परजीवी खरपतवार नियंत्रण अमरबेल, अगिया से बचाएं बीजों को

www.krishakjagat.org

परजीवी खरपतवार वह खरपतवार हैं जो कि अपने भोजन के लिए दूसरे पौधे पर निर्भर रहते हैं। ये पौधे से जल, पौषक तत्व, कार्बोहाइड्रेट आदि ग्रहण करते हैं। ये निम्न परजीवी खरपतवार है:
1. अमरबेल
2. अगिया (रूखडी)
3. ओरोबेन्की (हड्डा)
अमरबेल:

  • यह खरपतवार मुख्य रूप से रिजका में गंभीर रूप से पाया जाता हैं।
  • अमरबेल की विभिन्न प्रजातियां फसलों (अलसी, चुकन्दर, मिर्ची, प्याज, गाजर, सूरजमुखी, नाइजर, मेहन्दी आदि) तथा कई वृक्षों पर पाई जाती हैं।
  • अमरबेल का फैलाव बीज तथा कायिकी प्रवर्धन द्वारा होता हैं।
  • एक अमरबेल का पौधा लगभग एक हजार बीज उत्पन्न करता है तथा इसकी अंकुरण क्षमता पांच वर्ष तक होती हैं।
  • यह परपोषी मिल जाने पर 35 दिन में परिपक्व हो जाता है अन्यथा 5-10 दिन में स्वत: समाप्त हो जाता है।

रोकथाम:

  • फसल के बीज में अमरबेल के बीज नहीं होवें।
  • अमरबेल के बीजों को अलग करने के लिए 10 प्रतिशत नमक के घोल में बीजोपचार करें तथा रिजके के बीज को साफ पानी में धोकर काम में लेंं।
  • अमरबेल से युक्त चारा पशुओं को नहीं खिलाएं क्योंकि अमरबेल के बीज पचते नहीं है और पशुओं के गोबर के साथ बाहर निकल जाते है । यदि यह गोबर रिजके के खेत में पहुंच जायें तो अमरबेल का फैलाव हो जाता हैं।
  • अमरबेल का प्रकोप बसंत के आगमन के समय प्रारम्भ होता है तथा यह कभी भी एक साथ नहीं फैलती हैं।

अत: रिजके के खेत का लगातार निरीक्षण करना आवश्यक हैं। यह शुरू में 2-3 स्थानों पर तथा बाद में पूरे खेत में फैल जाती है। अत: शुरू में ही अमरबेल को रिजके सहित काटकर जलाकर नष्ट कर दें तथा कटे हुए स्थानों पर पेराक्वेट का 0.1 प्रतिशत का छिड़काव करें। ऐसा करने से अमरबेल व सम्पर्क में आने वाला रिजका नष्ट हो जायेगा परन्तु सिंचाई के साथ रिजका पुन: फूट जायेगा।

FacebooktwitterFacebooktwitter
www.krishakjagat.org
Share