कैसे होगी किसान की आय दोगुनी ?

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(विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। किसान की आय अगले 5 वर्षों में दोगुनी करने का शोर तो केन्द्र एवं राज्य सरकारें कर रही हैं परन्तु यह काम होगा कैसे इस पर कोई चर्चा नहीं कर रहा। किसान की कौन सी आय को पैमाना बनाकर दोगुना किया जाएगा, इसका कोई निर्धारित मापदण्ड है क्या? हमेशा प्राकृतिक आपदा से घिरे रहने वाले किसान को रोडमैप बनाकर सब्ज-बाग दिखाने से कुछ नहीं होगा, बल्कि निरन्तर उत्पादन बढ़ाने की कवायद कर उसे कुछ राहत दी जा सकती है। वह भी तब जब आदान सामग्रियों की कीमत कम हो तथा समर्थन मूल्य भरपूर मिले। वर्तमान में किसान की लागत नहीं निकल पा रही है तो आमदनी दोगुनी कैसे होगी? किसान को अधिक कर्ज देकर क्या आय बढ़ाई जा सकती है। क्या हम अपने घर का खर्च कर्ज लेकर चलाते हैं या लेते भी हैं तो उसे चुकाना नहीं पड़ता?

खेती को लाभ का धंधा बनाने का मुख्यमंत्री का नारा कुछ हद तक चल सकता है लेकिन किसानों की आय सीधे दोगुनी करने का नारा कुछ हजम नहीं हो रहा। आजादी के 70 साल बाद भी किसान आज उस स्थिति में नहीं पहुंचा है कि वह चैन की सांस ले सके, उसकी सभी आवश्यकताएं निर्बाध पूरी हो सकें। फिर 5 साल में क्या होगा। बड़े एवं सम्पन्न किसानों को छोड़ दें तो अन्य लघु एवं सीमांत किसानों की हालत अच्छी नहीं है। प्रदेश में खेती को लाभ का धंधा बनाने के प्रयास चल रहे हैं। धीरे-धीरे उसमें प्रगति भी हो रही है उत्पादन बढ़ रहा है। देश एवं प्रदेश आत्मनिर्भर हो गया है। हम निर्यात कर रहे हैं परन्तु अभी भी बहुत कुछ करना शेष है। आंकड़ों की बाजीगरी से कृषि कर्मण अवार्ड तो मिल सकता है ग्रोथ रेट भी बढ़ सकती है परन्तु किसान की वास्तविक स्थिति में सुधार नहीं हो सकता।
प्रदेश सरकार ने किसानों की आय दोगुना करने के लिए रोडमैप बनाया है उसमें कृषि से सम्बद्ध समस्त विभागों को शामिल किया गया है। अपने-अपने स्तर पर सभी विभाग योजनाएं बनाकर आय दोगुनी करने के महायज्ञ में आहूति डाल रहे हैं। परन्तु इस महायज्ञ के सफल होने में संदेह है। क्योंकि कागज पर उकेरे नक्शे हकीकत की जमीन पर कैसे फलीभूत होंगे। कृषि विभाग ने इनपुट लागत में कमी से 15 फीसदी, उत्पादकता वृद्धि से 30 फीसदी, क्षेत्र विस्तार से 14 फीसदी, कृषि विविधीकरण से 20 फीसदी, कटाई बाद फसल नुकसान में कमी से 6 फीसदी एवं बेहतर मूल्य व विपणन व्यवस्था से 25 फीसदी आय में बढ़ोत्तरी का अनुमान लगाया है, परन्तु इसके उलट आदानों के दामों में वृद्धि, प्राकृतिक आपदा के कारण उत्पादकता व उत्पादन में ठहराव, यंत्रीकरण की कमी एवं समर्थन मूल्य में अपेक्षाकृत वृद्धि का न होना आय दोगुनी करने में बाधक है। उद्यानिकी फसलों का अधिक उत्पादन के कारण मिट्टी के मोल बिकना प्रसंस्करण इकाईयों की कमी कोल्ड स्टोरेजों का पर्याप्त न होना विराम लगा रहा है। जबकि उद्यानिकी विभाग अगले 5 वर्षों में 7.5 लाख हेक्टेयर रकबा बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। रकबा बढ़ाने से अधिक फसलों की विपणन व्यवस्था मजबूत होगी तो किसान नकदी फसल लेंगे तथा उन्हें कीमत भी मिलेगी।
बहरहाल किसानों की आमदनी 5 वर्षों में दोगुनी करने का रोडमैप तो बन गया, लक्ष्य भी तय कर लिए गए, परन्तु उसके मुताबिक क्रियान्वयन होना, सरकार के लिए चुनौती से कम नहीं।

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