केन्द्रीय बजट और किसान

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कृषिरेव महालक्ष्मी:’ अर्थात् कृषि ही सबसे बड़ी लक्ष्मी हैै। भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि कहलाती है, जहां 49 प्रतिशत व्यक्ति खेती कर रहे हैं। भारत विकासशील देश हैै। भारत सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है, जहां विश्व में सबसे ज्यादा दूध और उद्यानिकी फसलों का उत्पादन होता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 के अनुसार भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 7.6 प्रतिशत लगाया गया है।
सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान हर साल घटता जा रहा है। भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2016-17 में कृषि एवं सहयोगी क्षेत्र में विकास दर 4.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो कि वर्ष 2015-16 में 1.2 प्रतिशत थी। वर्ष 2015-16 में खाद्यान्न उत्पादन 25.31 करोड़ टन होने का अनुमान लगाया गया है, जो कि वर्ष 2014-15 में 25.20 करोड़ टन हुआ था।
कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए वर्ष 2017-18 के बजट में विभिन्न प्रावधान किये गये हैं। कृषि और सम्बंधित गतिविधियों के लिए 58663 करोड़ रूपये आवंटित किये हैं, जो कि गत वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया हैं। केंद्रीय बजट में कृषि विकास के लिए कई योजनाओं की घोषणा की गयी है, जैसे – कृषि साख में वृद्धि, सिंचाई और जैविक खेती को बढ़ावा, फसल बीमा को प्रोत्साहन, उर्वरक अनुदान खाते में, कृषि विपणन एवं खाद्य प्रसंस्करण पर जोर आदि।
कृषि साख– कृषि में ऋण इंजेक्शन की भूमिका निभाता है। किसानों को समय पर कर्ज मिले, जिससे कृषि में पूंजी निवेश बढ़े। केंद्रीय बजट में कृषि ऋण के लिए 10 लाख करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जो कि वर्ष 2016-17 में 9 लाख करोड़ रूपये था। भारत कर्ज प्रधान देश है, जहां किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, लघु और सीमांत किसानों को कर्ज सुलभ कराने के लिए जिला सहकारी केन्द्रीय बैंकों को कोर बैंकिंग से जोड़ा जाएगा। भारत में 63 हजार सक्रिय प्राथमिक सहकारी साख समितियों को कम्प्यूटरीकृत किया जाएगा, जिसके लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से 1900 करोड़ रूपये की मदद मिलेगी। कृषि में ऋण का प्रावधान बढऩे से उन्नत तकनीक को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की आमदनी बढ़ेगी।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना– बजट में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत अगले पांच वर्षो में एक लाख करोड़ रूपये की आवश्यकता होगी। सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारण्टी योजना (मररेगा) के तहत 5 लाख कुयें और तालाब बनाये जायेंगे। प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना का उद्देश्य हर किसान की भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है और सरकार का लक्ष्य हर बून्द के साथ अधिक फसल के जरिये पानी का उचित उपयोग करना है, सिंचाई सुविधा बढऩे से फसल विविधिकरण को बढ़ावा मिलेगा। सूक्ष्म सिंचाई योजना के लिए सिंचाई के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा 5 हजार करोड़ रूपये की अलग से निधि रखी गई है।
उर्वरक अनुदान सीधे खाते में– किसानों को उर्वरकों पर मिलने वाला अनुदान अब सीधे उनके खाते में जमा होगा। केंद्रीय बजट में ऐसा प्रावधान होने से किसानों को उचित मूल्य पर उर्वरक मिलेंगे।
संविदा खेती- संविदा खेती के लिए शासन द्वारा बजट में नया कानून बनाने का प्रावधान किया गया है, जिसे राज्यों में भी लागू किया जाएगा।
फसल बीमा– कृषि मौसमी व्यवसाय है, जहां प्राकृतिक आपदा के कारण फसलें खराब हो जाती हैं। इन फसलों के नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए बजट में 5500 करोड़ रूपये से बढ़ा कर 9 हजार करोड़ रूपये आबंटित किये गये है। फसल बीमा योजना का विस्तार बजट में किया गया है। बजट में वर्तमान 30 प्रतिशत फसल क्षेत्र को बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया गया है।
कृषि विपणन-     फसलों, कृषि उत्पादों को उचित मूल्य दिलाने के लिए केंद्रीय बजट में प्रावधान किया गया है। किसान उत्पादक अपनी फसलों, उत्पादों को विभिन्न मंडियों में बेंच सकेंगे। राष्ट्रीय कृषि बाजार से देश की लगभग 585 कृषि उपज मंडियां जुड़ेंगी, ऐसा होने से मध्यस्थों की भूमिका कम होगी। बजट में प्रावधान है कि कृषि मंडी कानून में परिवर्तन कर उसे व्यवहारिक बनाया जायेगा। भारतीय खाद्य द्वारा ऑनलाइन खरीदी की जायेगी। इसके अलावा सफाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग सुविधा के लिए प्रत्येक ई-नाम बाजार को अधिकतम 75 लाख रूपये की सहायता दी जायेगी।
उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा-केन्द्रीय बजट में प्रावधान किया गया है कि उच्च मूल्य वाली फसलों जैसे – दलहन, तिलहन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रयास किये जायेंगे तथा इन फसलों के लिए समुचित बाजार व्यवस्था की जायेगी।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड– खेती मिट्टी पर आधारित होती है, जैसी मिट्टी होगी, जैसे उसमें पोषक तत्व होंगे – वैसी ही फसलों की खेती की जायेगी। इसके लिए मिट्टी का स्वास्थ्य जानना आवश्यक है। जिससे उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा मिलेेंगे।
केन्द्रीय बजट में कृषि को प्राथमिकता दी गई हैं ऐसे प्रयास किये जायेंगे जिससे हर किसान को 100 दिन के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित हो सके। किसानों, ग्रामीणों के लिये कृषि योजनाओं -कार्यक्रमों को उपयोगी बनाया गया है, जिनका लाभ लेकर कृषक ग्रामीण, पशुपालक, सब्जी, फल उत्पादक सर्वागीण विकास कर सकते हैं।

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