीली/भूरी उपयोग में लायी जाती है।
सब्जी वाली फसलों में प्लास्टिक पलवार बिछाना:
सब्जी वाली फसलों में मुख्यत: 25-30 माईक्रोन वाली प्लास्टिक मल्च फिल्म का प्रयोग किया जाता है। सबसे पहले खेत को अच्छी तरह से तैयार करके ऊंची उठी हुई क्यारियॉं बनाई जाती हैं। फिर इन क्यारियों के ऊपर सिंचाई हेतु इनलाइन ड्रिप सिंचाई लैटरल पाईप को लगाया जाता है। फिर उचित रंग के प्लास्टिक मल्च फिल्म को क्यारी के ऊपर बिछाया जाता है और दोनों किनारों पर दबा दिया जाता है। लगाई जाने वाली लाईन से लाईन फसल के पौधे से पौधे की दूरी के अनुसार मल्च फिल्म पर निशान बनाकर जी.आई. पाईप की सहायता से छेद कर दिये जाते हैं। अगर फिल्म पर कम दूरी पर छिद्र करने हों तो फिल्म बिछाने के पूर्व फिल्म की तह लगा कर उसमें एक साथ छेद किए जा सकते हैं। प्लास्टिक मल्च को बिछाने के लिये श्रमिकों के साथ-साथ ट्रैक्टर चलित यंत्र का प्रयोग भी किया जा सकता है। ये यंत्र ऊंची उठी हुई क्यारियों को बनाने के साथ-साथ ड्रिप लैटरल लगाने तथा मल्च फिल्म बिछाने का कार्य एक साथ करते हैं। छेद करने वाले प्लांटर भी उपलब्ध हैं जिससे मल्च किये हुए क्षेत्र में छेद करने का कार्य हो जाता है। इसके बाद बीज या पौध का रोपण इन छिद्रों में कर दिया जाता है। फसल के लिए जो भी खाद, उर्वरक आदि चाहिये उसको पलवार बिछाने से पहले भूमि में अच्छी तरह से मिला दे।
फलदार फसलों में प्लास्टिक पलवार बिछाना:
फल वाली फसलों में सामान्यत: 100 माईक्रोन मोटाई वाली प्लास्टिक मल्च फिल्म का प्रयोग किया जाता है। फलदार वृक्षों में पलवार उपयोग पौधे के आच्छादन के अनुसार करना चाहिये। लम्बाई एवं चौड़ाई को बराबर रखते हुए प्लास्टिक मल्चिंग (पलवार) को काटना चाहिये। इन फसलों में मल्च फिल्म को मुख्यत: हाथों द्वारा ही पौधों के चारों तरफ बिछाया जाता है। इसमें सामान्यत: फसलों के वितान क्षेत्र के विस्तार के कम से कम 50 प्रतिशत जड़ क्षेत्र में लगाने की अनुसंशा की जाती है। सबसे पहले पौधे के चारों तरफ की जगह को खरपतवार तथा घासफूस इकट्ठा करके साफ किया जाता है। फिर एक छोटी नाली पौधे के चारों तरफ बनाया जाता है जिससे कि मल्च फिल्म को लगाकर आसपास की मिट्टी से दबाया जा सके। मल्च फिल्म के एक सिरे से चौड़ाई वाले भाग में बीच से आधी मल्च फिल्म को काटकर पेड़ के तने के पास लगाते हैं तथा कटी हुई फिल्म को 10-15 सेमी दूसरी सतह पर आच्छादित करके मिट्टी से ढक दिया जाता है।
प्लास्टिक पलवार को बिछाते समय ध्यान देने योग्य बातें:
द्य मल्च फिल्म को बिछाने के बाद उसमें ज्यादा तनाव नहीं होना चाहिये अन्यथा मौसम के तापमान में वृद्धि व कृषि क्रियाओं के समय इसके फटने की संभावना रहेगी।
द्य मल्च फिल्म को सर्वाधिक गर्मी के समय न बिछाएं।
द्य एक बार उपयोग होने के बाद सावधानी पूर्वक लपेटकर रखी गई फिल्म को दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है, अत: यह सुनिश्चित करें कि यह फटने न पाए।
सब्जियों में प्लास्टिक पलवार से सामान्यत: 35 से 60 प्रतिशत तक उपज में वृद्धि पाई गई है। फलों में सबसे अच्छे परिणाम पपीते में पाये गये हैं जहां 60-65 प्रतिशत तक उपज में वृद्धि पाई गई है। अन्य फलों में 25 से 50 प्रतिशत तक उपज में वृद्धि मिली है।
प्लास्टिक पलवार की अनुमानित लागत:
80 प्रतिशत क्षेत्र के आवरण के आधार पर सब्जी वाली फसलों में प्लास्टिक पलवार को बिछाने की अनुमानित लागत रु. 30000/- प्रति हेक्टेयर है। इसी प्रकार 40 प्रतिशत क्षेत्र के आवरण के आधार पर फल वाली फसलों में प्लास्टिक पलवार को बिछाने की अनुमानित लागत रु. 18000/- प्रति हेक्टेयर है। पलवार को लगाने का खर्च व पालीमर की कीमत बार-बार बदलने से प्लास्टिक पलवार की लागत में बदलाव आता है।

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