बकरियों के दूध प्रसंस्करण

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प्रकृति में मौजूद अन्य सस्तन प्राणियों के माफिक बकरी भी एक सस्तन प्राणी है। मादा बकरी 1 पाव से लेकर 3 लीटर प्रतिदिन तक दूध देती है। लेकिन बकरी के दूध का जिक्र होते ही लोग नाक-भौहें सिकुड़ते हैं और उसे कतई पसंद नहीं करते। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि ज्यादातर बकरी पालक मादा तथा नर दोनों को 24 घंटे एक साथ रखते हैं। अब होता यह है कि नर बकरे के शरीर में एक विशिष्ट ग्रंथी होती हैं जिसके स्त्राव के कारण उसके शरीर में एक तीखी तेज गंध आती है। जब वे लैंगिक बढ़वार की अंतिम अवस्था में होते हैं तब तथा प्रजोत्पादन काल में यह गंध और भी तेज हो आती है। यही गंध मादा बकरियों के बदन पर चिपक सी जाती है और जब उनका दूध दोहन किया जाता है तब यही गंध दूध में शीघ्र-अति-शीघ्र, मजबूती से लग जाती हैं।
दूसरा कारण यह है कि बकरियों को नहलाया नहीं जाता क्योंकि यह उनके स्वास्थ्य हेतु लाजमी नहीं होता तथा उन्हें पसंद भी नहीं होता। उन्हें सिर्फ सूखी जगह, सूखापन पसंद होता है। इससे भी साफ-सुथरेपन के अभाव से दूध में बदबू आती है। बकरियों की मैंगनी तथा पेशाब में बहुत तेज बदबू आती है। जब बकरी का दूध दोहन किया जाता है, तब वह बाड़े में ही जहां मैंगनी और मूत्र पड़े होते हैं वहीं सम्पन्न किया जाता है। अब दूध ऐसा पेयपदार्थ है जिसमें कोई भी गंध या बदबू बहुत जल्दी लग जाती है। अत: साफ दूध उत्पादन न करने से भी बकरी के दूध में बदबू आती है। ऐसा बदबूदार दूध कोई भी ग्राहक खरीदना नहीं चाहता और बकरीपालक का आर्थिक नुकसान होता है।
असल में बकरी के मूल प्राकृतिक रुप में कोई भी बदबू नहीं होती और उपरोक्त जानकारी से पाठक समझ ही गये होंगे की बदबू नर के जरिए या साफ-सुथरेपन के अभाव से आती है। अत: बकरी से साफ बिना बदबूदार दूध पाने हेतु निम्रलिखित उपाय करें-
– मादाओं को नर से हमेशा कम से कम 300 फीट दूर रखें। उन्हें सिर्फ प्रजोत्पादन हेतु नजदीक लायें।
– बाड़ा साफ रखें। बाड़े से मैंगनी तथा मूत्र की निकासी करते रहें और उन्हें खाद के गड्डे में दफन करें ऊपर मिट्टी डाल दें।
– जहां बकरियां रखते हैं वहां मादा का दूध दोहन कतई ना करें। दूसरी साफ-सुथरी जगह पर दूध दोहन करें।
– दूध दोहन से पहले हथेलियां साफ पानी से धोयें और साफ कपड़े से सूखी करें।
– बकरी का पिछवाड़ा, दूध अयन थन सभी एक गीले कपड़े से पहले ही ठीक से पोंछ लें।
– दूध निकालने के बाद भी अयन तथा थन साफ पानी से धोवें और साफ कपड़े से पौंछ लें।
– जंतुनाशक घोल में अयन तथा थन डुबोयें। यह दूध निकालने से पहले तथा बाद में भी करें।
– दूध दोहन के बाद एक घंटे तक मादाओं को नीचे मिट्टी पर/ गंदे फर्श पर बैठने ना दें क्योंकि दूध दोहन के बाद कुल देर तक थन के छिद्र खुले रहते हैं जहां से जंतुओं का प्रवेश होता है। और संसर्ग होता है। इसी कारण थनैला नामक बीमारी भी हो सकती है। अत: यह टालने हेतु उन्हे दूध दोहन पश्चात 1 घंटे तक बैठने ना दें।
– बकरी का दूध साफ-सुथरे सूखे बर्तन में रखें।
– दूध दोहन के बाद दूध को मलमल के या सूती पतले साफ-सुथरे सूखे कपड़े से छानकर उसमें मौजूद बाल कचरा आदि फेंक दें।
– दूध दोहन के बाद छना दूध तुरंत इस्तेमाल करें। या तो उसे बेच दें या बचा हुआ दूध धीमी आंच पर गर्म कर खुला छोड़ दें। उससे निकलती हुई भांप के साथ कुछ बदबू है तो उड़ जायेगी।

