खरीफ फसलों पर वैज्ञानिकों ने किसानों को दी तकनीकी सलाह

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बालाघाट। के.जे. एजुकेशन सोसायटी आत्मा पी.पी. पार्टनर द्वारा बिरसा, बैहर, किरनापुर के ग्राम नारंगी, नेवरगांव, मोहगांवकला में फार्म स्कूल, समूह निर्माण दक्षता में प्रशिक्षण का आयोजन कर खरीफ फसल में किसानों वैज्ञानिक डॉ. एस.आर. धुवारे ने धान में मुख्य रूप से लगने वाले कीट रोग के उपचार संबंधी कृषि सलाह देकर उन्हें प्रेरित किया। धान फसल तो लें और उसके बाद आप अन्य फसल चक्र अपनाकर उससे उत्पादन में वृद्धि होगी और संक्रमित फसल में जैसे धान-जीवाणु झुलसा रोग (बेक्टीरियल लीफ ब्लाइट) या लालपत्ती रोग के लिए छिड़काव स्ट्रेप्टोसायक्लिन 12 ग्राम कॉपर आक्सीक्लोराइड 200 ग्राम प्रति एकड़ की दर से उपयोग करें। करपा, रोग, बीज उपचार कार्बेन्डाजिम दवाई 3 ग्राम प्रति किग्रा. की दर से या ट्राइसायक्लोजोल दवा 120 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। डॉ. आर.एल. राउत ने कृषकों को सलाह देते हुए कहा कि सब्जी-भाजी का उत्पादन खाने के लिये करते हैं या इसे बाजार में भी बेचते हैं तो कितने एरिया में सब्जी लगाते हैं किसानों ने अपनी रूचि दिखाते हुए कहा सेम लगी हुई और उसमें सफेद पत्ते हो रहे, इल्ली भी लगी हुई है। डॉ. राउत ने दवाई के छिड़काव के बारे में बताते हुए कहा कि क्लोरोपायरीफॉस दवा व प्रोफेनोफास दवा से भी नियंत्रित कर सकते हैं।
किसानों को वैज्ञानिकों ने एक नया नुस्खा बताया इल्ली कीट-रोग की पहचान करने के साथ 1 हेक्टेयर एरिया को नियंत्रित करता है लाईट ट्रेप लगाने इल्लियों को नियंत्रित किया जा सकता है। इस अवसर पर उपस्थित कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर.एल. राउत, डॉ. एस.आर. धुवारे, एस.ए. डी.ओ. श्री मुकेश कुलस्ते, श्री बसंत रहंगडाले (एस.एम.एस.) प्रगतिशील कृषक, श्री गुलाब सिंह चौहान, श्री लेखराम पांद्रे, श्री भाउलाल हरिनखेड़े, सोसायटी के देवेन्द्र कुमार दुबे भी उपस्थित थे।

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