गेहूं की बुआई के समय पोटाश दिया था, क्या अब पोटाश का छिड़काव करना आवश्यक है।

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समस्या- गेहूं की बुआई के समय पोटाश दिया था, क्या अब पोटाश का छिड़काव करना आवश्यक है।
-जय पटेल, नीमच
ग्राम- देव नगर, जि.- नरसिंहपुर
समाधान- यदि आपने बुआई के समय पोटाश 10 किलोग्राम प्रति हेक्टर की दर से दे दिया था तो आपको खड़ी फसल में छिड़काव द्वारा पोटाश देने की कोई आवश्यकता नहीं हैं। यदि आपके खेत में पोटाश की कमी है तो फसल में पत्तियां किनारों से पीली पड़ जाती है इससे आप पोटाश की कमी को खड़े खेत में पहचान सकते हैं।
अच्छा होगा कि आप गेहूं की फसल की कटाई के बाद अपने खेत से मिट्टी के नमूने लेकर उनकी मिट्टी प्रयोगशाला में मुख्य व शुक्य तत्वों की जांच करा दें। उसके परिणामों तथा अगली फसल में तत्वों की आवश्यकतानुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें।

समस्या- क्या सरसों व अन्य तिलहनी फसलों में गंधक का उपयोग आवश्यक है।
-रामसेवक, शिवपुरी
समाधान – गंधक पौधों के लिये नत्रजन, स्फुर व पोटाश के बाद चौथा सबसे महत्वपूर्ण तत्व है।
– गंधक बीजों में तेल की मात्रा बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसलिये सरसों सहित सभी तिलहनी फसलों में इसका उपयोग आवश्यक है। यदि आपकी भूमि में गंधक की मात्रा कम है तो आप इसे उर्वरक के रूप में दे।
– यदि आप स्फुर की आपूर्ति सुपर फास्फेट द्वारा कर रहे हैं तो आप 12 प्रतिशत गंधक इस से प्राप्त कर लेंगे। नत्रजन के लिये अमोनियम सल्फेट का उपयोग करने पर 24 प्रतिशत गंधक भी मिल जाता है जो पानी में अति घुलनशील रहता है।
– गंधक पौधों में अमीनो एसिड प्रोटीन बनाने के लिये भी आवश्यक है। साथ में पौधों के हरे पदार्थ क्लोरोफिल के निर्माण के लिये भी यह आवश्यक तत्व है। यदि आपके खेत में गंधक की कमी है तो पौधा नत्रजन का अवशोषण भी नहीं कर पाता है।

समस्या- नींबू की पत्तियों, टहनियों तथा फलों में उभार लिए धब्बे पड़े हैं। उपचार बतायें।
-सुरेश पटेल, जावरा
समाधान- आपकी नींबू की फसल संभवत: कैंकर बीमारी से ग्रसित है। यह रोग जेन्थोमोनास सिट्राई नामक बैक्टीरिया द्वारा उत्पन्न होता है। इसका प्रकोप ऊपरी छाल में ही होता है।
– फलों की तुड़ाई के बाद पेड़ में छटाई कर लें, जिसमें बहुत अधिक ग्रसित टहनियों की भी छंटाई कर लें।
– तेज हवा, पानी तथा कीट सिट्रस सिल्ला इसके फैलने में मदद करते हैं। वर्षा ऋतु में इसका फैलाव सबसे अधिक होता है।
– इसके नियंत्रण के लिए ताम्रयुक्त फफूंदीनाशक सबसे उपयुक्त रहते हैं। इसलिए इसके नियंत्रण के लिए हर 15 दिन में ब्लाइटॉक्स का 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव हर 15 दिन में, विशेष रूप से वर्षा ऋतु में करते रहना चाहिए। स्ट्रेप्टोमाइसिन सल्फेट 500 पीपीएम (1 लीटर में 0.5 ग्राम) का छिड़काव भी इसके नियंत्रण के लिए उपयुक्त पाया गया है।

समस्या-लौकी की नई जातियों, बीज उपचार तथा उर्वरकों की उचित मात्रा की जानकारी देने की कृपा करें।
-राजीव पाटीदार, हरदा
समाधान- लौकी की व्यापारिक जातियों में पूसा नवीन, अर्का बहार, पूसा मंजरी, पूसा मेघदूत, समर प्रोफाइल लम्बी, समर प्रोफाइल गोल, पी.एम.के.-1, सम्राट, पूसा हाइब्रिड-3, नरेन्द्र रश्मि आदि प्रमुख हैं।
– बीज बोने के पूर्व बीज को स्यूडोमोनास फ्लोरिसेन्स के 10 ग्राम या ट्राइकोडरमा विरिडी के 4 ग्राम या कार्बेन्डाजिम के 2 ग्राम प्रति किलो बीज के मान से उपाचारित कर लेना चाहिए।
– प्रत्येक थाले में 10 किलो गोबर की खाद (200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) तथा 100 ग्राम नत्रजन, फास्फोरस व पोटाश 6:12:12 देना चाहिए। बुआई के 30 दिन बाद 10 ग्राम नत्रजन प्रत्येक थाला में दें।
– आखिरी जुताई के समय एजोस्पाईरिलम व फास्फो बैक्टीरिया के 2 किलो व स्यूडोमोनास के 3 किलो को 50 किलो गोबर खाद में मिलाकर 100 किलो नीम की खली प्रति हेक्टेयर के हिसाब से दें तो अच्छे परिणाम मिलेंगे।

समस्या-मैं आम का बगीचा लगाना चाहता हूं, कृपया अच्छे आम के पौध कहां मिलेंगे। कैसे और कब लगायें बतायें।
– भूरे लाल पवार, गंजबासौदा
समाधान- आम के पौधे लगाने के लिये भूमि की तैयारी का समय आने वाला है। आपका प्रश्न ठीक समय पर आया है। इस बीच तैयारी तथा पौधों को लाने का इंतजाम किया जा सकता है। आपको निम्न करना होगा।
– आम लगाने के लिये गहरी भूमि आवश्यक है। कम से कम 200-250 से.मी. गहराई हो तथा आसपास ईंट के भट्टे लगाये ना जाते हों ऐसा स्थल हो।
– पौधे लगाने के लिये चयनित भूमि में 1 मीटर लंबे, गहरे तथा चौड़े गड्ढे तैयार करें।
– प्रत्येक गड्ढे में 50 किलो गोबर खाद, 500 ग्राम सुपर फास्फेट तथा 500 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश डाला जाये।
– आम की बम्बई ग्रीन, दशहरी, लंगड़ा, सुन्दरजा, चौसा, अग्नि, मल्लिका तथा आम्रपाली जातियों में से चयन करें।
अच्छी पौध के लिये निम्न पते पर संपर्क करें.
– प्रभारी, कुठलिया फार्म
जवाहर लाल नेहरू कृषि महावि. , रीवा
– अध्यक्ष, शासकीय उद्यान पचमढ़ी
जिला-होशंगाबाद
फोन- 07578-252074
– वैज्ञानिक, फल एवं सब्जी अनुसंधान उपकेन्द्र, ईटखेड़ी बैरसिया, रोड, भोपाल फोन-0755-2854340

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