प्रसंस्करण
बकरी के दूध पर प्रसंस्करण यानि उसको गर्म करना, ठंडा करना, पाश्चरीकरण करना या निर्जुतुकीकरण करना तथा उसे अलग-अलग व्यंजनों में तब्दील करना। ग्रामीण स्तर पर बकरी के दूध को गर्म कर सेवन कर सकते हैं। अगर दूध ज्यादा हैं तो उसे गर्म कर शक्कर 5 से 7 प्रतिशत (यानि 1 लीटर दूध में 50 से 70 ग्राम) तथा कुछ खुशबुदार चीज जैसे इलाइची चूर्ण या जायफल चूर्ण मिलकर खुशबूदार दूध बनाकर बेच सकते हैं।
इसके अलावा दूध में कोको चूर्ण (चाकलेट पाउडर) 1 से 1.5 प्रतिशत तथा चीनी 5 से 7 प्रतिशत तथा सोडियम अल्जीनेट स्टबीलाइजर 0.2 प्रतिशत डालकर चॉकलेट खुशबूदार दूध बनाकर बेच सकते हैं। इसके अलावा बकरी के दूध से खोआ बनाकर उससे 30 प्रतिशत चीनी मिलाकर तथा कुछ इलाइची चूर्ण तथा जायफल चूर्ण मिलाकर पेठा बना सकते हैं। उससे बर्फी भी बनाई जा सकती हैं। इसके अलावा बकरी के दूध को औटाकर उसमें चीनी मिलाकर उस मिश्रण में इलाइची चूर्ण डालकर उसे कुल्फी के सांचे में डालकर बर्फ तथा सादा नमक 1:1 अनुपात में (यानि आधा-आधा लेकर) उस मिश्रण में रखें तो कुछ समय बाद वह जमकर उससे कुल्फी बनाई जा सकती हैं।
बकरी के दूध से और भी दूसरे व्यंजन बनाये जा सकते हैं बशर्ते उसकी मूल किस्म अच्छी हो, उसमें कोई भी बदबू, कचरा या अन्य चीजे न हो और वह साफ-सुथरा हो। तभी उससे बने प्रसंस्करित व्यंजनों की किस्म अच्छी होगी।
विदेश में बकरी के दूध से चीज भी बनाते हैं। इस प्रकार बकरी का दूध बहुपयोगी है। बकरी के दूध से कई तरह के व्यंजन बर्फी, कुल्फी, पेठा तथा अन्य व्यंजन बनाने के विषय में काफी अनुसंधान हो चुका हैं तथा चल रहा हैं उसका फायदा उठाने की आवश्यकता हैं।
भारत में हम बकरी के दूध से पनीर बनाकर बेच सकते हैं। इसके लिए दूध उबालकर उसे 80 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान आने पर नींबू का रस या साइट्रिक एसिड डालकर पनीर बना सकते हैं। दूध फटने के बाद जब वह ठंडा हो जाता है तब पतले मलमल के कपड़े से छानकर उसमें मौजूद हरा पतला पानी निकालकर उसका गोला बना लें। यही पनीर है।
इसी प्रकार अगर शुद्ध, बगहैर बदबूवाला साफ-सुथरा दूध प्राप्त कर लें तो अन्य व्यंजन जैसे रबड़ी, कलाकंद, खुर्चन और खोआ तथा उससे पेठा, बर्फी आदि कई व्यंजन बनाकर मूल्यवर्धन कर सकते हैं और उन्हें बेचकर ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।

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