टमाटर, प्याज की गिरती कीमतें- किसान क्या करे ?

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पिछले कुछ दिनों से टमाटर तथा प्याज उत्पादक किसान इन उत्पादों के बाजार मूल्यों में कमी से परेशान हैं। इन उत्पादों का अधिक उत्पादन करना भी उनके लिए अभिशाप सिद्ध हो रहा है। किसान ने अपनी लागत व समय लगाकर उत्पादन तो कर लिया, पर बाजार कीमतों को देखते हुए टमाटर की तुड़ाई या प्याज की खुदाई पर खर्च करना उसको घाटे का सौदा ही नजर आ रहा है। ऐसी दशा में उसकी सहायता के लिए आगे आने वाला उसे कोई नहीं नजर आता। यह स्थिति किसी न किसी फसल के लिए प्रतिवर्ष आ ही जाती है। जिससे किसान को तो व्यक्तिगत हानि होती ही है पर इसका असर देश व प्रदेश की आर्थिक दशा पर भी पड़ता है। अब समय आ गया है कि प्रदेश व केन्द्र सरकार इस विषय में सोचे, ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित कर ऐसे क्षेत्रों में इन उत्पादों के परीक्षण के लिए इकाई खोलने के लिए प्रयास करे ताकि अधिक उत्पादन या कीमतों के नीचे गिरने की स्थिति में उनके उत्पाद बना कर उनके मूल्य में वृद्धि की जा सके। इससे किसान अधिक उत्पादन या मूल्य की गिरावट की स्थिति में हानि सहने के बजाय लाभ की स्थिति में आ जायेगा। इसके अतिरिक्त उसके परिवार या गांव के व्यक्तियों को रोजगार मिलने में भी इस प्रकार की इकाई सहयोग करेगी।
मध्य प्रदेश में टमाटर व प्याज खाद्य संरक्षण व उनकी मूल्यवृद्धि के लिए छोटी-छोटी इकाई को सम्बन्धित विभागों द्वारा कराया जाना चाहिए। इन फसलों के अतिरिक्त मध्यप्रदेश में उगाई जाने वाली कुछ अन्य फसलें भी हैं जिनसे उनके उत्पाद बनाकर उनमें मूल्य वृद्धि की जा सकती है और किसानों की आय को बढ़ाया जा सकता है। जैसे गुना क्षेत्र धनिया, सनावद-बेडिय़ा (खरगोन) क्षेत्र में मिर्च, मालवा, रतलाम, मंदसौर क्षेत्र में लहसुन, इन्दौर-उज्जैन क्षेत्र में आलू प्रमुख है।
टमाटर की गिरती कीमतों से किसान को बचाने के लिए कार्य का आरम्भ रतलाम क्षेत्र से एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आरम्भ किया जा सकता है। यह किसान की आदमनी दुगनी करने के संकल्प को पूरा करने में भी सहायक सिद्ध होगा।

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