गाय का दूध सर्वोत्तम

उन्होंने बताया  कि दुनिया में ऐसा अन्य कोई पदार्थ नहीं जिसमें भारत की देसी गाय के दूध के समान अद्भुत, बिरल और जटिल तत्व मौजूद हैं। नवीनतम खोजों के अनुसार देसी गायों के दूध में ओमेगा-3 वसा है जो डीएचए तथा ईपीए का निर्माण करती है जिनमें मानव का 70 प्रतिशत मस्तिष्क बनता है। देसी गाय के दूध में मिला कोलेस्ट्रोल होता है जो हृदय रोग से सुरक्षा करता है। इसमें मिलने वाला सिरीब्रासाइड ब्रेन टानिक है। आयोडीन, कैरोटीन तथा विटामिन डी देसी गायों के दूध में अधिक होता है। दूसरी ओर भैंसों तथा विदेशी गायों में ओमेगा-6 शुद्ध कोलेस्ट्रोल होता है। जो हृदय रोग का कारण है। इनके दूध में विटामिन डी न होने से इसके दूध का कैल्शियम का पाचन न होने से बुढ़ापे में कमजोर हड्डियों का रोग हो जाता है। डॉ. राणा  ने बताया कि देसी गाय का दूध भोजन के दोष दूर कर उसे सुपाच्य बनाता है। दूध में पचास  पदार्थ 100-150 रुपों में रहते हैं। इतना सर्वगुण संपन्न होने पर भी यह इतना सस्ता और सुलभ है कि गरीब आदमी भी इसे ले सकता है। उन्होंने कहा कि देश का प्रत्येक चौथा बच्चा असंतुलित आहार से पीडि़त है। अगर देश में गायों को उचित चारा और आहार दिया जाए तो दूध का उत्पादन 30-40 प्रतिशत बढ़ सकता है।
वैज्ञानिकों ने देशी गायों के दूध को संपूर्ण आहार माना है। इसमें 87.1 प्रतिशत जल, 12.9 प्रतिशत घन पदार्थ, 3.69 प्रतिशत वसा, 0.75 प्रतिशत क्षार तथा 4.9 प्रतिशत शर्करा पाई जाती है। गाय के दूध में आठ प्रकार के एमीनो एसिड, 11 प्रकार के वसायुक्त एसिड, 25 प्रकार के खनिज तत्व, 16 प्रकार के नाइट्रोजन   तथा चार प्रकार के फास्फोरस यौगिक और दो प्रकार की शर्करा होती है। विश्व स्तर पर हो रहे अनुसंधानों ने हमारे आयुर्वेद में वर्णित दूध के गुणों को न केवल मान्यता दी बल्कि यूरोपीय होल्सटीन, फ्रिजीयन तथा जर्सी गायों के दूध को कैंसर, डायबिटीज टाइप-1, हृदय रोग तथा बच्चों में बैड डैथ जैसी अनेक बीमारियों का कारण माना है जबकि देसी गाय के दूध में ओमेगा-3 कोलेस्ट्रॉल, सीेल, और एमडीआई तत्व हृदय रोग, कैंसर तथा डायबिटीज से रक्षा करते हैं। देसी गायों का दूध इयुनोस्टीमुलेंट, एंटीओक्सिडेंट बायोएन्हासर गुण वाला है। उन्होंने कहा कि कैरोटीन तथा शर्करा की इतनी अधिक मात्रा अन्य किसी के दूध में नहीं मिलती। इससे बनने वाले पंचघृत से दिमागी रोग ठीक होते हैं और घृत चमड़ी रोग ठीक करने में सक्षम है जबकि फ्लादि घृत संतानोत्पत्ति में सहायक है।
डॉ. इलियटी की इस खोज में दूध को ए-1 और ए-2 सिद्धांत का नाम दिया गया है। गायों के दूध में 13 प्रकार के बीटा केसीन प्रोटीन होते हैं जिनमें ए-1 और ए-2 टाइप मुख्य हैं। एशिया और अफ्रीका की गायों के दूध में ए-2 प्रकारका बीटाकेसीन होता है जबकि यूरोप महाद्वीप की गायों में ए-1 टाइप बीटा केसीन होता है।
इसी क्रम में कीथ बुडफेड ने डेविलइन द मिल्क नामक पुस्तक में लिखा है कि डायबिटीज और हृदय रोग ही नहीं ए-1 दूध में अनिद्रा, स्थूलता, बाल मृत्यु, आटिज्म, सीजोफ्रेनिया जैसे अनेक खतरनाक रोग पैदा होते हैं। जिन देशों में यह खोज की गई वहां के लोग होलिस्टीन, फ्रिजीयन और जसी आदि यूरोपीय नस्ल की गायों का ए-1 दूध पीते थे। भारतीय देसी गायों का ए-2 प्रकार का दूध होता है। यह खोज कर राष्ट्रीय पशु अनुसंधान ब्यूरो करनाल के वैज्ञानिकों ने भारतीय देसी गायों के दूध को रोगमुक्त सिद्ध कर दिया है जबकि फ्रांस, चीन, आस्ट्रेलिया जैसे देशों में अइब ए-2 दूध पिया जा रहा है। यूरोप के देशो ंने ए-1 दूध देने वाली नस्लों को ए-2 में बदलना शुरू कर दिया है।

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