प्रमुख नाशक जीव चूहों का प्रबंधन

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स्वभाव :

  • चूहे चतुर, चालाक एवं शक्की स्वभाव के होते हैं जरा सा भी संदेह हो जाने पर ये किसी विशेष चीज को खाना छोड़ देते हैं ।
  • इनके अगले दांत कुतरने वाले, पैने तथा मजबूत होते हैं जो एक वर्ष में 10-12 सें. मी. तक बढ़ते हैं इस बढ़वार को रोकने हेतु चूहे अक्सर निरर्थक रूप से अनाज, लकड़ी आदि को कुतर – कुतर कर भी खराब करता रहता है ।
  • ये बिना खाये 3 दिन तक और बिना पानी के 4-6 घंटे तक जीवित रह सकते हैं ।
  • चूहों में गंध ज्ञान एवं सुनने की क्षमता अत्याधिक विकसित होती है ।
  • चूहे अपने कुल शरीर भार का 20 प्रतिशत भाग भोजन के रूप में प्रतिदिन ग्रहण करते हैं ।
  • चूहे अच्छे तैराक होते हैं, ये पाइपों, दीवारों  एवं वृक्षों में आसानी से चढ़ जाते हैं। साथ ही यह 100 से. मी. ऊँची और 4.5 से. मी. लम्बी छलांग लगा सकता हैं।
  • चूहे प्राय: बिल बनाकर रहते हैं एवं अधिकतर रात्रि के समय क्रियाशील होते हैं।

चूहों की उपस्थिति का पता लगाने के तरीके :

  • आंखों से देखकर या फिर उनके आवाज के माध्यम से।
  • बिलों को देखकर।
  • कुतरे हुए चीजों को देखकर।
  • चूहों के विष्ठा (मल) को देखकर।
  • पैरों या पूछों के चिन्ह के द्वारा।
  • चूहों के मल – मूत्र के गन्ध द्वारा।

चूहे के प्रबंधन के लिए आवश्यक जानकारी:

  • चूहे अपने बिल के 5-10 मीटर के दायरे तक ज्यादा सक्रिय रहते हैं।
  • हमारा उद्देश्य चूहों की 90 से भी ज्यादा अधिक संख्या को मारना होना चाहिए नहीं तो ये बहुत जल्दी वंशज बढ़ाते हैं।
  • चूहे एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवसन किस तरह से कर रहे हैं इस बात का ध्यान रखना चाहिए ।

रोकथाम के उपाय  
(अ) एक ही बार प्रयोग किए जाने वाले चूहेमार दवाईयां :
इन दवाइयों के एक बार के प्रयोग से चूहे बड़ी संख्या में मरते हैं। इन में निम्नलिखित दवाईयां अत्यधिक प्रचलित हैं।
जिंक फास्फाइड :

  • यह काले रंग की तीखी गंधवाली पानी मे शत-प्रतिशत्त शुद्ध पाउडर रूप में मिलती हैं तथा भारत में ही निर्मित होती है ।
  • इसका प्रयोग करने से पहले चूहों को लुभाना एवं उनके दिमाग से इस शक को दूर करना आवश्यक है, जिससे उन्हें किसी प्रकार का आभास न हो कि उनके विनाश हेतु कुछ किया जा रहा है। इसलिए दवा के प्रयोग के दो-तीन दिन पहले से सादे आटे में थोड़ी मात्रा में मीठा तेल मिलाकर मटर के दाने के आकार की गोलियाँ बनाकर घरों में चूहों के आने दृ जाने वाले मार्ग पर रख देते हैं तथा खेत में बिल के मुंह के पास या बिलों में डाल देते हैं जिससे उनकी झिझक दूर हो जाए।
  • जिंक फास्फाइड को 2 प्रतिशत्त के हिसाब से प्रयोग करते है एक भाग जिंक फास्फाइड को 49 भाग ज्वार, मक्का, गेहूँ या अन्य खाद्यानों के साथ मिलाकर उसमें थोड़ी मात्रा में खाने के तेल मिलाकर 10 से 15 ग्राम के हिसाब से प्रति बिल डालते हैं तथा बिलों को मिट्टी से बंद कर देते हैं ।

अन्य दवा बेरियम कार्बोनेट एसोडियम फ्लोरो एसीटेट आदि भी प्रयोग करते है ।
(ब) एक से अधिक बार में प्रयोग की जाने वाली दवाइयाँ :
इन जहरों का प्रयोग लगातार 5 से 14 दिन तक करना पड़ता है। इन जहरों की विशेषता यह है कि इनके प्रयोग के लिए चूहों को लुभाने कि आवश्यकता नहीं पड़ती है। चूहों के शरीर में विटामिन के का बनना बंद हो जाता है और खून जमने का स्वाभाविक गुण नष्ट हो जाता है । शरीर में अंदर ही अंदर खून बहते रहने से चूहे कमजोर होकर मर जाते हैं । इन जहरों के प्रयोग से चूहे बजाय  बिलों में मरने के खुले में मरते हैं जिन्हें उठाकर आसानी से जमीन में गाढ़ कर नष्ट किया जा सकता है।
इनमें निम्नलिखित दवाइयाँ प्रचलित है :

  • वारफेरिन यह रवेदार सफेद पाउडर है तथा बाजार में 0.5 प्रतिशत प्रलोभन के रूप  में मिलती है इसे 960 ग्राम अनाज (आटा + 20 ग्राम खाद्य तेल + 20 ग्राम वारफेरिन विषचारा के रूप में तैयार करते हैं जिसे 10 से 15 ग्राम प्रति बिल के हिसाब से प्रयोग करते हैं। अन्य दवा रेटाफिन, रोडाफिन, फ्यूमेरीन आदि भी प्रयोग करते हैं।
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