जैविक खेती बन रही है किसानों के लिए लाभ का धंधा

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वर्तमान खेती में रसायनिक उर्वरकों खरपतवारनाशको कीटनाशक के बढ़ते उपयोग के कारण भूमि एवं वातावरण में हानिकारक तत्वों की मात्रा में बढ़ोतरी हो रही है । कृषि रसायनिक उर्वरकों तथा कीटनाशकों के अंधाधुंध  प्रयोग को बंद करने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाना आवश्यक है इसी क्रम में नीमच जिले में परियोजना संचालक आत्मा श्री अमर सिंह चौहान के मार्गदर्शन में जैविक कलस्टर का निर्माण किया है कुल 10 कलस्टर का निर्माण हुआ है मनासा में  भी 4 कलस्टर शासन की  परम्परगत कृषि विकास योजना अंतर्गत तीन वर्षीय योजना का शुभारंभ  पिछले वर्ष किया गया था जिसमे 1 -भाट खेड़ी  2- बड़ कुआ  3- देवरान 4-बासनिया ग्राम में जैविक कलस्टर का निर्माण किया है प्रतयेक कलस्टर में 50 किसान 50 एकड़ में जैविक खेती कर रहे हंै। कुल 200 एकड़ में मनासा में खेती हो रही है । पहले किसान रसायनिक का बहुत ही ज्यादा मात्रा में प्रयोग करते थे अब इस योजना अंतर्गत किसानों को उचित तकनीकी ज्ञान कृषि अधिकारियों एवं कृषि वैज्ञानिकों के माध्य्म से लगातार दिया जा रहा है।  किसानों के यहाँ जैविक फसलें तैयार हो रही हैं है किसान उनको तैयार करने में जीवामृत ,मटका खाद बना कर उसका जैविक खेती की फसलों में सदुपयोग कर रहे है  । किसानों को पीजीएस ग्रुप बनाकर ग्रुप का पंजीयन भी किया जायेगा। किसानों की फसलों की मार्केटिंग व्यवस्था की जाएगी । किसानों ने जैविक वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण भी किया है 2 ,3  बार  जैविक खादों का उत्पदान कर लिए है । रसायनिक उर्वरक का प्रयोग बिल्कुल बंद कर देने से हजारों रूपए की बचत हुई है जैविक वर्मीकंपोस्ट के निर्माण के लिए प्रत्येक किसान को 5000 रूपए का अनुदान दिया गया है।
– आर एस लोधा
बीटीएम मनासा

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