जीरो बजट में करें गन्ने की खेती

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(मनीष पाराशर/यशवंत कुशवाह)
खरगोन। गन्ना जोखिम रहित और विपरीत मौसम में भी उचित उत्पादन देने वाली फसल है। इससे नकद आय प्राप्त होती है, वहीं यदि किसान कुछ युक्तियों को अपनाएं तो वे अंतरवर्तीय फसलें लगाकर गन्ना फसल की लागत उसी खेत से निकाल सकते हैं।
कृषक जगत से रूबरू खरगोन जिले की कसरावद तहसील के ग्राम माकडख़ेड़ा के किसान श्री रूपसिंह पटेल एवं श्री हेमेंद्रसिंह पटेल बताते हैं कि नर्मदा बेल्ट में चूंकि पानी भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। इससे इस क्षेत्र के किसानों को गन्ना की खेती रास आई है।
ये है गणित
श्री रूपसिंह बताते हैं कि एक बार लगाने के बाद गन्ना 3 से 4 वर्ष खेत में रहता है। इसको लगाते समय हम 4.5 फीट की दूरी रखते हैं। गन्ने की पंक्तियों के बीच की खाली जमीन में हम खरीफ में मूंग-चवला एवं रबी के मौसम में चने का फसल लेते हैं। इन दलहनी फसलों से जहां गन्ने की फसल को जमीन में नाइट्रोजन की मात्रा सुलभ होती है, वहीं इन फसलों से मिलने वाला उत्पादन इतना होता है कि वह गन्ने की लागत को निकाल देता है। इस सीजन में हमने 13 क्विंटल प्रति बीघा की दर से चना उत्पादन लिया है, जिससे अच्छी आय मिली है। इस प्रकार जीरो बजट वाली गन्ने की फसल से हमें लाभ ही मिलता है। गन्ने की 8436 किस्म लगाते हैं, जिससे 450 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से उत्पादन मिल जाता है। गन्ने के बाजार के संबंध में उनका कहना है- जिले में स्थापित शुगर मिल्स में उनका उत्पाद आसानी से बिक जाता है।
लगातार मॉनीटरिंग
श्री रूपसिंह बताते हैं कि हम लगातार मॉनीटरिंग करते हैं। खरगोन लैब से मिट्टी परीक्षण करवाने के पश्चात आवश्यकतानुसार माइक्रो एलिमेंट्स के बेसल डोज देते हैं। गन्ना लगाने के साथ प्रति एकड़ की दर से 2 बेग स्फुर, 1 बेग यूरिया, 1 बेग डीएपी, 60 दिन की अवस्था में फिर 1-1 बेग डीएपी एवं यूरिया तथा 120 दिन की अवस्था पर 1-1 बेग डीएपी, यूरिया एवं पोटाश देते हैं। इस प्रकार मिट्टी में भरपूर पोषक तत्व उपलब्ध रहते हैं, इनसे गन्ने के साथ ही अंतरवर्तीय फसलों का अच्छा उत्पादन मिलता है।

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