नवाचार कर उत्पादन बढ़ायें : श्री संदीप

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 इंदौर। यह समय कृषि में नवाचार करने का है। किसानों को परम्परागत फसल की पद्धति, फसल चक्र, रसायनिक से जैविक खेती की ओर चरणबद्ध तरीके से परिवर्तन और सबसिडी को शनै:-शनै: त्यागकर अपने बलबूते पर आगे बढऩा होगा तभी किसान अपने पैरों पर पूरी सक्षमता के साथ खड़ा हो सकेगा। सिमरोल में अनुविभागीय अधिकारी श्री संदीप जी.आर. ने जलवायु परिवर्तन का फसलों पर प्रभाव पर किये जा रहे अध्ययन के मद्देनजर आयोजित कार्यशाला और राष्ट्रीय उत्पादकता सप्ताह के दौरान  आयोजित कार्यक्रम में उक्त विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय प्रचार निदेशालय, इंदौर के सहायक निदेशक श्री मधुकर पवार ने राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद को अपने उद्देश्य में कृषि को भी एक महत्वपूर्ण विषय माना है। श्री पवार ने जल संरक्षण के लिये देवास जिलों में किये गये कार्यों की जानकारी देते हुये कहा कि प्रत्येक किसान यदि अपने-अपने खेतों में छोटे-छोटे तालाबों का निर्माण करवायें तो जलस्तर में सुधार होगा तथा निस्तार के लिये भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी। कार्यशाला में जिला पंचायत के सदस्य श्री इंदरसिंह बुंदेला, सिमरोल और मेंमदी के सरपंच श्री दिनेश सिनवाडिय़ा और श्री रूपेश वाघमारे, तहसीलदार श्री के.एल. जैन, उपसंचालक उद्यानिकी श्री डी.आर. जाटव, उप गन्ना प्रबंधक श्री अवधेश यादव, खरगोन की जवाहरलाल नेहरू सहकारी एक्ग्रीकल्चर प्रोड्यूस प्रोसेसिंग सोसायटी के प्रबंध निदेशक श्री जी.डी. पाटिल, जैविक खेती सलाहकार श्री आर.एस. परमार, कार्यक्रम के आयोजक जयपुर की सिकोडीकान संस्था के श्री गोविंद विजयवर्गीय और श्री आलोक व्यास ने भी सम्बोधित किया। श्री आलोक व्यास ने बताया कि  मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, सहित सात राज्यों के पांच-पांच गांवों के दस-दस किसानों के खेतों पर जाकर जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का अध्ययन कर रहे हैं. इसमें इंदौर के सिमरोल और मेंमदी तथा धार के उमरिया, तारापुर और मतलबपुरा का चयन किया गया है। कार्यक्रम का संचालन विकास अनुसंधान एवं शैक्षणिक प्रगति संस्थान, सिमरोल के अध्यक्ष श्री एम.एल. यादव ने किया तथा कार्यक्रम समंवयक श्री सत्यनारायण मालवीय ने आभार माना।

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