दलहन उत्पादन कर अधिक लाभ कमाएं : श्रीमती चिटनिस

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बुरहानपुर। दलहनी फसलें अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली और तिल की कास्त लागत कम है। यदि जलमान की बात करें तो परम्परागत फसलों केला-गन्ना की 250 सेमी प्रति हेक्टेयर की तुलना में दलहनी फसलों का 15-20 सेमी है। वर्षा की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुये दलहनी-तिलहन फसलों का फसल चक्र अपनाएं। जिसमें कुल आय प्रति हेक्टेयर परम्परागत फसल पद्धति के समान प्राप्त हो सके और जोखिम सहन करने की क्षमता में वृद्धि होगी। अत: किसान दलहनी फसलें उगाकर मृदा में जीवाश्म पदार्थ की मात्रा बढ़ाकर एवं जल की बचत कर मृदा की उर्वरका शक्ति को टिकाऊ बनायें।
दलहन उत्पादन विस्तार संबंध में कार्यशाला में स्थानीय विधायक श्रीमती अर्चना चिटनीस ने कार्यशाला में परम्परागत फसलें केला, कपास, गन्ना, सोयाबीन, मक्का की कास्त लागत और जल मान की तुलना करते हुए ये बात कही। परियोजना संचालक आत्मा श्री राजेश चतुर्वेदी ने धारवाड़ पद्धति द्वारा अरहर की उन्नत तकनीक विस्तार से समझाई।
कार्यशाला में जपं अध्यक्ष श्री किशोर पाटील, कृषि स्थायी समिति अध्यक्ष श्री गुलचंदसिंह बर्ने, श्री राजाराम पाटीदार, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्री अशोक महाजन, श्री योगेश महाजन, सदस्य श्री नितिन संतोष महाजन, कृषि समिति अध्यक्ष जपं नवाब हुसैन, श्री नामदेव महाजन, श्री निवृत्ती गणा, श्री मुकेश शाह, श्री रूद्धेश्वर एंडोले, श्री किशोर कामठे, श्री नगीन सन्यास, श्री विक्रम, श्री छोटे साहब अनवर, श्री महेश कुमार खराड़े आदि उपस्थित थे।

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