खेतों में जमा पानी बाहर निकालें किसान भाई

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किसान भाईयों विगत दिनों हुई तेज बारिश से सोयाबीन के जिन खेतों में पानी जमा है उन खेतों की सोयाबीन फसल में नुकसान का अंदेशा हो गया है। यदि 24 घंटे से ज्यादा समय तक खेतों में पानी भरा रहेगा तो फसल पीली पड़कर वृद्धि नहीं कर पायेगी। साथ ही फसलों में कीट-व्याधि का प्रकोप शुरू हो जायेगा। फसलें सड़कर खराब हो सकती हैं। ऐसे में किसान भाई ये उपाय अपनायें।
1. अपने खेतों से पानी बाहर निकालने की व्यवस्था करें।
2. 15 कतारों के बाद एक नाली बनायें जिन्हें मुख्य नाली से जोड़कर जल निकास की व्यवस्था करें।
3. जडग़लन व पदगलन रोगों की रोकथाम के लिए 300 एम.एल. हैक्साकोनेजॉल 5 प्रतिशत एस.सी. या 300 ग्राम कार्बेन्डाजिम 12 प्रतिशत + मेन्कोजेब 63 प्रतिशत प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
4. फसलों के कीटों की सतत निगरानी बनाये रखें। खेतों में ञ्ज आकार की खूंटियां लगभग 20-20 मीटर की दूरी पर फसल से 2 फीट ऊंची 10-12 खूंटियां प्रति एकड़ लगायें।
वातावरण में आर्द्रता व उमस होने के कारण सोयाबीन में इल्लियों का प्रकोप होने की संभावना है। किसान भाई फसलों का सतत निरीक्षण करें एवं प्रति मीटर लाईन में दो या अधिक इल्ली दिखाई देने पर ट्राइजोफॉस 40 ई.सी. 300 मि.ली. या प्रोपेनोफॉस 50 ई.सी. 500 एम.एल. दवा प्रति एकड़ 150-200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें। यदि किसी कारणवश फसलें कमजोर नजर आयें तो अच्छे विकास हेतु बुआई के 25-30 दिन के बाद 75 ग्राम घुलनशील एन.पी.के. (19:19:19) प्रति 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें।
नीम की निम्बोली जैविक कीटनाशक बनाने हेतु अत्यंत महत्वपूर्ण है। अत: समस्त किसान भाई अपने खेतों में मेढ़ों पर/ अन्य जगह पर लगे नीम के पेड़ों के नीचे की निम्बोली को इकट्ठा करें। 5 किलो निम्बोली कूटकर अर्क बनावें। इसमें 100 लीटर पानी मिलाकर छिड़काव करें। नीम के पौधों का ज्यादा से ज्यादा रोपण करें।
(परियोजना संचालक आत्मा व उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास जिला- शाजापुर)

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