चने की फसल में इल्ली प्रबंधन के उपाय

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हरदा। जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्वविद्यालय के अन्तर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र, हरदा के वैज्ञानिकों ने चने की फसल की सतत् निगरानी की सलाह देते हुए बताया कि बादल युक्त मौसम के बने रहने से फसल में इल्ली की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं इसे ध्यान में रखते हुए फसल में इल्ली प्रबंधन के उपाय अपनाना चाहिए, जब एक या एक से अधिक इल्ली एक मीटर लम्बी प्रति पंक्ति मिलने लगे तो तुरंत आवश्यक फसल सुरक्षा उपाय अपनाना चाहिए। एकीकृत प्रबंधन के अंतर्गत खेत में पक्षियों (चिडिय़ों) के बैठने के लिए टी  आकार की 2.5-3.5 फीट ऊँची खूटियां 8-10 मीटर की दूरी पर लगावे एक एकड़ क्षेत्र में 15-20 खूटियाँ अवश्य लगावें जिससे परभक्षी (चिडिय़ा) खूटी पर बैठकर इल्ली को चुन-चुन कर खाएगी, जिस कारण संतति पर रोक लगेगी।
फेरोमोन ट्रेप 4-5 प्रति एकड़ की दर से जगह- जगह लगाने पर प्रोढ़ नर पतंगों को आकर्षित कर नष्ट करें, इससे संख्या कम होने के साथ ही साथ कीट की निगरानी एवं प्रबंधन के लिए आकलन करने में उपयोगी होती हैं।
जैविक कीटनाशक ब्यूवेरिया बेसियाना 400 मि.ली. प्रति एकड़ को छिड़काव करें या न्यूक्लियर पालीहाइड्रोसिस वायरस (एन.पी.वी.) का 250 लार्वा तुल्प 3 बार छिड़काव करने पर चना फलीभेदक का प्रभावशाली नियंत्रण हो जाता हैं या बैसिलस थूरिनजेन्सिस (डिपेल या डेलफिन) 400 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करने से चना फलीभेदक का संतोषजनक नियंत्रण हो जाता हैं।

यदि जैविक विधियों एवं जैविक कीटनाशकों को अपनाने के बाद भी इल्ली का प्रकोप दिखाई देता हैं और आर्थिक क्षति स्तर से ऊपर हो तो रासायनिक कीटनाशियों का प्रयोग करना चाहिए इसके लिए इमामेक्टीन बेंजोएट 5 प्रतिशत एस.जी. 80 ग्राम प्रति एकड़ अथवा स्पाइनोसेड 45 प्रतिशत एस.सी. 70 मिली प्रति एकड़ अथवा रनाक्सीपायर 20 एस.पी. 40 मिली प्रति एकड़ की दर से 200-250 लीटर पानी हाथ पंप एवं 60-70 लीटर पावर पंप में घोल बनाकर छिड़काव करें।

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