कृषि में डिजिटल तकनीक का उपयोग

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कार्यक्रम में कृषि मंत्री श्री बिसेन ने कहा कि आज हर क्षेत्र में आई.टी. का उपयोग बढ़ा है। इसका उद्देश्य कम समय में अधिकतम सुविधाएं लोगों को उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने हर क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को अपनाया है। श्री बिसेन ने कहा कि कृषि क्षेत्र, जो हमारे प्रदेश की अर्थ-व्यवस्था और प्रगति के लिये जरूरी है, उसमें भी अब नई तकनीक के इस्तेमाल का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि पारम्परिक तरीके से खेती करते हुए किसानों ने प्रदेश को पूरे देश में गौरवान्वित किया है। चार बार कृषि कर्मण अवार्ड मिला है। इसी को देखते हुए सरकार ने निजी क्षेत्र से तालमेल कर ऐसे यंत्रों को किसानों को उपलब्ध करवाने का फैसला लिया है, जिससे वे कम समय में कम लागत पर अधिकतम उत्पादन ले सकें। वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में मध्यप्रदेश ने सबसे पहले रोड-मेप बनाकर अमल की शुरूआत की है। इस दृष्टि से महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा तथा टैफे कम्पनी के साथ हुआ एमओयू एक बेहतर पहल है।
श्री बिसेन ने कहा कि इसके जरिये हम किसानों को एक कॉल पर उन्हें ट्रैक्टर के साथ ही वह सभी उपकरण उपलब्ध करवा सकेंगे, जो उनके खेती-किसानी के लिये जरूरी हैं।
किसान-कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन की उपस्थिति में महिन्द्रा एंड महिन्द्रा तथा टैफे कंपनी के साथ संचालक कृषि अभियांत्रिकी ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू के जरिये अब महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा और टैफे कम्पनी प्रदेश में किसानों को ट्रैक्टर के साथ अन्य कृषि उपकरण उपलब्ध करवायेंगे। इसके लिये 3 माह के लिये पॉयलेट प्रोजेक्ट उज्जैन और भोपाल संभाग में लागू किया जायेगा। इसकी सफलता और उपयोगिता को देखते हुए एक अप्रैल-2017 से इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जायेगा। इसके लिये ई-किसान सारथी एप भी बनाया गया है, जिसे डाउनलोड करने पर किसान अपने फोन द्वारा टोल-फ्री नम्बर पर अपनी जरूरत के मुताबिक सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। एमओयू पर राज्य सरकार की ओर से संचालक कृषि अभियांत्रिकी श्री राजीव चौधरी एवं महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा की ओर से जनरल मैनेजर आई.टी. श्री प्रकाश सैनानी और टैफे की ओर से सीनियर वाइस प्रेसीडेंट श्री एन. सुब्रमण्यम ने हस्ताक्षर किये। कार्यक्रम में संचालक कृषि अभियांत्रिकी श्री राजीव चौधरी ने कहा कि छोटे किसानों के पास कृषि यंत्र पहुंचाने के उद्देश्य से प्रदेश में 1500 कस्टम हायरिंग केन्द्र कार्य कर रहे हैं जिससे वह उत्पादन बढ़ा सकें। उन्होंने कहा कि कस्टम हायरिंग का यह मॉडल पूरे देश में अपनाने के साथ-साथ नेपाल में भी अपनाने पर विचार चल रहा है। उन्होंने कहा कि ई-किसान सारथी प्लेटफार्म के साथ महिन्द्रा एंड महिन्द्रा तथा टैफे जैसी ट्रैक्टर कंपनियों के जुडऩे से किसानों को ट्रैक्टर किराए पर लेने में आसानी होगी। संचालक अभियांत्रिकी ने बताया कि गर्मी में गहरी जुताई के लिए उपयोगी हलधर योजना को भी इस प्लेटफार्म से जोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही 6 कौशल विकास केन्द्र 6 ट्रैक्टर कंपनियों के सहयोग से खोले जाएंगे जिसमें किसानों को ट्रैक्टर चलाने से लेकर अन्य प्रशिक्षण दिए जाएंगे साथ ही गांव में ट्रैक्टर की कर्मशाला खोलने के दिए लगभग 2 लाख रुपए का अनुदान दिया जाएगा।
इस अवसर पर संचालक कृषि श्री मोहनलाल, राष्ट्रीय दलहन विकास निदेशालय के निदेशक डॉ. ए.के. तिवारी, केन्द्रीय कृषि अभि. संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. बरगले, कंपनियों के प्रतिनिधि, कृषक बंधु तथा कस्टम हायरिंग केन्द्रों के संचालकगण उपस्थित थे। कृषि यंत्री श्री अनिल पोरवाल ने उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।

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